भोयरी संस्कृति - २३ : देवमाई
Bhoyar people _ bhoyari culture
ॐ पितृ दैवतायै नमः ।
Language of article : bhoyari dialect _ भोयरी बोली
भोयरी संस्कृति मऽ पुस अवस ला देवमाई को तिवार मनावस .
१ . मान्यता : * पुस अवस ला ब्रत - पूंजा कऱ्या पर पितरना क आत्मा ला स्यांती भेटस , असी मान्यता सऽ .
* पुस मह्यना म होन वालऽ मोसम कऽ बदलाव आगलऽ बरस क बरसाद को अंदाजो लागस .
* अवस का स्वामी पितर रव्हस .
* पुस्या अवस की पूंजा कन् पितर संगच बरमा देव , इंदरदेव , सूर्व्यदेव , अगनीदेव , वायु देव , रिसी मुनी , पाखरू -
जनावर असा सबन परसन्न होस .
भोयर समाज पितर पूजक स . भोयर समाज मऽ सेंदऱ्या देव आन् मानिनी रव्हस . आपलऽ कुर म जेता बी पितर भया , वून की मानिनी घडावस . येक पेवली म सेंदऱ्या देव आन् दुसरऽ पेवली म मानिनी धरस . देवमाई ला सेंदऱ्या देव आन् मानिनी की चवरी जवर पूंजा मांडस . चवरी क आघऽ चऊक पुरकन् वोपर खारी ( लाल सुती कपडो ) डावस . वोपर चऊर की रास मांडस . पानी कन् धोयकन् पह्यलऽ सेंदऱ्या देवना मांडस . वून क आघऽ मानिनी मांडस . वून क भवताल पाच सवारी पर कनिक का पाच दिवा बारस . रार - गुगुर , उदबत्ती लगावस . सेंदऱ्या देवना ला सेंदूर लगावस आन् मानिनी ला हरद कुकू वाहस . बेल फुल , अकसिद कन् पूंजा करस . नारेल वाहस . पूंजा क आघऽ गवरी बारकन् वोपर तूप , निवद डायकन् पानी फिरावस . नारेल क स्येरनी को परसाद बाटस . देवमाई ला मातामाय , मरामाय की पूंजा करकन् निवद धरस .
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
Bahut khub
ReplyDeleteधन्यवाद सर
Deleteछान वास्तव पुर्ण माहिती पुरवली आहे!!!देवमायी आपल समाजमं साजरो करस..पुराना दिन आठवस!!
ReplyDeleteधन्यवाद सर
DeleteNice information
ReplyDeleteThank you
Deleteदेव माई सण की परंपरा ,आपल समाज म कशी मनाव स , खुप साजरो वर्णन.
ReplyDeleteधन्यवाद सर
DeleteThank you
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