भोयरी संस्कृति - १७ , भाग - ६ : दिवारी : गायगोंधन
बलिराज नमस्तुभ्यं विंरोचन सुत प्रभो ।
भविष्येंद्र सुराराते पूजेयं प्रतिगुह्यताम् ।।
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः ।
१. गायगोंधन , पाडवो , ( बलिप्रतिपदा ) : दिवारी पाडवा को इ दिन .
* बिक्रम संवत् सुरू होन को दिन .
* साडेतीन मोह्यतूर म को येक दिन .
* झुंझुरकाच उठकन् न्हावनो - धोवनो आन् वोवारनो होस . आज पाचवो गोंधन डावस . गोंधन पर गोबर कन् च गवळन , घट्टी , सिलबट्टो ( पाटो - उरुटो ) , चुल बनावस . वोपर गेरु , रंग डावस आन् दही - सेवरी को निवद देस .
* आंगना म गोबर कनच दुय मह्यस्यासुर बनावस . येक को मुंडो घर कितऽ आन् दुसरा को वोकऽ उरफाटो . वोला असली केस ( बाल ) की मिसी लगावस . पाच पांडवना बी मांडस . ( कयी ठिकान पर गोबर कन् ' बलिराजो ' बनावन की परथा स. मह्यस्यासुर ला दुरगा देवी नऽ दसरा ला मारेतो . मला असो वाटस क ' बलिराजा ' ला दिवारी म कोनऽ भूल कारन मह्यस्यासुर कव्हना म आवत होयेन . मह्यस्यासुर ला गाय कऽ पाय कन् खुंदाडस . ( बलिराजा ला भगवान बिस्नू न वोकऽ डोकसा पर पाय धरकन् वोला पातार लोक म धाडेतो .) वोकऽ पेट पर , हात पर , पाय पर झ्यंडू का फुल आन् कापूस खोसस . आंगना म गेरु कन् मुठ भिजायकन् वोका ठप्पा मारस . वूई गाय क पावूंड ( खुर ) सरखा दिसस .
* गाय कऽ आंग पर रंग कन् चितरंगना काहाडस . वून ला मोरपख की ढाल , चवर , कवडी की म्होरकी , बाघनख - कवडी को गजरो , कंठी - गठलम , पाय म घुंगरुना , घंटी , टापरु , टिनमनी , पितर का तोडा , झूल कन् सजावस .
* गाय कऽ मिरवनूक मऽ आघऽ राधा - किसन बन्या नाच्याना , सनई - ढोल वाला परधान , म्हाली , गडी मानुसना , फटाका फोडनी वाला आन् पासऽ गायना रव्हस . गाज्या बाज्या कन् सबन पह्यलऽ देउर म जास . देखनी वाला की रस्ता क दुय बाजू नऽ भीड रव्हस . वाहासिन गाव म फिरायकन् चरन ला ले जास . दुफार कन् वून ला वापिस गाज्या बाज्या कन् , गाव म फिरायकन् घर ल्यावस ( आनस ) . घर म गायना की पूंजा पाती करकन् वून ला पाची पकवान को निवद देस .
* मोठऽ गाय ला सपरी म ल्यावस . वोनऽ गाय परिन वोवारकन् गायकी / ढोरकी , म्हाली , वठ्ठी , बाडी , खाती आन् सबन काम्बरकी वालाना ला ' सिरपावो ' ( कपडो - लत्तो ) देस .
गायकी क खांदा पर की घोंगडा कऽ खोर मऽ अनाज देस .
मालक कोस , " खोर भरो ."
गायकी कोस , " कोठो भरो ."
मंग सबन लोगना की पंगत बसस .
* पाडवा ला गायना खेलन को दिन बी कव्हस . गाव म आज पासिन ' फानकी ' ना निकरस . या फानकीना गवारी लोगना जास्त काहाडस . ' फानकी ' मनजे पूंजा की येक - दुय गाय , नाच्यो , गायकी आन् सनई - ढोल वाला की मिरवनूक . या फानकी घर घर जायकन् अनाज - पयसा अदला की दकसिना लेस . मंझार मंझार म डोयराना डावन की बानी लागस . डोयराना म हासी मज्याक , चिडवन की च बात जास्त रव्हस .
होऽ... ( होऽ बोल्या पर बजावनी वाला बजावन को थांबाडस .)
कारो कारो खेत , खेत मऽ लगायो दादा ऊसऽ...
दस रुप्या निकरत नही , पटिल मोठो दादा कंजूस ऽ.... होऽ.
( डोयरो डाया पर जब ' हो ऽ ' कोस , तब वापिस बजावनो चालू होस .)
हो ऽऽ.....
कारी रे कुतरी....कारी रे कुतरी , वोपर डायी झूऽल..
म्हथारपन ऽ लेकरु भयो जी , चमेली को फुऽल.... होऽऽ...
हो ऽऽ....
खोबरा को डोल गा भाऊ , खोबरा की बाटीऽ...
(नाव ) पटिल की बेटा बेटी गा भाऊ , खास तूप रोटी ऽ.... हो ऽ..
हो ऽऽ....
पाट्या को रे पारनोऽ , आजी पाट्या को पारनो ऽ..
वोमऽ लगायी का ऽऽ च....
मोठऽ बाडा की आरती आयी बापू , अगर बगर नाऽऽच.... हो ऽ...
हो ऽऽ....
टाको रे टाको दादाऽ..., सिमिट ऽ को टाको ऽ..
वोमऽ भरे पानी ऽऽ..
सेम्बर रुप्या की नोट नी निकरत..
कसी होयेन जिंदगानी ऽ....हो ऽ....
होऽ.....
सात तस्मा की माडी बांधीस , मालकीन तरी रोस....
बारा मह्यना मऽ फानकी आवस , धड धड छाती होस ऽ..हो ऽ...
हो ऽ....
इथिन बी काटा न् उथिन बी काटा , मंझार सिन पड्यो रस्तो ऽ...
आपलऽ घर को मह्यंगो दिसस , आन् दुसरा घर को सस्तो ऽ..... हो ऽ...
* पह्यलऽ गायगोंधन ला लाडी संगं जवाई दिवारी साठी ससरा क घर आवस आन् दिवारी मनावस. जवाई ला अहिर देस .
( सहयोग : सौ . पार्वतीबाई महादेवराव देशमुख , श्री. रामेश्वर गोरे - इंदौर )
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर .
खुब साजरो लिखेस ,भोयरी संस्कृती की माहिती
ReplyDeleteजय मायबोली भोयरी
धन्यवाद मनोज जी
Deleteखुब साजरो लिखेस ,भोयरी संस्कृती की माहिती
ReplyDeleteजय मायबोली भोयरी
धन्यवाद मनोज भाऊ
Deleteवाह खूब मज़ा आयी गा वाच कण, मस्त आ सोच लिखत रव गा
ReplyDeleteधन्यवाद सर
Deleteअरे वा खूब साजरा डोयरा, लहानपनक गावकी आठोंन आई धन्यवाद
ReplyDeleteधन्यवाद सर
Deleteशुभ दीपावली आपने बहुत अच्छा लिखा है
ReplyDelete*।।शुभम करोति कल्याणम,*
*आरोग्यम धन संपदा,*
*शत्रु-बुद्धि विनाशाय,*
*दीप: ज्योति नमोस्तुते।।*
आदरणीय एवं परम् स्नेही स्वजन,
*आपको एवं आपके परिवार को दीपावली पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं।*
यह दीपोत्सव अपनी रोशनी से आपके और आपके परिवार में सुख, समृद्धि, यश, कीर्ति, सौहार्द एवं अपार खुशियों की जगमगाहट भर दे।
मान्यवर हमारे परिवार की शुभमंगलकामनाएँ स्वीकार करें।
*जय जय श्रीराम*
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बारंगे परिवार , जबलपुर