अजब गजब - १८ : सोमेश्वर
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
महाराष्ट्र क चांदा जिला म राजुरा इ तहसील को ठिकान स . तेलंगु भास्या म ऊरा को मतलब स ' गाव ' . राज ऊरा को मतलब , राजा को गाव ! वरधा ( वसिस्ठा ) नदी क कोरा म राजुरा , आपलऽ वंस क महान इतिहास को हिस्सो स . आमारऽ वंस ला सिपरा , नरबदा , आदिगंगा ताप्ती , पूरना , वरदायिनी वरधा न पाले - पोसे .
चहांद ( गडचांदुर ) राजुरा का मुख्य स्थान होतो . यहान मौर्य , सातवाहन , वाकाटक , चालुक्य , रास्ट्रकुट को राज रह्ये . ११ वी सदी म यहान आमारऽ वंस को राज होतो . चांदा परिन ४० कि.मी. आन् राजुरा परिन ९ कि.मी. प " सिध्देश्वर " नाव को १५० उंबरा को नानोसो गाव स . सिध्देश्वर गाव विरुळ पुलीस थाना क हद म आवस . सिध्देश्वर साठी जवर को रेलवे ठेसन बी विरुळ च स .
सिध्देश्वर म ११ वी सदी क परमार राजाना न १२ सिवमंदिर बनायास , जिन ला परकोटो बी बांधेस . बगल म च साजरो तलाव बी स .
गडचांदुर क मानिकगढ किल्ला मिन वहान को राज चलत होतो .
सिध्देश्वर क मुख्य देऊर म सोमेश्वर महादेव स . इ देऊर बी बाकी देऊरना सिन मोठो स . विदर्भ म जुना देऊरना हेमाडपंथी रचना च जास्त स . पर सोमेश्वर देऊर की रचना अनोखी स . सभामंडप म नंदी देव मूरती स . सभामंडप क येकेक खंबा पर असी कलाकारी , नक्कासी स क देखनी वाला ला अचंबो च वाटस . आन् सभामंडप की रचना असी क जी विदर्भ म दुसरऽ देऊर ला नी दिसत ! सभामंडप पर आयताकार छतरी येनच देऊर म दिसस . आयताकार छतरी राजपूत वास्तुकला की खासियत स . सभामंडप क आघऽ अंतराल ला सिखर , आमलक आन् करसो स . गाभारो खोल स . गाभारा को सिखर , आमलक अंतराल क सिखर सिन मोठो स . ३ फिट क घेरा की पिंड स. सिवलिंग नानोसो च स . राजपूत आन् हेमाडपंथी देऊर रचना क अनोखऽ संगम को सोमेश्वर देवस्थान अजब गजब च स . सोमेश्वर देऊर क अगल बगल म बाकी देऊरना आन् येक धरमस्यारा सरखी वास्तु स . देऊर क बाहिर की दिवाल आन् सिखर प देव देवता , यक्स्य - यक्स्यीनी , रिसी - मुनी क मूरती संगच युगल मूरतीना बी स .
आमारऽ पुरवजना न जी गढ - किल्ला , देऊर , तलाव , घाट बांध्यास ... मूरतीना घडायी.. या आपली धरोहर स . या धरोहर आपली येतरी साजरी वयभवस्याली परंपरा की जबाबदारी निभावन की ताकद आन् सद् चरित्र - उच्च चरित्र निरमान की प्रेरना बी आपन ला देस ....
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
जय सोमेश्वर महादेव मंदिर का अपनी बोली भाषा में विवरण बहुत ही शानदार
ReplyDeleteहर हर महादेव
भोयरी संस्कृती की समृध्द परंपरा।
ReplyDeleteधन्यवाद सर
Deleteसोमेश्वर ।।।। खुप साजरो लिखान करेस ।।
ReplyDeleteधन्यवाद सर
Delete