भोयरी संस्कृति - २१ : पुस्या इतवार
Bhoyar people _ bhoyari culture
ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पते ,
अनुकंपयेमां भक्त्या गृहाणार्घय दिवाकर : ।
Article language : bhoyari dialect _ bhoyari boli
भोयर समाज तेज को पूजक स . घर की अनपूरना माय रांधन क बेरा पह्यलो निवद अगनी देवता ( चुलो ) ला देस .सारऽ दुनिया क जीव को आधार सूर्व्यदेव . इतवार ( आदित्यवार ) सूर्व्यदेव क पूंजा को वार . जीवन म सुख - समरुध्दी , धन - संपत आन् बैरी पासिन बचाव साठी इतवार की सूर्व्यपूंजा को घाडो महत्त्व भोयर समाज म स .भोयरी संस्कृति मऽ पुस मह्यना कऽ हरेक इतवार ला पुस्या इतवार की आंगना म तुरसी जवर पूंजा मांडस .
पुस्या मह्यना मऽ हेमंत रुत की घाडी सी पडस . खेत म गहू निसवन ला आवस , बटाना ला सेंगना धरस , सोला ला घेंघरा धरस . आम्बा ला मोहोर आवन की सुरवात होस .
* गायत्री मंतर येनच ' सविता ' क पूंजा को मंतर होय .
* पुस्या इतवार ला अलोनी भाजी करस .
* पुस्या इतवार ला उपास धरकन् सूर्व्यदेव बुडन क पह्यले सोडस .
* पुस्या इतवार क दिन झुंझुरकाच सडोसारवन करस . आंगना म तुरसी क आघऽ चऊक पुरकन् वोपर पिढो मांडस . पिढा क आघऽ रांगोरी कन् गोल सूर्व्यदेव पुरस . बिडा क पान पर कुकू कन् सूर्व्यदेव काढस न् पिढा पर मांडस . पिढा पर सूर्व्यदेव साठी मंजन , आरसो , फनी , तेल , गहू की उंबी , बटाना की सेंगना , सोला का घेंघरा , आम्बा को मोहोर , संतरा असो वान आन् पानी को गडू धरस . दिन निकऱ्या उदबत्ती , दिवो , फुल , अकसिद कन् पूंजा करस . दुफारकन् निवद धरकन् पानी फिरावस .
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
भोयरी परंपरा...महत्व पुर्ण माहिती..👌👌👌👌
ReplyDeleteधन्यवाद सर
Deleteजबरदस्त माहिती। इतिहासमं पहिलीबार संस्कृती दरसन
ReplyDeleteधन्यवाद जी
Deleteपुस्या इत वार क बारा म खूब साजरी माहिती दीस धन्यवाद
ReplyDeleteधन्यवाद ढोले सर
DeleteNice information. Great efforts it is
ReplyDeleteThank you sir
Delete🙏🏻🙏🏻💐 great
ReplyDeleteThank you
Deleteखूप सुंदर माहिती
ReplyDeleteधन्यवाद निलेश दा
Deleteधन्यवाद जी
ReplyDeleteबहुत ही अच्छा लेख
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