अजब गजब - ४४ : सर्वेस्वर सिव मंदिर , लोहारी सावंगा
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
हिंदू धरम म भगवान न लय अवतार लेयास ; आन् वून क हर अवतार क पासऽ कोनतो न् कोनतो कारन होतो .
* बिस्नु भगवान न नरसिंव्ह अवतार लेयेतो . पुरान कऽ अनुसार हिरन्यकस्यप न कठोर जप तप करकन् भगवान बरमा जी सिन वरदान लेयेतो क , वू नी मानुस कन मरेन नी कोनऽ जीवजंतू कन मरेन . नी जमीन पर मरेन नी अगास म मरेन . कोनतो बी अस्त्र वोला नी मार सकेन नी अवजार ! वोला दिन म बी मरन नी आयेन , आन रात म बी मरन आयेन . वोला नी घर मझार मरन आयेन नी दाठ्ठा बाहिर .
* येतरा वरदान भेट्या बास्त हिरन्यकस्यप सोताला तीन लोक को मालक समझन ला लाग्ये . वोनऽ सबन ला सांगे क भगवान बिस्नूदेव की पूंजा सोडकन वोकी च पूंजा करो आन् नाम जपो .
* हिरन्यकस्यप ला परलाद नाव को पोरग्यो भये , जी भगवान बिस्नूदेव को भगत होतो . हिरन्यकस्यप न लाख कोसिस करी पन् परलाद पर वको असर नी पड्ये .
* येक दिन परलाद न कह्ये क भगवान चराचर म स . तब हिरन्यकस्यप न वोला कह्ये क , तुमारो भगवान सबन जागा प स त महाल क येनऽ खंबा म काहे नी दिसत ? असो कह्यकन वोनऽ खंबा ला लात मारी . तब वोमिन भगवान बिस्नूदेव को नरसिंव्ह अवतार परगट भये ! नरसिंव्ह भगवान न हिरन्यकस्यप ला उठाये आन् महाल क दाठ्ठा म आपलऽ मांडी पर धरे . भगवान न नख कन वोकी छाती फाडी , जेकन वू मर गयो .
* हिन्यकस्यप ला मारन क बाद बी भगवान को राग कम नी भये . वून क राग कन तीनो लोक म हाहाकार मचे . येको उपाव ढुंढन साठी सबन देवलोक भगवान भोलेनाथ ला भेटे . भगवान भोलेनाथ न मानुस , घार आन् सिंव्ह क रूप वालऽ भगवान सर्वेस्वर को अवतार लेये . भगवान भोलेनाथ को इ १६ वो अवतार ! भगवान नरसिंव्ह आन् भगवान सर्वेस्वर म १८ दिन लढाई भयी . जब भगवान नरसिंव्ह कमजोर पडन ला लाग्या तब वून को राग बी नरम पडे . तब सबन न भगवान की जयजयकार करी आन् भगवान नरसिंव्ह भगवान बिस्नूदेव म लीन भया .
१. सर्वेस्वर सिव मंदिर : * कारंजा - भारसिंगी , २४५ नंबर क राज्य सडक प कारंजा पासिन १७ कि.मी. दूर लोहारी सावंगा गाव स . लोहारी सावंगा नागपूर जिला क नरखेड तहसील म आवस .
मु आन मनोज भाऊ गोरे लोहारी सावंगा को अनोखो सर्वेस्वर सिव मंदिर देखन साठी गया . आमी लोहारा मिन सीधा कार नदी जवर गया . लोहारा गाव कार नदी क काठ पर बसेस . कार नदी जवर डाखऽ हात प सर्वेस्वर सिव मंदिर की कमान आन आब च बांधे ती सभामंडप स . देऊर क आवार म बड को झाड स . सभामंडप क पासऽ महादेव मुखी हेमाडपंथी देऊर दिसस . यादव राज क जमाना को इ सर्वेस्वर सिव मंदिर ८०० बरस पुरानो स . महादेव मुखी प्रवेसद्वार मिन अंदर गया बास्त १० x १० फिट को पुरो दगड को सभामंडप दिसस . येनऽ सभामंडप म गनेस जी , नागदेवता , हनुमान जी , पिंड आन् नंदी की मूरतीना धरीस . सभामंडप म गया बाद जेवनऽ हात प ९० ° कोन पर अंतराल आन् गाभारो स . अंतराल ३ फिट चवडो स . वोकऽ दिवाल म डाखऽ हात प गनेस जी आन् जेवनऽ हात प नागदेवता की मूरती स . खलऽ नंदी स . अंतराल आन् सभामंडप की जमीन येक लेवल प स पर गाभारो ३ फिट खलतऽ स . हेमाडपंथी देऊर म गाभारा की लेवल सभामंडप आन् अंतराल सिन खलतऽ रव्हस . देऊर क पसचिम दिस्या म कार नदी स . गाभारा को मुंडो सूर्व्यमुखी स .
* पह्यलऽ येनऽ देऊर को आवार आन् बांधकाम मोठो होतो . आब येतरोच बांधकाम बाचेस . बाकी जागा प आब अनखिन देऊरना बांध्यास .
* देऊर क सूर्व्यामुखऽ पह्यले गढी होती . समय क मार कन् वकी नावनिस्यानी खतम भयी . उच्ची जागा तेतरी दिसस . लोहारा म लय पुराना बाडा स . पुरानऽ जमाना मऽ लोहारा मोठी पेठ होती . पुरानऽ वयभव की निस्यानी जागा जागा पर दिसस . समय क संग कार नदी मिन लय पानी बह्यो . भोयरी संस्कृति को लोहारी सावंगा येक गढ होतो . वोकऽ चारी कितऽ भोयर का गावना फयल्यास .
* भगवान सिव जी को अनोखो सर्वेस्वर सिव जी अवतार , उसोच अनोखो वून को ठानो लोहारी सावंगा !
जय सर्वेस्वर सिव जी की......
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
खूब साजरी माहिती.
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