घटी
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
चले पल पल साठ
येक घटी नापे काल
दिन पायरऽ मह्यना
सर सर सरे साल ।१।
पीठ दरन क साठी
फिरे गन गन गोल
संग सुख दुख गाना
भाव भावना का बोल ।२।
माय माऊली को नातो
जसी घर की मयाल
घटी उखर मुसर
ज्याने मन को गा ताल ।३।
दरे भाग का जोंधरा
सांडे खुसी को गा मोल
सुटे घटी क खुटा ला
वोकऽ हातकन् वोल ।४।
फिरे अगास मऽ घटी
चांद पुनव को गोल
बगरायीस चान्नीना
न्यारो देवाजी को खेल ।५।
थांबी घरघर घटी
बुजे उखर यी खोल
आडा पर धरी रयी
गये मुसर को ताल ।६।
भया हातना मोकरा
हासी घर की दिवाल
लांघी धरती अगास
वोकी पाखरू की चाल ।७।
रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
👌👍💐 खुब साजरी रचना
ReplyDeleteखूब साजरी रचना
ReplyDeleteधन्यवाद सर
Deleteशानदार रचना
ReplyDeleteखूब साजरी कविता
ReplyDeleteधन्यवाद सर
Deleteघटी क बाराम् अप्रतिम माहीती दिस ।। मनपासीन अभिनंदन ।।
ReplyDeleteधन्यवाद सर
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