भोयरी संस्कृति - ३५ : जलम विधी
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
* नहानी : बारतपन भया बास्त नार ला सूत बांधकन् वरतऽ को भाग दातरा कन् ( इरा कन् ) कापस . घर म च नानोसो गड्डो करकन् जार आन् नार को भाग गाडस . वहानच नहानी साठी मोठो गड्डो खंदस . वोपर पाटीना धरकन् बारातीन की नहान की येवस्था करस . गाव म सुईन मनजे मांगीन . या बारतपन पासिन पूंजा पावतर सबनच काम करत होती .
नहानी की पूंजा करस . दिवो , उदबत्ती , हरद कुकू लगावस . चार कोनटा पर सनकाडीना धरस . बारातीन आन् बाल्या / बाली ला घोंगडाकन् झाकस . बाज क भवताल केसारी की चराडी गुंडारस . बाल्या / बाली ला हिंग लगावस . दरुजा म भाकर पानी धरस . बारातीन बाई आन् बाल्या / बाली ला कारो धागो बांधस . तेल लगावनो , न्हायकन् देनो , धूप देनो असा खूब काम सुईन कितऽ रव्हत होता . वोला रोज वटी देन लागत होती .
चार- पाच दिन म नार पड्या पर पुरो घर को हिवसो ( सितोडो ) लेस . नहानी बुजवस . वोमच नार गाडस . काडीना , फडो फेक देस . वठ्ठीन कपडा धोन ला लिजास . हिवसो ल्यापर घर ला हरद कुकू का पाच पाच बोटना लगावस .
* पाचवी , सटवी : पाचवऽ दिन सोना / चांदी की पाचवी घडायकन् ल्यावस . वोकी पूंजा करस .वोला कारऽ धागा म ओयकन् बाल्या / बाली क गरा म घालस . पाचवी मनजे जलमदा नामक देवता . ( जिवती )
पाचवी क दिन च नी त् साव्व दिन सटवाई माय की पूंजा करस . वा कोनतऽ बी रूप मऽ आयकन् बाल्या / बाली को भाग लिखस , असी मान्यता स . घर की बुजरूक बाईलोग या पूंजा करस . सिल ( पाटा ) पर पाचवी , सटवी की पूंजा मांडस .
' सटवी को लेखो जोखो , देवना ला बी नी चुक्यो !'
+ आब दवाखाना म च बारतपन होस . तेकन नहानी पूंजा बाद भयी . साधऽ बारतपन ला पाचव ऽ साव्वऽ दिन सुट्टी भेटस . आपरेसन वालो बारतपन रह्ये त दवाखाना म जास्त दिन ठह्यरनो लागस . तेकन पाचवी , सटवी की पूंजा १० व दिन पावतर करता आवस .
* बारावो दिन : बाराव दिन तान्ह ऽ पोटू ला कपडा पेहरवता आवस , नाव ठेवता आवस आन पारना म डावता आवस . कोनी कारनकन् दिन आघऽ पासऽ भया त बी वोला बारसो च कोस .
* बारसो : बारसो मनजे नाव ठेवन को दिन . सवा मह्यना न बारसा को कार्यक्रम करस . नाव ठेवन साठी सवासिन बाईलोग , नातगोत आवस . सोनताग क दोर को पारनो बांधस . लंगोटी की चुंबर बारातीन बाई क डोकसा पर धरकन् वोपर गरम पानी को गडू आन् खांदा पर जेकन नार कापी वू दातरो धरकन् बुझायी वोनऽ नहानी जवर जास . गडू आन् दातरो वोपर धरस . दिवो , उदबत्ती लगावस . हरद कुकू , अकसिद कन् पूंजा करस .
पारना ला हरद कुकू का पाच बोटना लगावस . बट्टा ( उरुटो ) ला लंगोटी को कपडो गुंडारस . वोला काजर , हरद कुकू लगावस . मंग वोला खेलवस . वोला येक बाई पारना क खलतीन लेस आन् दुसरऽ बाई ला वरतीन देस . बाईलोगना को गानो चालू होस ,
' राम ले बाई सीता लेइऽ
लक्षुमन ले बाई भरत लेऽ ..'
' राम ले बाई किस्न लेऽ
बलराम ले बाई स्यतरुघन ले ऽ..'
वोला खेलायकन् पारना म डावस आन् झोका देस .
तान्ह पोटु ला आन् वोकऽ माय ला नवीन कपडा पेहरवस . काजर लगावस आन् तान्हा ला पारना म डावस . पारना खलतऽ तोर / सोला की घुगरी आन् दकसिना धरस . आतो / मावसी तान्ह पोटू क कान म नाव सांगस . पाच नावना धरस .
पारना ला झोको देस आन् पारनो कोस ....
पह्यलऽ दिन आनंद सारो
वासुदेव त नित च खरो
कान्हा ला लिजास गवरी घरऽ
माय यसोदा को सजे दिवरो
जो बाळा जो रे जो ऽ
दुसरऽ दिन दुसरो परकार
कंस मामा को दुस्ट बिचार
आठवऽ पोरग्या को काटून सिर
देवकी ला कस्ट भयंकर
जो बाळा जो रे जो ऽ....
तीसरऽ दिन कंस आये देखन ला
बालक कहान स पुसे देवकी ला
देवकी कह्ये पोटी च भयी
का सांगू भाऊ गा तोला
जो बाळा जो रे जो ऽ....
चवथऽ दिन पोटी ला धरकन्
दुय पाय उलटी फिरायकन्
पोटी बिजली अगास गयी
दुस्ट कंस की मवूत आयी
जो बाळा जो रे जो ऽ....
पाचवऽ दिन न्यारो च ठाठ
गवरनना जमी पन्नास साठ
पाचवी पूंजी पाचवी बांधी
नहानी पूंजा की धरीस बाट
जो बाळा जो रे जो ऽ....
साहाव्व दिन साहाव्वी करी
तान्ह किस्न की चुट्टी करी
राधा क मन म फुटी उकरी
जो बाळा जो रे जो ऽ...
सातवऽ दिन आयी गवरन
तानुला ला लेस सारी मिरकन्
बुडबुड गंगा नाहू घालकन्
साजरो दिसस काजर लगायकन्
जो बाळा जो रे जो ऽ.....
आठवऽ दिन भजन को रंग
हात म लेस टार मुरदंग
साधुसंत गावस अभंग
गोप गोपिका बालक संग
जो बाळा जो रे जो ऽ.....
नववऽ दिन नवल बाळ की
करी खुलस जसी कमळ की
जो बाळा जो रे जो ऽ....
दसवऽ दिन बोली माय उमा
तानुला क रूप की नहाय सीमा
असा बोल्यास महादेव भीमा
जो बाळा जो रे जो ऽ...
अकरावऽ दिन तान्हा की हालचाल
रूप साजरो फुग्यास गाल
खेल खेलस बाल गोपाल
जो बाळा जो रे जो ऽ....
बारावऽ दिन सज्यो घरदार
हरद कुकू कन् सोभे कपार
देवकी को तान्हो यसोदा घर
जो बाळा जो रे जो ऽ.....
स्त्रोत : सौ. पार्वतीबाई महादेवराव देशमुख
प्रस्तुति : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
बहुत ही साजरो बारतपन को पूरो बखान
ReplyDeleteअभिनंदन
धन्यवाद सर
Deleteजलम प्रथा की खूब साजरी जाणकारी।
ReplyDeleteधन्यवाद सर
Deleteसुन्दर विवेचन जलम प्रथा क बाराम् ।।
ReplyDelete