Monday, October 26, 2020

अजब गजब - २१ : टिहरी गढवाल. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

अजब गजब - २१ : टिहरी गढवाल
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

टिहरी गढवाल उत्तराखंड को येक पवितर पहाडी जिलो स . टिहरी गढवाल नाव टिहरी आन् गढवाल ला मिरायकन् भयेस . ' त्रिहरी ' को अपभ्रंस टिहरी ! या जागा मनसा , वचसा आन् करमना येनऽ तीन परकार पाप ला धोवस . गढ को मतलब , देस को गड . पानी म डुब्ये परमार राजपाट की या अजब गजब कहानी ! 

इतिहास आन् मान्यता : * बरमांड की रचना करन क पह्यले भगवान बरमा जी न यहानच तपस्या करीती , असी मान्यता स .
* मालवा को परमार राजकुमार कनक पाल मालवा परिन सिरी बदरीनाथ जी क दरस्यन साठी यहान आयेतो . तब चमोली क भानुपरताप राजा संग वून की वोरख , जानपह्यच्यान भयी . राजा भानुपरताप ला राजकुमार कनक पाल को स्वभावगुन लय आवडे . राजा भानुपरताप न आपली पोटी को बिह्या कनक पाल सिन कऱ्यो आन् इ. स. ९८८ म वहान को सारो राजपाट कनक पाल ला देयो . कनक पाल आन् वून क वंसज न आपलऽ राज ला अऊर बहाडाये . इ.स. ९८८ पासिन इ.स. १८०३ पावतर ९१५ बरस येनच वंस को राज रह्ये . 
* इ.स. १८०३ म महाराजा परदुम्न स्याह गादी पर होतो . तब गोरखा राजा को हमलो भयो . येनऽ लढाई म महाराजा परदुम्न स्याह ला वीरमरन आये . पर वून क भरोसा वाला लोगना न राजा को पोरग्यो सुदरस्यन स्याह ला कसो तरी बाचाडे . १२ बरस सुदरस्यन स्याह आपलऽ राज साठी तडपत रह्या . बाद म वून न ईस्ट इंडिया कंपनी ला मदत मांगी . कम्पनी न पूरब को गढवाल खुद राखकन् पछ्छिम को गढवाल राजा सुदरस्यन स्याह ला देये , जेला टिहरी रियासत क नावकन् वोरख पडी . 
* २८ दिसंबर १८१५ ला महाराजा सुदरस्यन स्याह न आपली राजधानी भागिरथी आन् भिलंगना नदी क संगम पर बनायी , जेको नाव टिहरी होतो . वून क पोटुना न ( परताप स्याह , किरती स्याह , नरेंदर स्याह ) परताप नगर , किरती नगर आन् नरेंदर नगर ला राजधानी बनायी . इन क वंसज न इ.स. १८१५ पासिन इ.स. १९४९ पावतर राज करे . 
* इ.स. १९४९ म महाराजा मानवेंदर स्याह न आपली रियासत भारत सरकार ला देई . 
भारत को सबसिन उच्ची टिहरी धरन क कारन टिहरी पानी म डुब गयी.... वोक संग च परमार राजपाट की परंपरा आन संस्कृति की नाव निस्यानी पानी म समायी....

लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर .

7 comments:

  1. परमार वंश की टिहरी गढ़वाल की खूब साजरी रचना अभिनंदन

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  2. बरोबर सांगयात ,उत्त लोख आपरो हिसाब लक रच बस गई सेति । उत्त बेझा थंड पड़sसे ,हड्डी कांप जासे ।
    चलो एक डाव चारहि तीरथ धाम की जात्रा करन साटि । ऋषिकेश लक जादा दूर बी नहाय ।

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    1. चालो जी.. मु कब बी तय्यार स...🙏

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  3. खुप साजरी माहीती दिस् टिहरी गढवाल क बाराम्...

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