भोयरी संस्कृति - ७ : नागपंचमी
सरावन मह्यना कऽ चांदनी पंचमी ( शुक्ल पंचमी ) ला ' नागपंचमी ' को तिवार आवस . नाग ला भगवान महादेव कऽ आंग को गह्यनो मानस . वासुकी भगवान महादेव आन् सेसनाग बिस्नुदेव कऽ सेवा मऽ रव्हस . पुरान कऽ अनुसार सूर्व्यदेव कऽ रथ मऽ बारा नाग सऽ , बारा मह्यना का वाहक . राम अवतार मऽ लक्षुमन आन् किस्नऽ अवतार मऽ बलराम कऽ रूप मऽ सेसनाग नऽ अवतार लियो . गनपती कऽ कंबर मऽ लिपट्यो नाग विस्व ( विश्व ) कुंडलिनी आन् वोनऽ नाग को फनो जागरुत कुंडलिनी . पुरी दुनिया सेसनाग कऽ फना पर टिकीस असी मान्यता सऽ . पुरान मऽ नाग ला पाताल लोक को राजो मानस .
पुरान मऽ नाग का पाच कुर मान्यास : अनंत ( सेसनाग ) , वासुकी , तक्षक , कर्कोटक , पिंगला . कयी पुरान मऽ नव कुर मान्यास : वासुकी , तक्षक , कुलक , कर्कोटक , पद्म , स्यंख , चुड , महापद्म , धनंजय .
१ . मान्यताये : येनऽ दिन जमुना नदी मऽ किस्नऽ भगवान नऽ कालिया मरदन कऱ्यो आन् वोला वरदान बी देयो कऽ पंचमी ला तोरी पूंजा होयेन .
समुद्र मंथन मऽ वासुकी नाग ला बापरे . देव - दानव कऽ येनऽ समुद्र मंथन मऽ निकऱ्यो जह्यर भगवान महादेव नऽ पे . पर पेन कऽ बखत जह्यर का ठेंबना सरप कऽ मुंडा मऽ पड्या . तेकन नागदंस पासून बाचन साठी भगत लोगना नऽ नागपंचमी की पूंजा चालू करीस .
नाग माय लक्षुमी , धन की रखवाली ( रक्षण ) करस . तेकन धन संपत , सुख , उन्नती साठी नागपंचमी की पूंजा करस , येकन धन लक्षुमी को आसिरवाद भेटस .
२ . नागपंचमी पूंजा : नागपंचमी कऽ दिन खेत मऽ नागरनो , बखरनो नही करत . भाजीपालो चिरत नही , तावो बापरत नही .
नागपंचमी ला चवरी जवर आन् दरुजा कऽ दुय बाजू कितऽ तूप कन् नागोबा , बिचू को चितरंग काहाडस. हरद कुकू लगायकन् उनकी पूंजा करस . कढई , लाही - फुटाना को निवद धरस . घर आन् खेत कऽ चारी कोनटा पर लाही - फुटाना को निवद धरस. मध्यप्रदेश म गुजिया ( करंजी ) , पापडी , खिचडा को बी निवद धरस... नागपंचमी ला गुंजी , सवारी , बडा फुलोरो धरस .
पुरानऽ जमाना मऽ पाटी पर नागोबा काहाडकन् आन् कढई , लाही - फुटाना को निवद , बेल - फुल , उदबत्ती लेकन सिकनारा पोटु - पोटीना स्यारा मऽ जात होता . स्यारा कऽ फरा पर गुरजी मोठ्ठो नागोबा काहाडत होता . सबन झन पूंजा पाती करकन् स्येरनी बाटत होता .
महाराष्ट्र आन् मध्यप्रदेश मऽ नागद्वार की यात्रा को को बी खूब चलन सऽ .
पह्यले गारोडी लोगना पूंजासाठी जितऽ नाग ला गाव गाव मऽ ल्यावत होता . आबऽ येपर कायदाकन् बंदी सऽ .
नागपंचमी ला लाही फुटाना संगच सातू को बी मोठो मान सऽ .
३ . भोयरी संस्कृति : भोयरी संस्कृति नऽ झाड - पेड , जनावर - पाखरू , नदी - पहाड , सूर्व्य - चंदर इन सबन संगऽ आत्मीय सम्बंध जोडन की कोसिस करी . आज क दिन बहुड्डो बोवस.
आपलो देस खेती - किसानी वालो होतो आनऽ सऽ . नाग खेत की रखवाली करस तेकन वोला खेत्रपाल ( क्षेत्रपाल ) कव्हस . फसल को नुकसान करनीवाला जीव जंतू को नास करकन् नाग फसल ला बचावस / बाचाडस .
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर .
मो . 7066911969
खूब साजरी माहिती,
ReplyDeleteधन्यवाद जी
Deleteखूब साजरी भाेयरी संस्कृती
ReplyDeleteधन्यवाद जी
Deleteधन्यवाद जी
Deleteनागपंचमी मां लाही फुटाना हल्दी कुमकुम, नारीयल को साथ पूजा करें और आज खेती किसानी को काम बंद रहा है आज को दिन हमारे परिवार में गुंजा पापड़ी खिचड़ा की की खीर आदि पकवान बनाकर त्यौहार मनाते हैं फिर दूसरे दिन मायके से रोटी बेटी के घर ले जाने की भी परंपरा है।
ReplyDeleteआपने नागपंचमी के त्यौहार का वर्णन बहुत ही अच्छे और सरल शब्दों में किया है अभिनंदन भैया नाग पंचमी की बहुत-बहुत बधाई।
धन्यवाद भैय्या.. आपकी टिपनी ज्ञानवर्धक है...
Deleteआप के जैसे वाचक और रिवाजों की जानकारी सांझा करनेवाले बंधू को सादर प्रणाम...आशा करता हू की आप बाकी पार्ट भी पढें और जानकारी सांझा करे... नागपंचमी की हार्दिक शुभकामनाए...
करेक्शन कर लिया हू....
Deleteखूब साजरी रचना
ReplyDeleteधन्यवाद जी 🙏
Deleteहमारे तीज त्यौहार की अच्छी जानकारी अभिनंदन
ReplyDelete