अजब गजब , भाग - ९ : जगदंबा माता , ठानेगाव
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
ॐ अस्य श्री दुर्गा सप्तश्लोकी स्तोत्र मंत्रस्यनारायण
ऋषि: अनुष्टुप् छन्द:श्री महाकाली महालक्ष्मी
महासरस्वत्यो देवता: श्री दुर्गा प्रीत्यर्थे सप्तश्लोकी दुर्गा पाठे विनियोग: ।
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
वर्धा जिला क कारंजा तहसील म , नागपूर - अमरावती हायवे पर भोयरपट्टी म को येक गाव ' ठानेगाव ' स . कारंजा परिन नागपूर कितऽ ७/८ कि.मी. दूर इ गाव जगदंबा माता देवस्थान साठी परसिध्द स . ठानेगाव म सोम्मार को आठवडी बजार भरस . बजार ला लागकन् च देऊर को मोठो प्रवेसद्वार दिसस . वोकऽ दुय आंगऽ सिंव्ह की मूरतीना स . वोमिन अंदर गया बाद कारऽ पास्यानी दगडकन् बनायेस ती प्रवेस मंडप लागस . इ मंडप ठेंगनो स . आघऽ हनुमान जी को देऊर आन् प्रयागभारती महाराज की समाधी स . आघऽ गनपति को देऊर स . डाखऽ हात प आकामाय - बकामाय को नानोसो देऊर स . अंदर जान साठी ७ फुट खलतऽ पायरी कन् उतरनो पडस . आबऽ वहान भगवान बरमा जी , भगवान बिस्नूदेव , भगवान महादेव की मूरतीना आन् आघऽ पिंड स .प्रवेसमंडप पासिन खुली जागा पार कऱ्या बाद सिध म च सूर्व्यामुखी जगदंबा माय को देऊर स . पह्यलऽ सभामंडप , मंग अंतराल आन् गाभारो स . गाभारो ४ फुट खलतऽ स , जेम पायरीना कन् जाता आवस .उतऱ्या बराबर सिवजी की पिंड ( सिवलिंग ) दिसस , ज्या कारऽ पास्यान म च घडाईस . पिंड बराबर मंझार म स . पर आबऽ टाईलना कन् वोकी महादेव मुखी जलहरी दिवाल पावतर जोडीस तेकन घुमता नी आवत . सिवलिंग क आघऽ जगदंबा माय क मूरती प नजर डायी त् आपरंगच भक्तिभाव कन् हातना जुडस . दुसरो अचंबो असो क् माय का दुय मुखडा दिसस . येक आघऽ आन् दुसरो पासऽ पर जरा उचाई पर !! आघऽ को मुखडो मोठो आन् पासऽ को नानो स . दुय सोना का मुखोटा देवी माय क रूप का च स आन् वोको दिव्य तेज सारऽ गाभारा म झलारस . पासऽ चांदी को मखर स . येनऽ दुय मुखडाना बात असी स क जगदंबा माय की मूरती सिंव्ह पर होती . जगदंबा माय को मुखडो लगायो त सिंव्ह ला बी देवी माय को च मुखडो लगावन म आयो . तेकन जगदंबा माय का दुय मुखडा दिसस . देऊर क पासऽ तलाव सरखो कुंड स . आन् कुंड क पासऽ उत्तर वाहिनी नदी स . आवार म जेवनऽ हाथ प जूनी भीर बी स .
१. इतिहास आन् मान्यता : * काटोल क चंडिका माय को देऊर , ठानेगाव को जगदंबा माय को देऊर आन् कारंजा जवर क येनगाव को जलामाय को देऊर राकसनान् येकच रात म बांध्ये , असी मान्यता सऽ .
* ११ सदी पासिन १३ व सदी पावतर विदर्भ पर देवगिरी क यादव वंस को राज रह्ये . यादव राजा को मुख्य परधान हेमाद्री पंडित होतो . ( हेमाद्री पंडित को जलम वर्धा जिला म च भयेतो .) वून न देऊर बांधन की जेनऽ कला ला बाहाडाये , वोला
' हेमाडपंथी ' देऊर कोस . सबन हेमाडपंथी देऊरना सूर्व्यामुखी रव्हस . येनऽ वास्तुकला म उत्तर भारत की नागर , लतिना आन् भूमिज वास्तुकला को मिसरो रव्हस . पर जास्त परभाव भूमिज वास्तुकला को च दिसस . जगदंबा माय क देऊर की रचना
' हेमाडपंथी ' देऊर की च स . यी देऊर ११ व सदी म बांधेस , असी मान्यता सऽ .
* यहान ' प्रयाग भारती ' नाव को भगत साधू रव्हत होतो . देऊर पासिन तलाव ( कुंड ) पावतर येक भूयार होतो आन् प्रयाग भारती महाराज वोमिन आंग धोन साठी जात होता , असी मान्यता सऽ .
* जगदंबा माय की मूरती ' स्वयंभू ' स आन् वोको पह्यलो नाव ' चंडिका माय ' होतो , असी मान्यता सऽ .
* पुरानऽ जमाना मऽ चंड - मुंड नाव क दुय दयीतना को खूब आतंक होतो . सारा लोगना परेस्यान भयाता . लोगना न जगदंबा माय ला सुमरे . तब चंड - मुंड दयीतना को वध करन साठी चंडिका माय न यहान ठान मांडे , तेकन येनऽ जागा / गाव को नाव ' ठानेगाव ' पडे , असी मान्यता सऽ .
* जगदंबा माय नवस ला पावस आन् संकट / इपदा क बखत बाचाडन साठी धावकन् आवस , असी मान्यता सऽ .
२. मंदिर की वास्तुकला : जगदंबा माय को देऊर ' हेमाडपंथी ' वास्तुकला को नमुनो स . सूर्व्यामुख येन देऊर को प्रवेसमंडप , सभामंडप आन् गाभारो येक सिध म स , आन् सबन चवकोनी स . देऊर क बांधकाम साठी चुना - सिमिट सरखो मसालो दरजा भरन साठी नी बापरेस . हेमाडपंथी देऊर बांधन साठी दगड / फाडी म खोबन बनावस . दगडना तिरकोनी , चवकोनी , पाचकोनी , गोल , अरधो गोल असा घडावस . फाडीना असी घडावस क वा बराबर येकमेक म फसेन आन् चिपक कन् बसेन . कयी फाडी क खोबन म लोहा की ठोकर पट्टी दिसस . वोकन दुय दगडना म पकड बनावस . कहान फट रह्य गयी त् वोमऽ सिसो पिघलायकन् डावत होता . बिना चुना सिमिटकन् पन् खोबन की अडकन येकमेक म फसायकन् बांधन की हेमाडपंथी वास्तुकला आज बी अचंबोच स . देऊर को सिखर पायवा क दगड क धार / कोना पासिनच चालू होस . चारी बाजू किथिन येक सिखर क पासऽ दुसरो सिखर , पासऽ को सिखर उच्ची उच्ची होत जास चारी कोनटाना वरतऽ जायकन् आमलक को आधार बनस . वोपर आमलक आन् आमलक क वरतऽ करसो !
जगदंबा माय क देऊर क बाहिर की दकसिन दिवाल क खिडकी म काली माय की मूरती , पासऽ क खिडकी म लक्षुमी देवी की मूरती आन् महादेव मुखी खिडकी म सरोसती माय की मूरती स . दुय बाजू न भगवान सिवजी की बी मूरती स . आबऽ इठ्ठल रखुमाई , राह सीता को बी देऊर स .
३. उत्सव , समारोह : * चयीत आन् स्यारदीय नवरातरी म यहान मोठो उत्सव रव्हस . कारतिक मह्यना म काकड आरती , दिंडी आन् पुनव ला भंडारो रव्हस .
* पंढरपूर ला जानी वाली पालखीना देऊर म आवस . गाव म सोभायातरा निकरस . भजन - पूजन - किरतन चालूच रव्हस .
* जगदंबा माता देवस्थान ट्रस्ट क माध्यम कन् ठानेगाव आन् अगल बगल क गाव की पोटीना आन् जवाई को ' माहेर को अहेर ' कार्यक्रम होस .
# भोयर पट्टी म जगदंबा माय को देऊर आस्था आन् भक्ति को धाम स .
# मंदिर क खरचा पानी , रखरखाव , देखभाल साठी ठानेगाव क व्याघ्र कुटुम्ब न १६ येकट आन् घाडगे कुटुम्ब न चंदेवानी सिवार म ३२ येकट खेत दान करेस .
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
👌👍💐 जय जगदंबा माय
ReplyDeleteजय जगदंबा माता
Deleteखूब साजरी माहिती
ReplyDeleteधन्यवाद सर
Deleteभोयर पवार संस्कृति की धरोवर माय जगदंबा ।। जय माता दी।।
ReplyDeleteधन्यवाद सर
Deleteजय माय जगदंबा भवानी की कृपा आप की कलम पर बनी रहे और आप हमारी हर परंपरा संस्कृति को अपनी बोली और भाषा में उच्चतम स्तर पर लेकर जाओ बहुत-बहुत अभिनंदन
ReplyDeleteधन्यवाद सर.. आपकी प्रतिक्रिया और आपका स्नेह ' संजिवनी ' बुटी है कलम के लिये...
Deleteबहुत बहुत आभार..