अजब गजब - १६ : समिध्देश्वर मंदिर
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
करालं महाकाल कालं कृपालं । गुणागार संसार पारं नतोऽहं ।।
तुषाराद्रि संकाश गौरं गंभीरं । मनोभूत कोटि प्रभा श्री शरीरं ।।
Language of the article : bhoyari dialect _ भोयरी बोली
राजा भोज मध्ययुगीन काल क मध्य भारत का सबसिन महान राजो होतो . ' मालवा चक्रवर्तिन ' राजा भोज वीर , मोठो पराक्रमी आन् वेद स्यास्तर ग्यानी होतो . राजा भोज देव को राज जमुना पासिन गोदावरी पावतर होतो . जेमऽ मालवा , राजस्थान को इलाखो , मध्यभारत , बस्तर , कोकन , खानदेस , विदर्भ , गुजरात को इलाखो होतो . राजा भोज न चंपूरामायन , युक्तिकल्पतरु , समरांगन सूत्रधार , सरस्वती कंठाभरन , शृंगार प्रकाश , शृंगार मंजरीकथा असी ८४ पोथीना लिखीस .
राजा भोज न भोजशाला , राज मारतंड किल्लो , गढकालिका देऊर , भोजपूर सिव मंदिर , भोजताल असा कयी का बांधकाम कऱ्या आन् केदारेश्वर , सोमनाथ , सुंडीर , काल , अनल न रुद्र असा कयी देऊरना को पुनर निरमान कऱ्यो . माय वाग्देवी की मूरती घडायी आन् कयिक गढ किल्ला बांध्या . आन् इ सबन ला च मालूम स . येक मंदिर असो स , जेकी जानकारी लय कम लोगना ला स , वू मनजे चितोडगढ को " समिध्देश्वर " मंदिर !
दकसिन राजस्थान क चितोडगढ क बारा म येक कहावत मसहूर स , ' गढ म गढ चितोडगढ औ सब गड्डयां ' अरावली परबत माला को इ इलाखो . चितोडगढ बनवायो चित्रांगद मौर्य राजा न . वोकऽ नाव परिन येनऽ जागा को नाव पड्ये ' चित्रकूट ' ! चित्रकूट को अपभ्रंस भये ' चितोड ' .
इ.स. ५६६ म राजा गुहील न मौर्य राजा ला हाराये आन् चितोडगढ प गुहीलवंसीय राज की स्थापना करी . भोयर समाज का काही कुर येनऽ वंस का स . महाराणा प्रताप आन् छत्रपती सिवाजी महाराज येनच वंस म भया .
राजा भोज क काल म चितोडगढ ला राजा सुची वरमा , राजा तार वरमा , राजा किरती वरमा भया . राजा भोज आन् गुहील वंस नातागोता म होता .
चितोडगढ प चेंग्या पर पह्यलऽ पाडल पोल ( द्वार ) लागस . वोक बास्त भयरवल पोल , हनुमान पोल , गनेस पोल , जोडवा पोल क बाद मुख्य दरुजो राम पोल आवस . वरतऽ गया बाद अगास म जातो १२२ फिट उचो ' विजयस्तंभ ' दिसस ! जवरच जेवनऽ हाथ प सिरी किस्न की भगत मीरा को मोठो साजरो देऊर दिसस . विजयस्तंभ क पासऽ महसती स्थल स . वासिन डाखऽ हाथ पर सफेतझक संगमरमर को येक अचंबो करनो लाइक नगिनो आपलो ध्यान खिंचस . आन् याच अदभूत कलाकृती होय ' समिध्देश्वर ' मंदिर की ! समिध्देश्वर देऊर की जागा बी खासच स . विजयस्तंभ आन् गायमुख कुंड क मंझार कौस्तुभ मनी सरखो झलारतो इ देऊर वास्तुकला आन् मूरती कला को बेजोड नमुनो राजा भोज देव की निरमिती स . इंग्रजी
' T ' क आकार को सभामंडप आन् विमान की रचना , नानऽ नानऽ कयी नक्कासीदार सिखर कन् बनेस महासिखर . इंच इंच जागा पर कलात्मक नक्कासी , अलौकिक कमान ... देखता देखता समय थांबस.... स्यबदना गोठस.. मति की गति बी थांबस ! खुद चितोडगढ मेरु परबत समान ... विजयस्तंभ राजदंड समान आन् समिध्देश्वर देऊर मेरु परबत क मुकुट मनी सरखो दिसस .
पुनव क चांदना सरखो दूधीयो संगमरमर , कल्पना ला बी भूल पडेन असी कलात्मक नक्कासी , देऊर साठी निवडी ती जागा .... राजा भोज देव क ग्यान , वास्तुकला की साजरी परख आन् अनोखी सिवभक्ती देख कन् महाकवि पंडित छितरप की वरना आपरंगच याद आवस .
अद्य धारा , सदा धारा सदा लम्बा सरस्वती ।
पंडिता: मंडिता: सर्वे भोजराजे भुवंगते ।।
देऊर म पाय धऱ्या बराबर वूई थांब जास . बाहिर क भाग ला तोड असी अंदर बी सजावट . देऊर का सुघड सिखर , करस सूर्व्यदेव क किरन संग खेलस त अंदर सितल संधिपरकास म मंगल योगमुद्रा को गाभारो ! गाभारा म सिवलिंग आन् वोक पासऽ क दिवाल प खूब मोठी सिवजी की त्रिमूर्ती ! या त्रिमूर्ती सत् , रज , तम गुन की प्रतिक .
समिध्देश्वर मंदिर ला ' त्रिभुवन नारायण ' आन् ' भोज जगती ' बी कोस .
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
राजस्थान के चित्तौड़गढ़ किला में समिदेश्श्वर त्रिभुवन नारायण मंदिर की स्थापना और स्थापत्य कला का वर्णन अपनी भाषा में अद्भुत किया ।अकल्पनीय और उत्तम
ReplyDeleteधन्यवाद सर
Deleteखूब साजरी माहिती
ReplyDeleteधन्यवाद सर
Deleteसमिध्देश्वर मंदिर क बाराम् खूप साजरी माहीती दिस्....
ReplyDeleteधन्यवाद सर
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