भोयरी संस्कृति - २० : संकरात् / संगरात्
Bhoyar people _ bhoyari culture
भास्करस्य यथा तेजो मकरस्थस्य वर्धते ।
तथैव भवतां तेजो वर्धतामिति कामये ।।
मकरसंक्रान्तिपर्वण: सर्वेभ्य: शुभाशया: ।
Article language : bhoyari dialect _ bhoyari boli
भोयरी संस्कृति मऽ पुस मह्यना को इ खास तिवार ... पर्व ! पुस मह्यना मऽ जब सूर्व्यदेव धनु रास मिन मकर रास म आवस , वोलाच मकर संक्रांत कोस .
येनऽ स्यताब्दि म संकरात् इंग्रजी क्यालेंडर क जानेवारी मह्यना मऽ १४ नही त् १५ तारीख ला आवस . संकरात् पासिन दिन तिर - तिर कन् बाहाडस . संकरात् इ तीरथनहान , दान - पुन आन् पूंजा को पर्व सऽ . सूर्व्यदेव क तेज कन् साराय ला उर्जा भेटस . वोनऽ परमदाता क याद को इ तिवार !
* संकरात् ला संगरात् मकर संक्रांति , ताइ पोंगल , संक्रांति , माघी , भोगाली बिहू , खिचडी , पौष संक्रांति , शिशुर सेंक्रांत , मकर संक्रमण , लोहडी बी कोस .
१ . विदेस मऽ संकरात् का नाव :
बंगलादेस - शक्रैन , पौष संक्रांति
नेपाल - माघे संक्रान्ति , माघी संक्रान्ति , संक्रान्ति , खिचडी संक्रांन्ति .
थायल्यांड - सोंगकरन
म्यान् मार - थिंयान
लाओस - पि मा लाओ
कम्बोडिया - मोहा संगक्रान
सिरी लंका - पोंगल , उझवर तिरुनल
२ . मान्यता : * असी मान्यता सऽ कऽ संकरात् क दिन सूर्व्यदेव आपलो पोरग्यो स्यनिदेव क घर वोला भेटन साठी जास . स्यनिदेव मकर रास को मालक स तेकन येन संकरात् ला मकर संकरात् कोस .
* पुरान कऽ अनुसार देवलोगना को दिन संकरात् पासिन चालू होस .
* असी मान्यता सऽ कऽ माय यसोदा न भगवान सिरी किस्न देव साठी संकरात् क दिन व्रत करेतो .
* संकरात् क दिन च गंगा माय भगिरथ क पासऽ पासऽ चाल कन् कपिल मुनी क आसरम परिन समुंदर म गयीती . ' सारा तीरथ बार
बार , गंगासागर येक बार ' _ संगरात् क दिन बंगाल क गंगासागर तीरथ म कपिल मुनी क आसरम पर खूब मोठी यातरा भरस .
* तीरथराज परयाग म होन वालऽ कुम्भ मेला आन् माघी मेला को पह्यलो नहान बी संगरात् क दिन च होस .
* पंपापुर परिन हनुमान जी ला बलायतो तब हनुमान जी बाल रूप मऽ होता . हनुमान जी आया तब संगरात् को तिवार होतो , आन्
रामायन म पतंग उडावन को जिकर स . ' राम इक दिन चंग उडाई , इंदर लोक म पहुंची जाई .' तेकन संगरात् ला पतंग उडावन को रिवाज पड्यो , असी मान्यता सऽ .
* संगरात् क दिन तिसरी पानिपत की लढाई आपन अफगानी अबदाली संग हाऱ्या . तेकन कोनी पर मुसिबत आई त् आपन कव्हजे , वोपर संगरात् आयीस .
३. रिवाज : भोयरी संस्कृति मऽ संगरात् ला तिर ला लाडू बनावन को आन् हरद - कुकू को रिवाज सऽ . तिर कर लाडू संगच पेंडी बी रव्हस . चवरी पर ' लाडू पेंडी ' को निवद धरस आन् देऊर न् खेत म बी लाडू पेंडी को निवद पठावस . हरद कुकू रथसप्तमी पावतर चलस . हरद - कुकू को रिवाज राजस्थान , गुजरात , महाराष्ट्र , मध्यप्रदेश मऽ स . बाईलोगना येक - दुसरा क घर जायकन् हरद कुकू करस . येन बेरा बाईलोगना ' बान ' देस . ( राजस्थानी म बान ला वायना कोस .) बान म अनाज , बोर , गांजर , ऊस का टुकडा , जाम , बाल - बटाना की सेंगना आन् येक आंदन सरिखी चिज रव्हस . बान लेन क बखत उखानो लेन साठी बाकी बाईलोगना हासी मज्याक कन् जबरदस्ती करस . उखानो मतलब , आपलऽ लाडा को नाव गाना म लेनो . पुराना उखाना लय लंबा रवत होता ; आन् आखरी म लाडा को नाव गुफत होता . यमदेव ला आपलऽ लाडा को नाव मालूम नही भया पायजेन तेकऽ साठी गाना म लाडा को नाव गुफस . आखरी म तिरगुर देस आन् कोस , ' तिरगुर लेव न् गोड गोड बोलो .' नानऽ पोटुबाटुना की लूट करस . पह्यले वून ला सजवस . मंग वून क आंग परिन चाकलेट , गोली , बोर डावस . मराठी म येला बोरन्हाण कोस . संगरात् क् दुसरऽ दिन पासिन च ' पायधुनी ' चालू होस . ब्याह कऽ बाद की पह्यली संगरात् माहेर आन् ससराल साठी खास रव्हस . जवाई , पोटी , इन - इवाई , ननद , पोटुबाटुना साठी पह्यलऽ पायधूनी ला अहिर लिजास . इन इन का पाय धोस . पाहुनचार होस . असच पायधूनी साठी बू क माहेर ला बी जास . वहान बी असीच पायधूनी होस . संगरात् क पायधूनी ला बू आपलऽ सासूबाई , ननद , मोठी जाऊ का हर साल पाय धोस . सासूबाई , ननद , मोठी जाऊ बू ला पयसा , अहिर देस .
४. भोयरी उखाना :
* मुनऽ बनायी बयतूल क गुर की चिक्की , ....... राव क आघऽ सारी दुनिया फिक्की .
* अयरावत ला पाजे जमुना को पानी , ......... राव स करन वानी दानी .
* घर कऽ दरुजा ला आम्बा की तोरन , ....... राव को नाव लेवूस संगरात् क कारन .
* मुन खांदी माती वोमिन निकऱ्यो हिरो , हिरा को मोल सांगू कसी ?
लाज आवस मोला , ........ राव को नाव सब क आघऽ लेऊ कसी ?
* चांदी को दिवो सोना की बाती , ........ राव म्हरो जीवनसाथी .
* माथा पर कुकू हात मऽ कंगन , ........ राव साठी सोड्यो माहेर को आंगन .
* आलू बयंगन की भाजी बनायी ; भाजी बनी सवाद
लोन डावनो भूल गयी , आई ज्या ........ राव की याद .
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर .
संकरात....भोयरी उखाना...वास्तविक वर्णन
ReplyDeleteसंक्रांत सण की माहिती अन् भो यरी उखाणा लाजवाब.
ReplyDeleteधन्यवाद ढोले सर
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