Thursday, July 9, 2020

भोयरी संस्कृति - ९ : बहुड्डो

भोयरी संस्कृति - ९ : बहुड्डो

बहुड्डा को तिवार पोह्यती कऽ दुसरऽ दिन मनावस . भोयरी संस्कृति मऽ बहुड्डा पूंजा को अनुठो रिवाज सऽ . महाराष्ट्र आन् मध्यप्रदेश मऽ भोयर समाज बहुड्डा पर्व ला धुमधाम कन् मनावस . आपली बोली भोयरी या मालवी भास्या की बोली ( dialect ) सऽ . आबऽ वर्धा , नागपूर , बैतूल , छिंदवाडा जिला मऽ रव्हनी वालो आपलो भोयर समाज मालवा परीन आयेस ,  तेकन आपली बोली , सन तिवार , संस्कृति पर मालवा , बुंदेलखंड कोच असर सऽ .
पुरऽ नरमदा अंचल मऽ बहुड्डा को पर्व पुरातन काल पासून मनावस . बहुड्डा को तिवार / पर्व मध्य भारत - उत्तर भारत कऽ मालवा , बुंदेलखंड , महाकौसल की पह्यच्यान सऽ . वहान आबऽ भी इ अनुठो पर्व मोठऽ धुमधाम कन् मनावस . 
बहुड्डा ला बहुडला , भूजलिया , भूजरिया , कजलिया , फुलरिया , धुधिया , धेगा , ज्वारा आन् भोजली बी कव्हस . 
१ . इतिहास :  * चंद्रवंसी राजा परमाल की पोटी नऽ पह्यलो बहुड्डो बोये ,  वोकऽ बाद मऽ येनऽ रिवाज की सुरवात भयी , असी मान्यता सऽ .
* छत्तिसगढ मऽ बहुड्डा ला ' भोजली ' माता कऽ सम्मान मऽ बोवन को रिवाज सऽ . 
* दिल्ली को राजो पृथ्वीराज चव्हाण नऽ बुंदेलखंड की राजकुमारी चंद्रावल , पारस पथरी आन् नवलखा हार लुटनसाठी चन्देल राजो परमाल देव कऽ ' महोबा ' पर चढाई करी . सरावन मह्यनाकऽ पुनव  ( पोह्यती ) ला या लढाई महोबा कऽ कीरत सागर मयदान मऽ भयी . राजो परमाल आन् आल्हा - उदल कऽ आघऽ राजो पृथ्वीराज चव्हाण हाऱ्यो . येनऽ लढाई कऽ कारन बुंदेलखंड की पोटीना नऽ पोह्यती कऽ दुसरऽ दिन बहुड्डा ( कजली ) ला सिराये , आन् भाईना ला पोह्यती बांधी . तेकन आज भी बुंदेलखंड मऽ राखी , पोह्यती कऽ दुसरऽ दिन बांधस .
२ . बहुड्डा को विज्ञान : जुनऽ जमाना मऽ बीज ला सम्भालकन् राखकन् बेरा - बेरा पर वोको परिक्स्यन बी करत होता .
* पह्यलो : चयीत मऽ जब बीज राखत होता त् चांगलो बीज जेनऽ खेत को होयेन वहान की माती घर मऽ लायकन् चयीत नवरातरी मऽ वोमऽ बीज बोवत होता , जेला आमी जव / जवारा कह्यजे . जेनऽ खेत कऽ माती मऽ बीज का जास्त जव उगेन , वोमीन तीन पट अनाज बीज साठी राखता . 
* दुसरो :  दुसरो परिक्स्यन सरावन मह्यना मऽ करत होता . ढोली मिसिन अनाज काढकन् देखता कऽ कही घुन / किडा तऽ नही लाग्यास . उनला चांदनी नवमी कऽ दिन मोहा कऽ पत्ता पर बेरु कऽ टोपली मऽ माती डायकन् बोवत होता . येलाच " बहुड्डा " / भुजलिया / कजलिया असो नाव पडे . वोला पोह्यती कऽ दुसरऽ दिन गाज्याबाज्या कन् नदी / तलाव पर लेकन जात होता आन् सिरावत होता . हर कास्तकार येक दुसरा को जव / जवारो देखतो कऽ बीज कसा उग्यास . जव / जवारो देखकन् येक दुसरा की बिजाई की अदला बदली बी करत होता . 
* तिसरो : दसरा ला नवरातरी मऽ सार्वजनिक बहुड्डा बोवन की परम्परा खूब जुनी सऽ . जेकऽ घर का बीज जास्त उगता वू अनाज बिजाई साठी काम मऽ लेता . दसरा - दिवारी मऽ गहू की बोवनी करता आन् बाकी को अनाज खान साठी राखता . 

३ . बहुड्डा पर्व : नागपंचमी कऽ दिन बेरु कऽ नवऽ टोपली मऽ मोहा का पत्ताना धरकन् वोपर माती भरस . वोमऽ गहू बोवस . घर मऽ जेतरी पोटीना होयेन वोतरी टोपलीना . टोपलीना झाककन् राखस .
बहुड्डा तिवार साठी कुंभार कऽ रंग कन् बहुड्डो लेकन पोटी , पालखी , हत्ती , तलवार लेकन घोडापर बस्या भाईना असा दिवाल भर चितरंग काहाडस . जेतरा भाईना होयेन वोतरा को चितरंग काढस . उनकी हरद कुकू , अकसिद लगायकन् पूंजा करस .
 इ चितरंग बुंदेलखंड की कजली की लढाई याद दिलावस .
पोह्यती कऽ दिन बहुड्डा की बेल फुल , पोह्यतो , उदबत्ती कन् पूंजा करस आन् पुरन को निवद करस .पोह्यती कऽ दुसरऽ दिन बी असीच पूंजा करस . 
पोटीना कऽ पाय ला माहुर / अल्ता लगायकन् कपार ला आडवो कुकू लगावस . दंड मऽ पोह्यतो बांधस , जुडा मऽ गजरो लगावस . पोटी , बाईना नवा कपडा पेहेरकन् , सजधज कन् बहुड्डो लेकन पटील कऽ घर जमा होस . पटलीन बहुड्डा की पूंजा करस . बाद मऽ सबन पोटीना - बाईलोग नदी/ तलाव पर बहुड्डो सिरावन ला जास . नदी / तलाव पर पूंजा करकन् जव / जवारो संगं लेस . नदी मऽ का पाच खडाना बी आनस गाय कऽ कोठा मऽ फेकन साठी . पोटी - बाईलोग जव खोपा मऽ , बेनी मऽ खोसस . मंदिर मऽ जायकन् देव ला जव चढावस . घर मऽ चवरी पर , तुरसी ला जव चढावस . येक - दुसरा कऽ घर जायकन् जव / जवारो बाटस आन् नमस्कार करस . 
बहुड्डा को पर्व नाता रिस्ता ला जपन को दिन सऽ . भोयरी संस्कृति प्रकृति प्यार , खुसहाली , खेती - बाडी कन् जुड्यो यी बहुड्डा को तिवार सऽ . .... भाई - बहिन कऽ सगुन को तिवार सऽ . 
४ . बहुड्डो उजवनो :  ब्याह भयापर पोटी बहुड्डा कऽ तिवार ला माय कऽ घर रव्हस . माय वोकऽ साठी बहुड्डो बोयकन् धरस . ढोल बाज्यो लगायकन् पोटी आपलो बहुड्डो लेकन नदी / तलाव / भीर पर जास . जव / जवारो लेकन आया पर सेजार पाजार मऽ जास . वहान वोकी वटी भरस . या पोटी सवारी - बडो , लाडू , करंजी असी पाच पकवान की पाच टोपलीना  पाच घर बाटस . 
बहुड्डो उजवन कऽ बाद वा पोटी बहुड्डो नही बोवत . 
५ . गऊर : सवासिन बाईलोग गऊर बोवस . जल्मास्टमी कऽ दिन बहुड्डा सरखीच गऊर बोवस . काजरतीज कऽ दिन वोकी पूंजा मांडस . पूंजा मऽ घट , मक्को , धतुरा को फल , काकडी , फल धरस . गऊर कऽ मंझार मऽ रेती आन् हरद की पिंड बनावस . येनऽ दिन सवासिन बाई निरजला उपास करस . हात मऽ नवा काकन - बंगडी , मेहंदी आन् पाय पर माहुर / अल्ता लगावस . नवा कपडा पेहरस . महादेव पाराबती की पूंजा की या काजरतीज . 
काजरतीज ला च कजली तीज , हरियाली तीज , सरावनी तीज आन् मधुश्रवा तीज बी कव्हस . 

( स्त्रोत : सौ . पार्वतीबाई महादेवराव देशमुख ) 
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर .  मो. 7066911969

4 comments:

  1. भोयरी संस्कृती की खूब साजरी माहिती

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  2. जय मायबोली भोयरी

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