भोयर अन् नदी माय - ६ : पूर्णा
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
नर्मदा सरयूश्चैव तथा वेत्रवती नदी
तापी पयोष्णी चंद्रा च विपाशा कर्मनाशिनीम् ।४।
पुष्या पुर्णा तथा दीपा विदीपा सूर्यतेजसा
सहस्त्रवृषदानात्तु यत्फलं लभते ध्रुवम् ।५।
__ महादेव उवाच
पद्मपुराण खण्ड ६ ( उत्तरखण्ड: ) अध्याय - ०२२
नदी सभ्यता आन् संस्कृति ला जलम देस . माय का सारा गुन नदी म रव्हस . तेकन नदी ला माय च कोस , वोकी पूंजा करस . भोयर संस्कृति बी नदी माय क सहारा कनच पयदा भयी , बाहाडी ! भोयरी संस्कृति मऽ पुर्ना माय ला खास मान स .
* पूर्ना नदी का पयोष्णी , पयसानी , संपूर्णा , अन्नपूर्णा , चंद्रकला यी नावना स .
* मध्यप्रदेस क बयतूल जिला म भैंसदेही जवर कासी तलाव मिन पूर्ना माय को उद्गम भयो .
१. इतिहास आन् मान्यता : * ' पूर्णा दर्शन ' म पूर्ना माय की जलम कथा सांगीस . पूर्ना माय क उगम जवर महकावती ( महिष्मति ) या रघुवंसी राजा गय की राजधानी होती . बाद म महिषासुर नाव पडे . आन् आब भैंसदेही नाव स . गय राजो निसंतान होतो . वून न दुरवास रिसी ला यी दुख सांगे . अठ्ठ्यासी हजार साधुसंत की रोज सेवा करन को उपाव वून न राजा ला सांगे . राजा न उसोच करे . येक दिन साधू लोगना न दूध मांगे . येतरा साधुसंत साठी दूध की येवस्था करनो मुसकिल च काम होतो पर साधुसंत ला नाराज बी नी करता आवत होतो . राजा न देवाधिदेव महादेव की आराधना करी . भोलेनाथ जी न येनऽ धरमसंकट मिन बचावन साठी चन्द्रकला ला धरतीलोक प ल्यावन को उपाव राजा ला सांगे . चन्द्रकला न तमाम साधुसंत ला तृप्त करे पर बाद मऽ वून न दूध को अपमान करे . दूध पेकन बी वून क मन म चन्द्रकला साठी माय को भाव नी आयो . वून क मन म वासना पनपन ला लागी . चन्द्रकला ला राग आये न वा गायब भयी . चन्द्रकला क गायब भया प राजो चिंता म पडे . वून न करून ( करुण ) स्वर म चन्द्रकला साठी विलाप करे . ममतामयी माय चन्द्रकला को मन पिघले . वा दूधधारा क रूप म जमीन सिन निकरी , तेकन वोला ' पयोष्णी ' इ नाव पड्यो . वोकऽ तप बल कन् साधुसंत दगड बन्या . याच पयोष्णी आघऽ चलकन् पूर्ना क नाव कन् परसिध्द भयी .
* गनेस पुरान लिखनीवाला रिसी मुद्गल को आसरम पूर्ना माय क काठ पर रिनमोचन ला स .
* कासी तलाव प पूर्ना माय आन् सिध्देस्वर नाथ महादेव मंदिर स . येनऽ मंदिर क निरमान साठी राजा न वोन बेरा का परसिध्द इंजिनिअर नागर - भोगर ला बलायो . इ दुय भाईना केतरो बी मोठो काम रव्हन देव , येकच रात म पुरा करत होता . आन् वूई नाघोरा कन् काम करत होता . वून ला काम करन क बेरा कोनी न देखे त वूई गोटा बनत होता . नागर - भोगर भाई न काम चालू करे . जेवनबेरा प वून की बहिन सिदोरी लेकन गयी . वा गयी तब काम चालू च होतो . वोनऽ गलती कन् भाईना ला देख लेये . बस्स.... दुय बी भाईना दगड बन्या आन् देऊर को काम अपुरोच रहे , असी मान्यता स .
* सूर्व्यदेव की आन् पुनव क चांद की पह्यली किरन गाभारा ( गर्भगृह ) म पडस .
* नंदी ला जोरकन् हात लगाये त् घंटी सरखी आवाज आवस .
* पुरान कऽ अनुसार सिध्देस्वर नाथ ' उपज्योर्तिलिंग ' स .
* पूर्ना को मतलब पुरो आन् पयोष्णी को मतलब अमरित स .
* रुखमनी हरन क बाद सिरी किस्न देव आन् रखुमाई पूर्ना काठ क ' रिनमोचन ' तीरथ प गयाता .
२. तीरथ आन् उत्सव : * भैंसदेही पासिन ५ कि.मी. पर घोघामा गाव जवर कारतिक पुनव पासिन १५ दिन को पूर्ना मेलो भरस . जिन ला पोटुबाटु नी वूई लोग मन्नत मांगस . आन् वून की मन्नत पुरी भयी त् पोरग्यो नी त् पोटी ( जि बी भयी होयेन ) ला लेकन यहान आवस . वोला पारना म धरकन् पूर्ना माय क कोरा म डावस .
* पूर्ना - सरोसती संगम प वामनी तीरथ स .
* रिनमोचन ( ऋणमोचन ) तीरथ पर पूर्ना माय सूर्व्यामुखऽ बाह्यस . यी तीरथ पुन्यकारक स . यहान पुस मह्यना क इतवार ला घाडोच महत्त्व सऽ . पुस मह्यना क हरेक इतवार ला यहान मेलो रव्हस . पुस मह्यना पासिन रथसपतमी पावतर रोज भंडारो रव्हस . गाडगे महाराज न यहान घाटना बांध्यास .
* चांगदेव जवर पूर्ना माय सूर्व्य की लेक तापती ला भेटस . यहान योगी गुरू चांगदेव को देऊर स .
# जय पूर्ना माय #
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
मानव सभ्यता की प्रकाश में नदी मुख्य भूमिका के रूप में रही है आपने बैतूल जिले में वर्धा नदी मां ताप्ती नदी के साथ-साथ पूर्णा नदी का भी वर्णन अपनी भाषा में किया बहुत ही अभिनंदनीय है धन्यवाद
ReplyDeleteधन्यवाद सर
Deleteपूर्णा नदी की खूब साजरी माहिती.
ReplyDeleteधन्यवाद सर
Deleteसुन्दर प्रस्तुति ।।👌👌
ReplyDeleteधन्यवाद सर
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