अजब गजब - ४२ : हनुमान मंदिर , राजना
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
मध्यप्रदेस म छिंदवाडा जिला क पांढुर्णा तहसील म राजना गाव स .
आबऽ तुमी पुसेन क , कोनतो राजना ? राजना क राजना पावर हाऊस क राजना जोड क राजना हेटी क राजना फॅक्टरी क राजना टप्पर ????....
जरासो दम लेव ! राजना इ भोयर समाज को असो येकलो च गाव स , जेकऽ आजू बाजू न राजना नाव का अनखिन पाच गाव बस्यास .... राजना गाव की असी या गजब कथा . पर या अजब गजब कथा यहान च खतम नी होत !
अखिल भारतीय भोयर पवार महासंघ का अध्यक्ष डॉ नामदेवराव दयारामजी राऊत इन को इ राजना गाव . मुर राजना गाव म पुरानऽ जमाना पासिन को राऊत बाडो स . आन् येन च राऊत बाडा म ११२ बरस पुरानो परसिध्द हनुमान मंदिर स . नवऽ धारमिक आन् सामाजिक रिवाज ला इलाखा म परसिध्द करनी वालो सरधा स्थान !
१. इतिहास : * राजना गाव म मोठ्ठो राऊत बाडो स . या कथा चालू होस आपाजी राऊत पासिन . डॉ नामदेवराव राऊत जी का आपाजी राऊत दादाजी . रामभक्त आपाजी को सोभाव सीधो साधो , धारमिक आन् मिलनसार होतो . वून न लोगना ला ज्या बी बात सांगी , जि बी सलो सांगे ; ती धरम , हित आन् न्याव को च सांगे . खेती बाडी म सोना की फसल आन् बाडा म गोकुल नांदत होतो . रोज क सरखा येक दिन आपाजी खेती बाडी को काम देखन साठी गयाता . खेत म घुमता घुमता वून ला अचानक च साकस्यात्कार भयो क , बाडा म हनुमान जी की स्थापना करेन त कुटुंब म सुख संपद , खुस्याली म अजून बरकत आयेन . वुई वोन च धुंध म घर आया . घर म या बात वून न सबन ला सांगी . सबन को आवबिचार लेये . बाडा म खुसी की लह्यर आयी . आपाजी न येक मोह्यतूर देख कन् हनुमान जी को देऊर बांधन की सुरवात करी .
* देऊर साठी खरफ दगड आयो . देऊर साठी खरफ का दगड घडावन को काम होन ला लागे . खरफ कन च हनुमान जी की मूरतीना घडायी . येक हातजोड्या दास हनुमान जी की आन् येक द्रोनागिरी पहाड हात म लेये वीर हनुमान जी की ! देऊर क महादेव मुखी दिवाल प दकसिन मुखी या हनुमान जी की मूरतीना बसाडी . पसचिम दिवाल प गनेस जी , माय अनपुरना , सेसनाग की मूरतीना बसाडी . सूर्व्यामुखी दिवाल प सिवलिंग आन् नंदी की स्थापना करी . हनुमान जी की मूरतीना सोडकन बाकी मूरतीना कारऽ पास्यान की स . महादेव मुखी दिवाल प रिध्दि सिध्दि आन् दुसरी मूरतीना स . देऊर क सूर्व्यमुखी दिवाल प बाहिरीन सूर्व्यदेव की मूरती स .
२. उत्सव : * आपाजी को पोरग्यो दयाराम जी मनजे डॉ नामदेवराव जी का दाआजी . दयाराम जी क कारभार पासिन च वून को मंढोट पोरग्यो गनपतरावजी गाव क भजन मंडल संग देऊर म हर सोम्मार आन् येकादसी ला भजन करत होता . माडी पासिन कारतिक पुनव पावतर गाव की डिंडीना हनुमान जी क देऊर म काकड आरती करत होता .
* इ.स. १९६० पासिन इ.स. १९८५ पावतर राऊत बाडा क येनऽ अनोखऽ हनुमान मंदिर म संत सिरी गुलाबबाबा को हर साल कारतिक पुनव ला किरतन होत होतो . बाडा क हनुमान मंदिर कन् राजना गाव म कयी धारमिक आन् सामाजिक रिवाज पड्या . संत सिरी गुलाबबाबा को परसिध्द किरतन आयकन साठी आजू बाजू क गाव का हजारों लोगना राजना आवत होता . आपाजी राऊत न लगाये धारमिक आन् सरधा को झाड चारी आंग बाहाडेस . राऊत बाडा को हनुमान जी आब पुरऽ इलाखा को सरधास्थान स . दिवारी साठी गाव म आवन वाली बू बेटीना को आब कारतिक पुनव क बेरा म आवन को रिवाज पडेस .
* राऊत बाडा क हनुमान जी मंदिर म हर साल दुय मोठा धारमिक उत्सव होस . येक कार्यक्रम कारतिक पुनव ला होस . झालपड्या क बाद तुरसी को बिह्या लागस आन् रात म भजन होस . अरधऽ रात कन् टिपुर ( त्रिपुर ) बारस . दुसरऽ दिन सकार पासिन च भजन किरतन चालू रव्हस . सबन डिंडीना आन् भजन मंडल देऊर म आवस . दुफारकन् ' गोपाल काला गोड झाला ' असो भजन कह्यकन् दही लाही को कार्यक्रम होस .
दुसरो मोठो कार्यक्रम हनुमान जयंती ला होस . देऊर की लिपाई पोताई करस . हनुमान जयंती क पह्यलऽ दिन झालपड्या पासिन देऊर म भजन किरतन होस . दुसरऽ दिन सकार पासिन होम हवन चालू होस . भजन डिंडी म आया भक्त लोगना को पाय पखारकन् राऊत कुटुंब स्वागत करस . भजन पूजन , किरतन आरती भया बास्त दही लाही को कार्यक्रम होस . आबऽ दही लाही भया बाद राजेश राऊत महापरसाद को आयोजन करस . महापरसाद साठी पंगतना बसस . दिन बुड्या हनुमान जयंती कार्यक्रम को समापन होस .
३. जिर्णोद्धार : बाडा क आवार क मंझार म इ हनुमान जी को देऊर स . ११२ बरस पुरानऽ येनऽ देऊर जवर पिपर का झाडना बाहाड्याता . देऊर की टुट फुट बी होय रह्यिती . आपाजी राऊत क चवथऽ पिढी का राजेश राम राऊत इन न हनुमान मंदिर क सुधार को काम हात म लेये . वट्टो , देऊर ला नवा सरखो सुधारे .. रंगरोगन कऱ्यो . आब येनऽ देऊर ला देख्या बास्त असो वाटत च नी क इ ११२ बरस पुरानो स ...
३० नवंबर २०२० ला पुरो कुटुंब न यहान होम हवन कऱ्यो आन् देऊर पह्यला सरखो दरस्यन साठी खुलो भये .
# आपलऽ पूरवजना न असी महान संस्कृति घडायी... बढायी.. !
आपला रिती रिवाज , बोली , परंपरा को जतन करन की जिम्मेदारी आपली स . आघ क उन्नती संग च पासऽ की परंपरा , वोको वयभव , बोली बी टिकायकन् धरी पायजेन ...
( स्रोत आन् सहयोग : डॉ नामदेवराव राऊत )
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
जय हनुमान जय श्री राम
ReplyDeleteधन्यवाद
Deleteखूब साजरी माहिती.
ReplyDeleteधन्यवाद सर
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