अजब गजब - १३ : मोगली
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
जंगल - जंगल बात चली है पता चला है , चड्डी पहन के फूल खिला है..फूल खिला है......
' जंगल - जंगल बात चली है पता चला है , चड्डी पहन के फूल खिला है...' इ टि. वी. पर को गानो सबन ला याद होयेनच ! दूरदर्सन प जंगल बुक नाव की सीरियल आयीती , वोको यी टायटल गानो . सीरियल को मुख्य किरदार होतो , ' मोगली ' .
मध्यप्रदेस क सिवनी जिला म इंग्रज सरकार क बखत येक पोरग्यो जंगल म सापडेतो . जी कोलाना ( भेडिया ) संगऽ पल्यो बढ्योतो . वून क सोहबत क कारन वकी आदतना बी कोला सरखीच भयीती . वोकोच नाव मोगली ! सिवनी जिला को पेंच को जंगल मोगली को घर होतो .
१. इतिहास : * सर विलियम हेनरी स्लीमन क ' येन अकाउंट आफ वाल्वस नरचरिंग चिल्ड्रन इन देयर डेन्स ' दस्तावेज म मोगली की जानकारी स. वोम लिखेस क सिवनी जिला क संतबावडी गाव म इ.स. १८३१ म येक नानो पोरग्यो जंगल मिन पकड्यो , जी कोलाना क संग गुफा म रव्हत होतो .
* ' जंगल बुक ' को लेखक रुडयार्ड किपलिंग को जलम मुंबई म भयोतो . वोला लिखन को आन् घूमन को स्यवक होतो . वू जब घूमन ला मध्यप्रदेस क जंगल म आयो त् फारेस्ट रेंजर गिसबार्न न वोला मोगली की हकिगत सांगी . जंगली जनावर क संगत म रह्या कन् मोगली को सिकार करन को हुनर बी अजबच होतो , या बात सांगी . इंग्रज लेखक न मोगली क कारनामा की ' जंगल बुक ' किताब लिखी , ज्या पुरी दुनिया म परसिध्द स .
* ' जंगल बुक ' म लेखक रुडयार्ड किपलिंग न जी झाड - जंगल , नदी - नाला , टेकडी - पहाड को वरनन करेस ती सिवनी जिला क पेंच जंगल सिन पुरो मेल खास .
* इ.स. १९८९ म येन ' जंगल बुक ' परिन जपान न पह्यल ऽ डाव ५२ येपिसोड की सीरियल बनायी .
* इ.स. १९९० म येन जपानी सीरियल ला हिंदी म डब करकन् दूरदरसन प दिखाडी .
* येन सीरियल को टायटल गानो , ' जंगल जंगल बात चली है....' गीतकार गुलजार न लिखेतो आन् संगीत विशाल भारद्वाज न देयेतो .
* ' जंगल बुक ' किताब को प्रकासन इ.स. १८९४ म भयेतो .
* डिजनी स्टुडिओ न १९६७ म ' जंगल बुक ' क आधार पर येनिमेसन सिनिमा बनायो .
२. उत्सव : मध्यप्रदेस सरकार हर साल पोटुबाटुना साठी तीन दिन को ' मोगली उत्सव ' को आयोजन करस . वून ला जंगल , पहाडी , नदी दिखाडस . येन उत्सव आन् जंगल सफारी कन् पोटुबाटुना म पर्यावरन आन् जंगली जीव जंतू क बारा म माहिती भेटस आन् वून म जागरूकता बाहाडस .
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
बचपन का पसंदीदा कार्टून अपनी बोली भाषा में अभिनंदनीय
ReplyDeleteधन्यवाद सर
Deleteमोगली क बाराम खूब साजरी जाणकारी।
ReplyDeleteखुप मजेदार विषय स..खुप छान वर्णन
ReplyDeleteधन्यवाद सर
Delete