Monday, October 5, 2020

भोयरी संस्कृति - ३२ : गह्यना. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

भोयरी संस्कृति - ३२ : गह्यना
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली


भोयरी म गह्यना ला बिसरो , भांडो , जेवर बी कोस .
बखत क साथ साथ पहनावो , बिचार , जरुरत, आवड निवड बी बदलत रव्हस . दुय तीन पीढी पह्यलो को पहनावो , रहन सहन आन् आज क पहनावा , रहन सहन म घाडोच फरक पडेस . 
# गह्यना 

१. मानुस ( आदमी ) का गह्यना : 
* कान - मूरकी , साकर 
* हाथ - बेर ( कडा ) 
* कंबर ( कमर ) - करदोडो 
* गरा ( गला ) - कन्ठो , गोफ , 
* उंगल - मुंदी , नग 
* कमीज - चांदी की गुदाम , साकर

२ . बाईलोग का गह्यना : 
* माथा - छवका , बिन्दिया 
* कान - तनुड , बिरी , बारी , रिंग , डुल , बुगडी 
* नाक - नथ , नथनी , लवुंग , चमकी 
* गरा - येकदानी , गरसोरी , कारलो डोरलो , हास , चंदनहार , सिक्का सल्ला , साकरी , हमेल 
* हाथ ( जेवनो ) - पाटली , गोलेटा , काकन , मस्तोरा 
हाथ ( डाखो ) - माटी , दोरा ( चांदी को ) , गोलेटा , पाटली , काकन , मस्तोरा 
* दंड ( बाजू ) - कोपरकडी , बाकड्या 
* कंबर ( कमर ) - करधनी , आकडो , मेखलो 
* उंगल ( जेवनऽ हाथ की ) - फेवल , मुंदी , जागीर 
* उंगल ( डाखऽ हाथ की ) - अंगूरदाना ( आंगठा म ) , मुंदी , आरसी , रुपया , चार आनी , नानी मुंदी 
* पाय - तोड्डी , पयजन , कडलय , रुल , कड्डी 
* पाय की उंगल - आंगठो , जोडवा , मच्छी , फूल ( हिरोंदी ) , मुंदी 

३.  विदर्भ भूषण सौ . पार्वतीबाई महादेवराव देशमुख इन क ' उजळणी ' कविता संग्रह ( मराठी ) म की येक गह्यना पर की कविता - 

कानात तनुड

कानात तनुड 
हमेल गळाभर
कोपरकड्या शोभे
बाई दंडावर

आरसी अंगुळदाणा
जागीर मंधच्या बोटी
उजेड पडला
बंधुजीच्या ताटी

सरी साखळी 
शेवाच्या आडून
कपाळाचं कुकू
दिसते दुरून 

( साभार : सतपुडा की संस्कृति - सम्पादक : वल्लभ डोंगरे )

प्रस्तुती : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर 

3 comments:

  1. खूब साजरी माहिती.

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  2. सुंदरता को रूप गहनों से बढ्य बहुत ही साजरो लिख्यो अभिनंदन

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  3. गहयना ।।जेवर ।।खुप साजरी माहीती दिस 👌👌👌

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