अजब गजब - २४ : आम्बा वाली माता
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
मध्यप्रदेस क इंदौर म ' आम्बा वाली माता ' को चमत्कारी देऊर स . राजेंद्र नगर भाग क दत्तनगर म आम्बा वाली माता को दरबार स . दूर दूर सिन भक्त लोग यहान नवस बोलन साठी , दरस्यन साठी आवस . दुनिया म संतान सुख सिन मोठो दुसरो सुख नहाय . गोदभराई साठी माय बहिनना , बू बेटीना माय क दरबार म आवस . यहान आवनी वाला भक्त मन्नत पुरी भया पर आम्बा क झाड ला पाच नारेल की तोरन बांधस .
आम्बा वाली माता क दरबार म ' पूरन सिंग परमार जी ' पुजारी स .
माय क दरबार म दुय बी नवरातरी ला मोठो भंडारो रव्हस . नवरातरी क पह्यले आम्बा क झाड पर की सबन नारेल की तोरन काढस . टरक दुय टरक नारेलना निकरस . कयी नारेलना हवन साठी बापरस आन् बाकी नारेल भुंजकन् वोको परसाद बनावस .
देऊर क आघऽ प्रवेसद्वार स . वासिन जेवनऽ हाथ प देऊर आन् डाखऽ हाथ प लोखंडी खूब मोठी कढय स .
१. आरती , उत्सव : * आम्बा वाली माता की मंगरवार ला खास आरती रात क १२ बाजता आन् बाकी दिन की आरती रात म १०:३० बाजता होस .
* दुय नवरातरी ला लाखों लोगना दरस्यन साठी आवस .
* हर मंगरवार ला बाईलोग गोदभराई ( वटी ) साठी आवस .
* नवरातरी क अस्टमी ला माय की भव्य आरती होस . अस्टमी ला माय की ज्या पूंजा होस वोला , ' कुकू नहान पूंजा ' कोस . अस्टमी क दिन माय रातभर दरस्यन देस .
२. मन्नत ( नवस ) राखन का नियम :
* मन्नत ( नवस ) को दिन मंगरवार रव्हस . नवस करनी वाला / वाली ला ३ नारेल आन् पूंजापाती को सामान चढावनो जरुरी स .
* पूंजा क सामानकन् बन्यो धागो आरती भया बाद लाईनकन् लेनो पडेन .
* जेनऽ नवस करेस वोनऽ नवस क धागा ला जेवनऽ हाथ म नी त गरा म बांधकन् पाच मंगरवार माय क दरबार म आयकन् हर डाव २१ परिकरमा करनी लागेन .
* नवस कबुलनी वाला / वाली ला संकल्प लेनो लागस क नवस पुरो भया बास्त वूई कायको परसाद चढायेन .
* नवस क बेरा लेयो संकल्प , नवस पुरो भया पर वोला पुरो करनोच लागस .
* जेनऽ नवस बोले होयेन , वोको कोनी कारनकन् मंगरवार ला माय क दरबार म आवनो नी होत , वोला मंगरवार को उपास धरकन् अरधी रात भया पर ( उपास ) सोडनो पडेन .
जय आम्बा वाली माता......
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर.
जय हो अंबा माई
ReplyDeleteजय माता दी
Deleteजय अंबा माई ।।खुप साजरी माहीती दिस एतिहासिक ।।
ReplyDeleteधन्यवाद सर
Deleteखूब साजरी माहिती.
ReplyDeleteधन्यवाद सर
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