अजब - गजब , भाग - १ : गोटमार मेला
महाराष्ट्र क हद जवर मध्यप्रदेश क छिंदवाडा जिला को येक गाव स ' पांढुरना ' . पांढुरना आन् सावरगाव क मंझार म स जाम नदी . येन ऽ भाग म मराठी बोलनी वाला लोगना जास्त स . मराठी क गोटमार को मतलब स , दगुडना मारनो .
पोरा क कर ला ( तानो पोरो ) यहान दुय बाजू कितऽ का लय लोगना जमा होस . आन् सकार पासिन झाल पड्या पावतर येक दुसरा ला दगुडना मारस , यी होय " गोटमार मेलो ." येनऽ गोटमार म कयी लोगना घायल बी होस .
१ . परम्परा : येकी सुरवात १६/१७ वी सदी म भयी , असो मानस . जाम नदी क दुय बाजू कितऽ का सावरगाव आन् पांढुरना म पोरो धुमधामकन् मनावस . पोरा क दिन सावरगाव का लोगना परसा को झाड काटकन् नदी मंझार गाड देस आन् वोपर लाल कपडा को झ्यंडो , तोरन , नारेल , हार , झाडिया चढायकन् वोकी पूंजा करस . नंदी पोरा ( कर , तानो पोरो ) क दिन सकारी वोनऽ झाड , लाल झ्यंडा की पूंजा करस . आन् सकारी ८ बज्यापासिन चालू होय जास येक दुसरा ला गोटा मारन को खेल , " गोटमार " .
कोनतऽ बी खेल वानी येमऽ दुय गाव की टिम रव्हस . पांढुरना किथिन लोगना आया पर सावरगाव वाला वून ला गोटाना मारस आन् सावरगाव किथिन लोगना आया पर पांढुरना वाला गोटा मारस . दुय गाव कितऽ क लोगना की बानी रव्हस क कोनतऽ गाववाला पह्यले नदी मंझार जायकन् परसा क झाड को झ्यंडो तोडकन् ल्यायेन . मोठऽ पारग ला त् इ खेल जास्त रंगस . दिन डुबता पांढुरना का लोगना पूरो जोर लगायकन् आन् चंडी माय को जयकारो लगायकन् सावरगाव वाला ला पासऽ धकाडस . आन् झ्यंडो तोडनी वालो झ्यंडा ला कुराड कन् काटस . जसो यी झ्यंडो टुटस , गोटमार बंद होय जास . मंग येक दुसरा ला भेटस . गाज्या बाज्या कन् वोनऽ झ्यंडा ला चंडी माय क देवूर म लिजास . कोन साल झाल पड्या पावतर झ्यंडो नही टुट्यो त् सरकारी लोगना दुय गाव वाला को समझोतो करावस आन् गोटमार बंद करस . गोटमार म घायल लोगना ला सरकारी दवाखाना म लिजास . मरीज जास्त सिरियस होयेन त् वोला नागपूर क दवाखाना म पठावस .
२ . मान्यता : गोटमार मेला की लय लोककथा स . पर वोमऽ की येक ला जास्त मान्यता सऽ . सावरगाव की येक आदिवासी पोटी को पांढुरना क येक पोरग्या संगऽ प्रेम होतो . वून न लुक कन् ब्याह कऱ्यो . बाद मऽ पांढुरना वालो पोरग्यो आपलऽ सोबतीना कऽ संग वोनऽ पोटी ला भगायकन् लिजाय रह्याता .नदी म गरदन पावतर पानी होतो . सावरगाव क लोगना ला येकी भनक लागी . वून न लाडा - लाडी आन् पांढुरना क पोटुना पर गोटमार चालू करी . जब पांढुरना क लोगना ला या बात मालूम भयी त् वून नऽ बी इथिन गोटमार चालू करी . येनऽ गोटमार कन् लाडा - लाडी जाम नदी म च मर गया . वाडा - लाडी ला मऱ्या देखकन् दुय गाव वाला ला खराब वाटे . वून न मऱ्या लाडा - लाडी ला उठायकन् चंडिका माय क देवूर म लाये . पूंजा पाती करी आन् वूई दुय झना को अंतिम संस्कार कऱ्यो . तब पासिन या गोटमार की परथा पडी .
३. सरकारी कारवाई : गोटमार मेलो आस्था कन् जुड्यो होन कऽ कारन सरकारी कारवाई म दिक्कत जास . कयी बेरा सरकार न रब्बर का चेंडू ( गेंद ) लायकन द्या पर गाववाला न गोटा कन् च गोटमार करी . सन २००९ म छिंदवाडा जिला विभाग न गोटमार मेला म गोटा मारन की मनाई करी आन् ६ दिन साठी कलम १४४ लागू करीस .
* गोटमार क दिन कयी लोगना नस्या पानी करकन् रव्हस . गोटमार म गोफन कन् बी गोटाना मारस .
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
गोटमार मेला की खूब साजरी माहिती दीस धन्यवाद
ReplyDeleteधन्यवाद सर..
Deleteखूप छान माहिती ,नागपूर वर्धा जिल्ह्यातील खूप लोक गोटमार बघायला जातात
ReplyDeleteहोय , खरे आहे...
Deleteखूप छान माहिती ,नागपूर वर्धा जिल्ह्यातील खूप लोक गोटमार बघायला जातात
ReplyDeleteबरोबर आहे मनोज जी...
Deleteदेशमुखजी भोयरी बोली म खुप चांगलो वर्णन गोटमार मेला को
Deleteलय लय धन्यवाद💐
धन्यवाद बोबडे जी...
Deleteउत्तम माहिती या गोटमारीविषयी देश विदेशात कुतुहल असतं.
ReplyDeleteधन्यवाद निलेश दा
Deleteगोटमार की साजरी जानकारी
ReplyDeleteधन्यवाद जी 🙏🙏
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