भोयरी संस्कृति - ३६ : मैंदी गानो
Bhoyar culture._भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect._ भोयरी बोली
सरावन मह्यना म गावन क येनऽ गाना ला सरावन का गाना ( सावन गीत ) कोस . मैंदी ( मेहंदी ) लगावन क बेरा भोयर बाईलोगना इ गानो गावस . येनऽ गाना ला मैंदी को गानो बी कोस . येमऽ मैंदी क पयदा भया पासिन त वोकऽ तोडनो , बिननो , बाटनो , लगावनो आन् रंगनो पावतर को वरनन स . भाऊज आन् देर मैदी लगावस . देर आपलो हात माय ला दिखाडस . भाऊज की मैदी देखनी वाला कोनीच नी होता . तब वा सिमनी ( चिमनी ) क हात कन् आपलऽ माय बाप , भाई , बहिन , भाऊज क नाव कन् येक येक करकन् इतल्लो धाडस .
कहान सिन मैंदी उपजी बीरा सावन रे
कहान रे धऱ्यो अवतार गुलाबी रंग सावन रे
सर्ग सिन मैंदी उपजी बीरा सावन रे
धरती लेयो अवतार गुलाबी रंग सावन रे
नानो सो दिवडा लाडिलो बीरा सावन रे
मैंदी ला राखन जाय गुलाबी रंग सावन रे
लावो न भाऊज कोरी टोपली बीरा सावन रे
तोड्ये वो मैंदी का पान गुलाबी रंग सावन रे
तोडी खुडी डाल्ला भरी बीरा सावन रे
ले चल्या बयतूल बजार गुलाबी रंग सावन रे
ले दे वो सासू माय मैंदी बीरा सावन रे
मैंदी का मोठा मोठा पान गुलाबी रंग सावन रे
का वो टका तोरी बोह्यनी बीरा सावन रे
का वो सेर बेचाय गुलाबी रंग सावन रे
रुपया टका मोरी बोह्यनी बीरा सावन रे
दुय रुपया वो सेर बिकाय गुलाबी रंग सावन रे
कहान सिन लाऊ सील बट्टो बीरा सावन रे
कहान सिन लाऊ दोउ नीर गुलाबी रंग सावन रे
जमना सिन लाऊ सील बट्टा बीरा सावन रे
जमना सिन लाऊ दोउ नीर गुलाबी रंग सावन रे
घसमस मैंदी बाटती बीरा सावन रे
नथनी रे झोका खाय गुलाबी रंग सावन रे
घसमस मैंदी बाटती बीरा सावन रे
बाजूबंद झोका खाय गुलाबी रंग सावन रे
बाटी बटाई बटका भरी बीरा सावन रे
धर दी कोठी क मंझार गुलाबी रंग सावन रे
देर लगावय चिलिआंगठी बीरा सावन रे
भाऊज रचय दुय हात गुलाबी रंग सावन रे
कोठी प दिवल्या लेसंती बीरा सावन रे
परखय दुय दुय हात गुलाबी रंग सावन रे
भाऊज की रची कारी कोयल बीरा सावन रे
देवर की लाल गुलाल गुलाबी रंग सावन रे
देर सांगे वोकऽ माय ला बीरा सावन रे
भाऊज कोन ला सांगेन गुलाबी रंग सावन रे
सर्ग उडती चिडौली बीरा सावन रे
येक संदेस लेइ जाय गुलाबी रंग सावन रे
बाप मऱ्यो वोकी याद मुडी बीरा सावन रे
टूट्यो रे चौरी को ख्याल गुलाबी रंग सावन रे
सर्ग उडती चिडौली बीरा सावन रे
दुय संदेस लेइ जाय गुलाबी रंग सावन रे
माय मरी वोकी याद मुडी बीरा सावन रे
टुट्यो रे रैट्ट्या को ख्याल गुलाबी रंग सावन रे
सर्ग उडती चिडौली बीरा सावन रे
तीन संदेस लेइ जाय गुलाबी रंग सावन रे
भाई मऱ्यो वोकी याद मुडी बीरा सावन रे
टूट्यो रे भैसी को ख्याल गुलाबी रंग सावन रे
सर्ग उडती चिडौली बीरा सावन रे
चार संदेस लेइ जाय गुलाबी रंग सावन रे
भाऊज मरी वोकी याद मुडी बीरा सावन रे
टूट्यो रे डेहरी को ख्याल गुलाबी रंग सावन रे
सर्ग उडती चिडौली बीरा सावन रे
पाच संदेस लेइ जाय गुलाबी रंग सावन रे
भाई मऱ्यो वोकी याद मुडी बीरा सावन रे
टूट्यो रे चेंडू को ख्याल गुलाबी रंग सावन रे
सर्ग उडती चिडौली बीरा सावन रे
साहा संदेस लेइ जाय गुलाबी रंग सावन रे
बहिन मरी वोकी याद मुडी बीरा सावन रे
टूट्यो रे फुतरी को ख्याल गुलाबी रंग सावन रे
सर्ग उडती चिडौली बीरा सावन रे
सात संदेस लेइ जाय गुलाबी रंग सावन रे
रनिया मरी वोकी याद मुडी बीरा सावन रे
बेटा रे दानो दान गुलाबी रंग सावन रे
___ निरन्तर.............
स्त्रोत : सतपुडा की संस्कृति - २००१ , सम्पादक : वल्लभ डोंगरे , भोपाल
प्रस्तुति : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
👌👍 खुब साजरी रचना
ReplyDeleteधन्यवाद मनोज जी
Deleteमेहंदी लगाने और उससे जुड़ी हमारी सामाजिक परंपराओं को बहुत ही अच्छे शब्द से रचना की है अभिनंदन भैया जी
ReplyDeleteधन्यवाद सर
Deleteमैदी रस्म खुप साजरी परंपरा स।
ReplyDeleteगाणा की प्रथा आजकल दिसत नही । चालु राखनला पाहीजे ।
धन्यवाद सर... समय बलवान...
Deleteधन्यवाद सर
ReplyDelete