Friday, August 7, 2020

bhoyar people - bhoyari culture _ भोयरी संस्कृति - १७ , भाग - ८ : दिवारी : पांडव पंचमी

भोयरी संस्कृति - १७ , भाग - ८: दिवारी : पांडव पंचमी
_ bhoyari dialect

दिवारी को तिवार इ महापर्व स . वसुबारस पासिन तुरसी क लगन ( ब्याह ) पावतर इ चलस . भोयरी संस्कृति मऽ भाईदूज क बाद तीसरऽ दिन कारतिक मह्यना कऽ चांदनी पंचमी ला ' पांडव पंचमी ' इ तिवार आवस .
१. मान्यता : कुंती का युधिस्ठिर , भीम आन् अरजून यी तीन पोटुना आन् माद्री का नकुल न् सहदेव यी दुय पोटुना . इ दुय माय का पाच पोटुना ला च ' पांडव ' कोस . 
*  पांडव पंचमी क दिन पांडव महाभारत की लढाई जित्या तेकन इ विजय दिवस -- पांडव पंचमी .
* दिवारी क महापर्व भगवान सिरी किस्न को असर रव्हस , तेकन सिरी किस्न आन् गोधन ( गाय बासरुना ) की पूंजा करस .

सकारीच सडोसारवन करकन् गोबर का पाच पांडव मांडस . घर ला झ्यंडू क फुल को हार बांधस . गायना साठी बी झ्यंडू क फुल का हार ( मार , माला ) बनावस .
मोठऽ पारग ला आंगना म चऊक पुरस . झालपड्या आवार म , दरुजा कऽ दुय बाजू दिवनाल का दिवा लगावस . घर की पूंजा करस . गायना आया पर वून की पूंजा करस .पाची पकवान को निवद देस . 
बेपारी , दुकानदार पंचमी ला आपलऽ दुकान पर लक्षुमी देवी , सिरी गनेस जी की पूंजा करस . दिवारी ला जेनऽ नवा खाताबही की पूंजा करीती , वोमऽ पंचमी पासिन लिखन ला सुरवात करस . 
गोबर कन् जी पांडवना बनावस , वोकी पूंजा करस . भगवान गनपति को सुमिरन कर कन् पंचमी ला सुभ आन् लाभ की कामना करस .
पांडव सरखा गुन आपला म आया पाह्यजे , भगवान किस्न देव की - गोमाता की हरमेस किरपा रह्या पाह्यजे , सिरी लक्षुमी जी , सिरी गनेस भगवान की किरपा रह्या पाह्यजे , येकऽ साठी पांडव पंचमी मनावस ‌ . 

लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर .

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