भोयरी संस्कृति - ६
* जिवती *
आखाड कऽ अवस को जिवती तिवार भोयर समाज को खास तिवार सऽ . जिवती कऽ दुसरऽ दिन पासून सरावन मह्यनो लागस . जिवती पासून पोरा पावतर सरावन मह्यनामऽ मासमच्छी नही खात .
सरावन मह्यनाकऽ पुनव ला सरावन नक्तिर रव्हस तेकन वोनऽ मह्यना ला सरावन कोस .
१. उसो देख्या जाय त् जिवती देवी पोटुबाटूना की राखन / रखवाली ( रक्षण ) करनी वाली माय . वा लक्षुमी को च रूप सऽ .
कहान कहान सवासिन ला जेवाडन को बी रिवाज सऽ . येनऽ दिन पोटुबाटूना ला वोवारस . पोटुना घर पर नही होयेन त् जेनऽ दिस्याला होयेन वोनऽ दिस्या मऽ अकसिद् फेककन् पूंजा करस .जिवती ला सरावन बाळ की बी याद करस .
२. चऊर कऽ पीठ को रंग बनायकन् चवरी जवर की दिवाल पर डवरो - डुपन , बखर , तिफन , नागर , खासर , असा खेती कऽ काम कऽ साधन को चितरंग काहाडस . वोकऽ संगच पोटुबाटूना , बयील जोडी , गडी मानुसना को बी चितरंग काहाडस . वोनऽ चितरंग ला चवखुटी रेस काहाडकन् फ्रेम बनावस . हरद कुकू , अकसिद , पिवरऽ धागा कन् उनकी पूंजा करस .
३ . आपलो देस कास्तकारी जीवन को . येनऽ तिवार मऽ वोकी झलक दिसस . पोटूबाटूना संगच खेतीकाम का अवजार ( साधन ) गडी मानुसना , बयीलजोडी पर बी भोयर समाज पोटुबाटू सरखोच माया करस . जिवती माय ला कोस कऽ म्हरऽ पोटुबाटूना संगच इनको बी ध्यान राखो . ..... किरपा करो .
४ . जिवती कऽ दिन बाढी / खाती उंबरा पर खिरो ठोकस . असुभ गोस्टऽ ना उंबरा कऽ अंदर नही आया पायजेन तेकऽ साठी यी सुभसकुन . सुनार जिल्याटिन कऽ कागज की जिवती बाटस आन् येक दरुजा कऽ गनेसपट्टीपर लगावस . सुनार की जिवती दरुजा पर , चवरी पर , पेटी पर , संदूक पर बी लगावस . यी आबादानी को सुभसकुन / प्रतिक सऽ . बाढी - सुनार ला घर की लक्षुमी गहू , जवारी , चऊर , दार असो सिधो ( वाढनी ) देस .
५ . आपलऽ पोटुबाटू की जीवन जोत खूब साल पावतर चांगली रह्या पायजे , खेती - कास्तकारी चांगली रह्या पायजे / चली पायजे येको आसिरवाद जिवती माय येनऽ दिन देस .
( स्रोत : पार्वतीबाई महादेवराव देशमुख )
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
7066911969
जितनी म लाई चना महुआ आदि को साथ पूजा करते हैं। हमारी परंपरा और त्योहार प्रकृति से जुड़े हुए हैं और प्राकृतिक समय के अनुसार चलते हुए हमें हमारी विकसित सामाजिक परंपराओं का बोध कराती है आपसे जूती त्यौहार को अपने लेख से हमेशा हमेशा के लिए अमर कर दिया आपको बहुत-बहुत धन्यवाद
ReplyDeleteबहूत बहूत धन्यवाद आपका श्रीमान....
Deleteखुब साजरो लिखान ,जिवती की हार्दिक शुभकामनाये!
ReplyDeleteधन्यवाद मनोज जी...
Deleteभावनिक संबंध को वास्तव दर्शन...वाह
ReplyDeleteधन्यवाद नागेश सर 🙏
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