अजब गजब - २३ : अंबामाई , धारूड
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
मध्यप्रदेस क बयतूल जिला म आठनेर तहसील म धारूड ( धारूल ) गाव स . आठनेर पासिन ६० कि.मी. प सतपुडा क दाटदुट जंगल म महाराष्ट्र क हद जवर अंबामाई को दरबार स . ३ कि.मी. उच्ची पहाड प पास्यानी गुफा म १०० फिट अंदर अंबामाई की स्वयंभू मूरती स . इ स्थान रहस्यमयी आन् चमत्कारी स. गुफा क चट्टान मिन साल भर पानी टपकत रव्हस .
बयतूल क जंगल मिन यात्रा सुरू करी त रस्ता म नहालदेव बाबा को देऊर लागस . बाबा क दरस्यन कन् रस्ता की बाधा दूर होस . यासिन ३ कि.मी. की अंबामाई क दरबार की खडी पहाडी स .
१. अंबामाई क दरबार की खोज : महाराष्ट्र क परतवाडा म मनेरी बिकनी वाली मंगलाबाई होती . वा सिध्दी की अवस्था म इत उत घुमत होती . वा ज्यान बी जात होती , लोगना वोला हाकलत होता . फिरत घुमत वा सालबरडी म गयी . वहान भगवान भोलेनाथ की वून पर किरपा भयी . येक रात भगवान भोलेनाथ वून क सपना म आया आन् सांगे क , तुमी धारूड ला जावो... अंबामाई क दरबार म...
मंगला बाई न भगवान भोलेनाथ न सांगे ती स्थान खोजन साठी सालबरडी सोडी . सतपुडा को दाटदुट जंगल , जंगली जनावर को भेव , मानुस बाई को दरस्यन नहाय असऽ हालत म मंगला बाई दरबार ला सोधत रही . इ. स. १९७० म घुमत घुमत मंगला बाई खडी चट्टान क गुफा जवर आयी . गुफा क अंदर अंबामाई को दरस्यन भयो . वहान मंगला बाई न घोर तपस्या करी . अंबामाई क आसिरवादकन् वून ला सिध्दीना भेटी . अंबामाई को वाहन बाघ संगऽ मंगला बाई रव्हत होती . मंगला बाई सिरफ झाडपालो , कंद फल च खात होती . वून अंधारा कोई , बिचु काटा को भेव नी लागत होतो .
वोन विरान जंगल म मंगला बाई न येकलीच रह्यकन् जपतप करे . हरु हरु लोगना ला वून क बारा म मालुम भये . इक्का दुक्का लोगना आवन ला लाग्या . मंगला बाई क मुंडा कन् साक्षात अंबामाई च बोलत होती . मंगला बाई ज्या बी बात कव्हती - सांगती वा बात सोरा आना खरी रव्हत होती. वून क सांग्या - बोल्या नुसार च घडत होतो . वून भूत - भविस्य को ग्यान होतो . मंगला बाई जवर दिव्य स्यक्ती होती . महाराष्ट्र आन् मध्यप्रदेस म अंबामाई आन् मंगला बाई क चमत्कार की बात हवा सरखी फयली आन् अंबामाई को दरबार परसिध्द भये .
२. इतिहास आन् मान्यता : * अंबामाई क भुवान क जवर २५५ गुफा की खोज भयी . येनऽ गुफाना म मानुस का पूर्वज रव्हत होता . वून का चट्टान प काढ्यास ती चितरंगना आब बी स . येनऽ चितरंगना को काल आज पासिन १५०० - २५००० बरस पह्यलो क स . आब बी खोज चालू च स.
* अंबामाई क दरबार मिन कोनी बी खाली हातकन् नी जात . अंबामाई क दरस्यन कन् मनोकामना पुरी होस . वांझोटी की कूस उजवस , असी मान्यता स .
* मंगला बाई यहान इ.स. १९७० म आयी आन् इ. स. १९८४ ला वून को सर्गवास भयो . येनऽ चवदा बरस भर मंगला बाई न उपास करे .
* पुरान कऽ अनुसार यहान माता सती की चुनरी पडीती . मंदिर क पुजारी ला कहान बी साफ सफाई म , खोद खाद म माता सती की लाल चुनरीना च सापडीस . तेकन येनऽ स्थान ला ' चुनरी वालो दरबार ' कोस .
* विदर्भ क राजा की या अंबामाई कुलदेवी होती , असी मान्यता स .
* आठनेर गाव म सुनील बोबले नाव को ९ साल को पोरग्यो होतो . वोला माता रानी सपना म कोनतो तरी स्थान दिखाडत होती आन् बाद म पलंग परिन पाडत होती . या बात रोज रोज होन लागी . माय बाप परेस्यान भया . वून ला वाटे क , आपलऽ पोरग्या ला भूत - प्रेत लागेस . जादू टोनो , जंतर मंतर लय करकन् देख्या पर आराम पडन को नावच नी होतो . वून की बात वहान क अंबामाई को भक्त सिरी घोडके सिन भयी . वून न सांगे क तुमारऽ पोरगा प भूत - प्रेत नहाय त , माय को आसिरवाद स . वोला ढुंढो त पोरग्या ला आराम पडेन . माय बाप सुनील ला लेकन सपना म को स्थान ढुंढन ला लाग्या . तीन बरस घुम्या बास्त वून ला धारूल को अंबामाई को दरबार सापडे . सुनील ला सपना म दिखनी वाली जागा याच होती . सुनील न माय बाप ला घरऽ धाडे आन् सोता वहान च अंबामाई क सेवा साठी थांबे . असो करता करता १२ बरस भया . अंबामाई क दरबार म बाघ बाघीन आन् वून का चार पिल्ला बी सुनील संग रव्हत होता . नान स सुनील ला वून को भेव नी लाग्ये .
सुनील की बहिनना बिह्या लाइक भयी . येक दिन सुनील अंबामाई को सिंगार कर रहेतो . वोका माय बाप पासीन देख रयाता . जसो सिंगार पुरो भयो , सुनील क माय न वोको हात अंबामाई क डोकसा प राखे आन् घर चलन को बचन लेये . सुनील अंबामाई जवर लय रोया . वोला अंबामाई ला सोडकन् जान को नी होतो . तब अंबामाई न सुनील ला कह्ये क तू आपलऽ जलम देन वाली माय क जवर जा . बहिन क बिह्या साठी , घर चलावन साठी माय बाप ला मदत कर . म्हरी मूरतीना घडायकन् आपलो गुजारो चलाव . मु हरदम च तोरऽ जवर रहून . तोरी बनायी मूरतीना ला तोड नी रहेन . दुखी मन कन् सुनील घर आयो . वोनऽ आन् वोक खानदान म कोनी न मूरती नी घडायती . सुनील न अंबामाई की मूरतीना बनावन ला सुरवात करी . बिना मूरती कला क ग्यान कन् सुनील न असी मूरतीना घडायी , जी मोठा मोठा सिक्या पढ्या मूरतीकार बी नी घडाय सकस . सुनील की बनायी मूरतीना भोपाल , बयतूल , इटारसी आन् देस भर म लागीस .
३. उत्सव : * अंबामाई क दरबार म हर पुनव ला होम हवन होस . पाच हवन कऱ्या बास्त कामना पूरी होस , असी मान्यता स .
* नवरातरी म नव दिन यहान मेलो आन् भंडारो लागस . नव दिन म अंबामाई नव रूप दिखाडस .
* महासिवरातरी ला यहान मोठो मेलो भरस .
* साल भर भक्त लोगना आपली तकलिफ लेकन , सरधा कन् दरबार म आवस आन् अंबामाई वून की मनोकामना पूरी करस .
__ अंबामाई क गुफा खलतऽ २.५ कि.मी. प भुईकुंडी म नानी अंबामाई को देऊर स . अंबामाई क दरस्यन क पह्यले लोगना यहान पूंजा करस . गुफा क आघऽ मंगला माता की मूरती स . वोको दरस्यन कऱ्या बास्त भक्त लोग अंबामाई को दरस्यन लेस .
गुफा म बारोमास पानी टपकस . वोन पानी को नानोसो कुंड बनेस . वहान अंबामाई , सिरी गनेस , भगवान भोलेनाथ , काली माता की स्वयंभू मूरतीना स .
जय चुनरी वालऽ दरबार की...
जय अंबामाई की...
जय मंगला माता की....
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
खूब साजरी माहिती जय माता दि
ReplyDeleteधन्यवाद मनोज जी
Deleteजय हो अंबा माई की बहुत ही अच्छी जानकारी जिससे आज तक हम अनभिज्ञ है आभार आपका
ReplyDeleteमध्यप्रदेश ।। धारुड गांव ।।अंबामाई दरबार खुप साजरो लिखान करेस, नवी जानकारी बाचनला भेटी ।।
ReplyDeleteधन्यवाद नागेश सर.. वरूड परिन जवर च स..
Deleteखूब अलग माहिती.
ReplyDeleteधन्यवाद सर
Delete