सात आसरा को कथा गान - १
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
सात आसरा सात यी झनी
इंदर घर की इंद्रायनी ।धृ।
देव तेत्तीस कोटी मोठा
देव इंदर सोच बिचारे
कसा काय परसन्न करे
कमलावती ल्यायी जी पानी ।१।
नाच गायन बाज्या वादन
सात आसरा रूप साजरा
लेयो साज घाल्यास गजरा
पुसे कोनतऽ चिंता म धनी ।२।
असो खेलो खेल पाडो भूल
देये आवतन देवताना ला
म्हरऽ वस म राखन ला
तुमी लगावो कला की बानी ।३।
चार दिन भया सुध खोया
देव खेल म गुतत गया
दान अरधो महाल कह्या
फसी इंदर देव जबानी ।४।
करी देवना क लाडी साठी
दिन पाचवो नारद कली
चाल पाप वासना की चली
डोले सेसनाग हाले धरनी ।५।
गोलो राग को धाडे देवीना
सात बहिनना आंग धोये
तबलजी न धरम खोये
लुकाया लुगडा किस्न वानी ।६।
आसरा ला धरम संकट
मांगे कमलावती ला बचन
बिह्या करो सोडो अडचन
तबलजी की या मागनी ।७।
आन पानी की तुमी लेकन
संग निभावो लाडी धरम
आसरा का फुट्या गा करम
कारो भयो जी पांढरो पानी ।८।
उंबर खलतऽ धऱ्या लुगडा
साहा आसरा आघऽ निकरी
कमलावती की आस सरी
फरी नारद जी की करनी ।९।
( क्रमशः )
रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
खूब साजरी रचना
ReplyDeleteनवो प्रकार लिखन की कोसिस करी...
Deleteधन्यवाद सर...
सुन्दर रचना 👌👌
ReplyDeleteधन्यवाद नागेश सर
Deleteखूब साज रो गानो.
ReplyDeleteधन्यवाद सर
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