Sunday, August 16, 2020

अजब - गजब , भाग - ४ : भोयर की पंढरी , गाव उमरी

अजब - गजब , भाग - ४ : भोयर की पंढरी , गाव उमरी

महाराष्ट्र क वरधा जिला म कारंजा तहसील स. कारंजा परीन लंकामुखी दुय कोस पर गाव स उमरी . उमरी ला भोयर की पंढरी कव्हनो गलत नहाय ! येक टेकडा क पायथा ला इ गाव बसेस . गाववालाना का पेवना येनऽ टेकडा परच स . गाव क सूर्व्यामुखी येक नदी स , या नदी उमरी गाव की गंगा ! साधुसंत , यातरा , देवधरम करकन् आवनी वाला लोगना को , गाव का लोग भजन मंडली आन् पंचारती लेकन येनऽ नदी पर स्वागत करस . वून का पायना धोयकन् , अकसिद लगायकन् पूंजा करस आन् वून क ठिकान पर नही त् मारोती क देऊर म लेकन जास .
* पुरानऽ जमाना मऽ यहान रामलीला , किस्नलीला को दंढार सरीखो खेल होत होतो , तेकन उमरी ला ' नाटकी उमरी ' असो बी नाव पडेस .
* उमरी गाव पुरानऽ जमाना पासिन साधुसंत को ठिकानो रह्येस . सिरी संत सोमनाथ महाराज न यहान क मारोती क देऊर म साधना करीस . सोमनाथ महाराज ला भेटन साठी संत झबाजी महाराज ( धावसा ) धावसा परीन बाघ पर बसकन् आवत होता . उमरी का बुजरूक लोगना सांगस क संत सोमनाथ महाराज क संगत म जंगली जनावर , बाघ , हरन ना बी आवत होता . संत झबाजी महाराज ' बाल ब्रह्मचारी ' होता आन् वून नऽ जिता पनच समाधी लेई .
* उमरी गाव ला संत गाडगेबाबा , संत कयकाडी महाराज , संत धोंडसाव महाराज , संत विनोबा भावे , संत भाकरे महाराज , पारडसिंगा की सती माय इन का पून्यवान पायना लाग्यास . संत भाकरे महाराज न उमरी गाव क टेकडा जवर येक खेत मऽ १० बरस साधना करीस . वून क सहवास कन् गाव अनखिन् देवधरम म जास्त लागे . पारडसिंगा की सती माय उमरी गाव की बू होय . सती माय रात - बेरात म संत सोमनाथ महाराज क समाधी जवर जायकन् बसत होती . आन् सती माय को जेक संग ब्याह भयोतो वको जलम बी जंगल म भयोतो . तेकन वला जंगलू जी  ( खंडाईत ) कोस .
* खापरी ( बारोकार ) का संत ताज मेहंदी बाबा , सिरी यादवराव देवासे , सिरी नागेश्वर महाराज को जलम गाव  " उमरी " होय .
* डाॅ . खुस्याल गिरी रामा गौड , मु . नरसापूर जि. आदिलाबाद ( तेलंगना ) इन क सपना म संत सोमनाथ महाराज गया . सपना म सांगेव क  , " म्हरा जी कामना अधुरा स ती तोला करनु लागस . उमरी गाव म मारोती क देऊर आघऽ येक भिर स आन् वोकऽ दुय आंगऽ पिपर का झाडना स . वोकऽ बाजू नऽ म्हरी समाधी स . वहान जा मनजे मु तोला दरस्यन देऊन आन् बाकी का काम ना सांगून ." 
डॉ . खुस्याल गिरी इ संत साईबाबा को मोठो भगत . वून न देवस्थान को उध्दार करकन् गाव ला तिरथ बनायो .
* उमरी गाव का लोगना सिक्या पढ्या स आन् मोठ् मोठऽ हुद्दा पर स . 
* उमरी गाव म संत सोमनाथ महाराज की समाधी , संत ग्यानेसर महाराज , संत साईबाबा , विदेही सती माय , भगवान भोल्यानाथ - माय पाराबती , गनेस भगवान का देऊरना स . येक देऊर म खूब मोठी पिंड स आन् बारा जोतिरलिंग की स्थापना बी स. जवरच नव गिऱ्या आन् दत्तात्रय को बी देऊर स .
* नागपंचमी ला उमरी म मोठो कार्यक्रम होस . महासिवरातरी ला यहान तीन दिन की मोठ्ठी यातरा भरस . येनऽ यातरा म ४०/५० हजार लोगना आवस आन् महापरसाद लेस .
* साल भर उमरी गाव म कोनतो न् कोनतो कार्यक्रम चालूच रव्हस .

( मुळ लेखन : श्री . हरिराम बारकूजी फरकाडे , उमरी )
पुनर्लेखन : लेखक सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

4 comments:

  1. आमारी भोयर पवार समाज की पंढरी उमरी खरंच देखणू लायक स,सुंदर वर्णन करे स गावको लेखक न धन्यवाद

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  2. सुंदर वर्णन । नागेश्वर महाराज देवस्थान संपूर्ण महाराष्ट्र व इतर राज्यात पुरातन काळापासून जागृत श्रद्धास्थान आहे। उमरी ऐतिहासिक वारसा लाभलेल स्थळ जेथे दुरदूरुन श्रदधाळु आपल्या समस्या निवारण करण्यासाठी यायचे, आता पण येतात ।।।

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