अजब गजब - ४५ : मन्नाथेश्वर मंदिर , घोग्रा
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
महाराष्ट्र म नागपूर जिला क नरखेड तहसील म कारंजा - भारसिंगी सडक प लोहारी सावंगा क आघ घोगरा गाव स . घोगरा गाव क डाखऽ हात प मन्नाथगड स .
मु आन मनोज भाऊ गोरे पुरातन मन्नाथेस्वर क दरस्यन साठी नागपूर परिन निकऱ्या . लोहारी सावंगा परिन विक्की बन्नगरे बी संग आयो . अन्यासकरनी वोन दिन च ' मन्नाथेश्वर मंदिर उत्सव कमिटी ' की मन्नाथगड प मिटिंग होती . मिटिंग म कमेटी अध्यक्ष सुधाकर भाऊ घागरे , सचिव रामनाथ गोरे , वसंतराव चापले , डॉ . संजय ढोकणे , सुरेश पठाडे , नरेश मानमोडे , डॉ . प्रमोद गोरे , पंकज खवशी , उत्तमराव पेठे , सुरेश कुमेरीया , पुंजाराम मुरोडीया असा बीस तीस लोगना होता . मिटिंग म मला सबन न परिचय सागे . मु न कमेटी ला म्हरी लिखी पुस्तक , ' भोयरी मराठी शब्दकोश आणि भाषा विज्ञान ' इ सप्रेम भेट देयी . सबन सिन वोरख भयी . कमेटी न मन्नाथेस्वर सिव जी की महिमा सांगी .
घोगरा परिन मन्नाथगड पर जान साठी आडीमोडी की आन् चढाई की डांबर सडक स . वोनऽ सिवार की मन्नाथगड या सबसिन उच्ची जागा ! वासिन पंधरा गाव को सिवार दिसस . चारी कितऽ भोयर समाज का गावना . मन्नाथगड ला तिर्थक्षेत्र को सरकारी दर्जो बी भेटेस . मन्नाथेश्वर मंदिर भारतीय पुरातत्व विभाग क हात खलतऽ आवस . वून न बोर्ड लगायकन आपली जिम्मेदारी पुरी करीस ! इ तिर्थक्षेत्र रामायण काल पासिन को स . आन् मन्नाथेस्वर सिव जी को हेमाडपंथी देऊर त दिठ लागन जोगतो !
१. इतिहास आन् मान्यता : * हठयोग प आधारित नाथ संप्रदाय , हिंदू धरम को भगवान भोलेनाथ ला माननी वालो पंथ . हजारों बरस पासिन भारत च नी त् मक्का मदिना , अफगाणिस्तान , पाकिस्तान , सिरी लंका , नेपाल , तिब्बत , बंगला देस , बरमा , सयाम , व्हियटनाम , कंबोडिया पावतर भगवान भोलेनाथ को डंको नाथ पंथ न बजाये आन् भगवान भोलेनाथ क परंपरा ला खरऽ रूप कन् आघऽ बढाये . आदिनाथ भोलेनाथ नाथ पंथ का पह्यला गुरू . नव नाथ की गुरू परंपरा म ८४ महासिध्द गुरू भया . गुरू मछिंदरनाथ ला नाथ संप्रदाय का संस्थापक मानस . वून की समाधी उज्जैन म गढकालिका माय क देऊर आन् भरतरी गुफा जवर स . मछिंदरनाथ ला च मत्सेंद्रनाथ , मचिंद्रनाथ , मच्छिंद्रनाथ आन् " मीननाथ " कोस . वून न यहान जप तप करेतो . वून क नाव परिन च येनऽ गड ला मन्नाथगड आन् यहान क सिव जी ला ' मन्नाथेश्वर सिव जी ' कोस , असी मान्यता स .
* मन्नाथेस्वर देऊर क जेवनऽ हात प येक नवो देऊर दिसस . येनऽ देऊर की बी कथा अजब गजब च स . इ देऊर यहान क रामदास महाराज क हात पर बांधे . येनऽ देऊर म मन्नाथबाबा की तिरकोनी आकार की मूरती स . देऊर बांधन क पह्यले यहान घोगली को झाड होतो आन् वोक खलत च मन्नाथबाबा होतो . मन्नाथबाबा नवस / मन्नत ला पावस , असी मान्यता स . तब लोगना पोटुबाटु भया पायजेन , तेक साठी घोगल क झाड ला लाल कपडो बांधकन नवस बोलत होता .
* जूना जानता लोगना सांगस क वोन बेरा मन्नाथबाबा तिरकोनी आकार म च होता . आब वोनऽ तिरकोनी मूरती ला नाक , डोरा , मुंडो असा आंग फुट रह्यास . मन्नाथबाबा की महिमा अगाध स .
* भगवान सिरी राम , सीता माय आन् लक्षुमन बनवास क बेरा नासिक परिन मोझरी की दास टेकडी ला आयाता . वासिन मन्नाथगड ला आया आन् कयी दिन यहान रह्या . बाद मऽ यासिन रामटेक गया , असी मान्यता स . मन्नाथगड क खलतऽ आब बी सीता नहानी स . येनऽ कुंड ला फाडी कन् बांधेतो . वका चिराना आब बी दिसस . भगवान राम , सीता माय आन् लक्षुमन जी का पवितर पाय मन्नाथगड ला लाग्यास . भगवान सिरी रामजी न यहान च भगवान भोलेनाथ की स्थापना करकन् पूंजा करीस , असी मान्यता स .
* देऊर क आवार म आब बी येक घोगल को झाड स . मन्नाथगड क पायथा जवर क गाव को नाव बी घोगरा स . पह्यले यहान घोगली का खूब झाडना होता , तेकन येनऽ गाव को नाव घोगरा पडेस , असी मान्यता स .
* आपलऽ देस म गुप्त राज ( इ.स. ३२० - ५५० ) पासिन देऊरना बांधन की सुरवात भयी .
* देवगिरी क यादव राज म इ.स. १२५९ पासिन इ.स. १२७४ पावतर हेमाद्री उर्फ हेमाडपंत येनऽ राज को पंतप्रधान होतो . यादव राजा महादेव राव ( इ.स. १२६१ - इ.स. १२७० ) आन् राजा रामदेव राव ( इ.स. १२७१ - १३११ ) इन क कारभार क बेरा हेमाडपंत न भगवान भोलेनाथ का , चंडिका माय का खूब देऊरना बांध्या . वून क पह्यले बी इ.स. ११०० - १२५० काल म असाच देऊर बन्या . पर येनऽ देऊरना म नक्सीकाम की कारागीरी जास्त रवत होती . यादव राज क काल म ( इ.स. १२५० - १३५० ) नकसीकाम थोडो कम भयो पर देऊरना की संख्या खूब बाहाडी . आन मराठा राज क काल म इ.स. १८०० पावतर या परंपरा रही .
* हेमाडपंथी मंदिर की वास्तुकला मालवा क भूमीज देऊर कला ( राजा भोज - समरांगण सूत्रधार ) आन् नागर ( इंडो आर्यन ) देऊर कला मिन निबजी . हेमाडपंथी मंदिर की आपली येक खासियत स . येनऽ वास्तुकला म कारो पास्यान / खरफ बापरस . फाडी क जोड साठी / दरजा भरन साठी चुनो , गारो , मसालो यको बापर नी होत . यी बांधकाम कोड्डो रव्हस . बांधकाम क अनुसार चवकोनी , तिरकोनी , लंबा , आखुड असा दगडना घडावस . दगडना क पकड साठी दगड म च खोबन , खाच , खुटी बनावस . देऊर का खंबा येक च दगुड म घडावस . खंबा चवकोनी , साहाकोनी , आठकोनी रव्हस . मंझार क पट्टी म मूरतीना , बेल , पत्ता , भूमिती की आकरुतीना रव्हस . छत म कोनटा परिन दगडी पाटीना रचस आन् मंझार म कमल क फुल नी त् झुंबर की डिझाईन वालो दगड मांडस . हेमाडपंथी मंदिर म प्रवेशमंडप , सभामंडप , अंतराल आन गाभारो असी रचना रव्हस . दरुजा पर गनेसपट्टी , तोरन रव्हस . अंतराल जवर नंदी की मूरती रव्हस .
बाहिरीन जोतापासिन च कनी की डिझाईन बनस ज्या सीधी आमलक पावतर जास . सिखर की नानी नानी आकरुतीना बी बुड पासिन च जास . आमलक क वरतऽ करस ( कळस ) रव्हस .
२. देऊर की रचना : * मन्नाथेस्वर देऊर की सभामंडप ( २५ फिट आन् १६ खंबा ) , अंतराल ( ८ फिट ) आन तीन फुट खलतऽ १० x १० फुट को गाभारो , असी रचना स . मन्नाथेस्वर देऊर सूर्व्यामुखी स .
* गाभारा म सयोनिज सिवलिंग स . वेदी ( पीठ ) को आकार गोल रव्हस पर यहान क वेदी को आकार चवकोनी स . वेदी को मुंडो उत्तर दिस्या म स . सिवलिंग की पूंजा दकसिन दिस्या म बसकन , महादेव मुखी रह्यकन कऱ्या पायजे , असी मान्यता स .
* देऊर क दिवाल ला बाहिरीन जोतापासिन तिरकोनी बांधकाम करकन् सहारो देयेस . देऊर को सिखर , कोनी कव्हस क बनेच नी त् कोनी कव्हस काल क मार कन् पडझड भयीस . आब गाभारो आन अंतराल को सिमिट चुना को सिखर बनायेस .
३. पूंजा किरतन आन् उत्सव : * राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज को कार्यक्रम मन्नाथगड प भयेतो . वून को नानोसो देऊर बी यहान स . आब बी तुकडोजी महाराज क याद म यहान कार्यक्रम आन् महापरसाद होस .
* पह्यले यहान पकडगिरी महाराज रवत होता .वून क बाद रामदास महाराज मन्नाथेस्वर क सेवा म होता . रामदास महाराज नानपन पासिन बुलढाणा किथिन यहान आयाता . वून न रिसिदरा म ११ बरस तप करेतो . मन्नाथबाबा को देऊर आन् बाकी येवस्था वून क च हात प भयी .
* हर सोम्मार ला मन्नाथेस्वर सिव जी की पूंजापाती आन् आरती होस .
* महासिवरातरी ला मन्नाथगड पर मोठी यातरा भरस .
* मन्नाथेस्वर मंदिर आन् उत्सव कमिटी क देखरेख म साल भर यहान कार्यक्रम होस .
# नवस ला पावनी वालऽ मन्नाथेस्वर आन् मन्नाथबाबा की मोठी महिमा स .
# रामायण काल पासिन को इ पावन , पुरातन तीरथ देस भर म परसिध्द स .
जय मन्नाथेस्वर सिव भगवान की...
जय मन्नाथबाबा की...
( यासीन भोरगड जवरच स ... भोरगड की खोज आघ आयेनच..)
( सहयोग : मनोज भाऊ गोरे )
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
खूब साजरी माहिती.
ReplyDeleteधन्यवाद सर
Delete👌👍
ReplyDeleteहर हर महादेव
जय मन्नाथेश्वर भगवान की
धन्यवाद मनोज जी
Deleteजय हो भोलेनाथ, बढ़िया शानदार लिखा है भैय्या जी
ReplyDeleteधन्यवाद जी
Deleteजय हो भोलेनाथ, बढ़िया शानदार लिखा है भैय्या जी
ReplyDeleteधन्यवाद जी
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