# भोयरी संस्कृति - ५ #
* आखाडी ( आषाढ पौर्णिमा ) *
Bhoyar people - bhoyari culture
( Article language : bhoyari _ भोयरी )
१. आबोहवा : येनऽ बखत ला ना जास्त गरमी रव्हस ना ठंडी . सारऽ माहोल मऽ हिवरो पन आन् खुसी भरकन् रव्हस. बोवनी को काम निपट्ये रव्हस . थोडी सी निचनताई आन् चारीठाव हिवरो हिवरो ! ..... नदी नाला को झुरझुर बह्यनो... सारऽ कितऽ चैतन आन् खुसी रव्हस .
२. दिन / मह्यनो विसेस : आखाड कऽ कर्क संगरात ला सूर्व्यदेव को ' उत्तरायण ' पुरो होयकन् ' दक्षिणायन ' चालू होस. ' उत्तरायण ' भगवान को दिन आन् ' दक्षिणायन ' उनकी रात रव्हस . तेकन आखाड कऽ येकादसी ला ' देवशयनी ' येकादसी कोस. महाराष्ट्र मऽ इठ्ठल कऽ पंढरपूर की वारी ला खूब महत्व सऽ . इस्नुदेव को रूप इठ्ठल आपला दुय हातना कमर पर धरकन् उभो सऽ . वोकऽ हात मऽ कोनतोच अवजार ( शस्त्र ) नहाय . देव कऽ येनऽ रूप ला ' तारक स्वरूप ' कोस . तुरसी , मंजिरी आनऽ वोकी माला ला बी खास महत्त्व सऽ . तुरसी ( तुलसी ) ' श्रीलक्ष्मी ' को प्रतिक आन् वा ' विष्णूतत्व ' ला जागरुत करस .
३ . आखाडी ( गुरूपौर्णिमा ) : गुरू पुनव कऽ दिन ' पह्यलो गुरू ' व्यास मुनी की जयंती मनावस . गुरू व्यास सावरा होता तेकन ' कृष्ण ' आन् द्विप पर पल्या - बढ्या तेकन द्वैपायन यी बी उनकोच नाव सऽ . गुरू व्यास की माय सत्यवती ( मत्स्यगंधा ) आन पिता ' ऋषी पराशर ' . पह्यले सबन वेद येकमच मिसर - मासर होता , तेकन उनला समझनो , अभ्यास करनो मुसकिल काम होतो . गुरू व्यास नऽ वोला चार भाग मऽ बाटकन् ढंगकन् आन् सोपो करकन् लिख्यो , तेकन आपन ला चार वेद बाचन ला भेट्यास . वोकऽ बाद मऽ पाचवो वेद लिखन को उनकऽ मन मऽ होतो , आनऽ " महाभारत " येनऽ महाकाव्य की रचना भयी . उन नऽ ' अठरा पुराण ' लिख्या .
नाथ संप्रदाय मऽ बी गुरू आन् गुरू परम्परा की मोठी महत्ता सऽ . नाथ संप्रदाय को आदि गुरू भगवान ' शिव ' . मच्छिंद्रनाथ ला संप्रदाय को कुलपुरुस मानस . पर नाथ संप्रदाय को बिखराव ला जोडकन् , देस - विदेस मऽ वको फयलाव कऱ्यो गुरू गोरखनाथ नऽ , तेकन गुरू गोरखनाथ ला नाथ संप्रदाय को संस्थापक मानस . गुरू मच्छिंद्रनाथ को भाई गुरू जालंधर नाथ . उज्जैन को आपलो राजो भर्तृहरी बी राजपाट सोडकन् नाथ संप्रदाय मऽ गुरू बन्यो . ( सम्राट विक्रमादित्य को मोठो भाई ) . आज नाथ संप्रदाय वाला जी गाना बोलस / कव्हस वूइ गुरू भर्तृहरी की च रचना ना सऽ . आपलऽ कितऽ ज्या ' बारी ' कोस वा नाथ संप्रदाय की देन सऽ . आखाडी ला गुरू ( बारी , सरप - बिचू को मंतर ) आपलऽ चेला ला गंडो बांधस , आन् वोका मंतर ना उजवस .
उसो त् हर मानुस को पह्यलो गुरू माय बाप च रव्हस.
४. पीतर आनऽ सेंदऱ्या देवना की पूंजा : आपन पीतर पूजक लोगना . जिन नऽ आपनला या दुनिया दिखाडीस उनको उपकार आपन कभी भी नही भूलत. आपलऽ कुर का जी लोगना परलोक गयास उनला चांदी मऽ घडायकन् उनकी पूंजा करस. उनला मानिनी कोस . इच आपला पीतर ! जी पान लागकन् मरे वोला चांदी कऽ नागोबा कऽ रूप मऽ घडावस . जेला बाघ नऽ खायतो वोको ' वाघोबा ' को ठानो बांधस . पोटु बाटुना का जावरा वहानच काढस .
सेंदऱ्या देवना सुपारी नैतऽ तीरथ पर का खडाना का रव्हस . इनकी संख्या ' विषम ' च रव्हस , जसी पाच - सात - नव . सुपारी गनपति , बरमा ( ब्रम्हदेव ) , यमदेव , वरुणदेव , इंद्रदेव को प्रतिक रव्हस . कोनतऽ बी काज काम , सुभकार्य मऽ पह्यली पूंजा गनपति की होस . ' ब्रम्हदेव ' नऽ या दुनिया बनायीस . यमदेव आखरी सत्य सऽ . वरुणदेव साधारन जल देव नही तऽ वेद मऽ को प्रमुख देव सऽ . इंद्रदेव सर्ग को राजो .
सुपारी मऽ जीता देव को स्थान रव्हस . सेंदूर ला मंगल को प्रतिक मानस . सेंदऱ्या देवना ला सेंदूर लगावस आनऽ मानिनी ला हरद कुकू वाहस . येनऽ कुर देवता की पूंजा कुरकाच लोगना कर सकस आनऽ परसाद / सेरनी बी कुरकाच लोगना ले सकस . आखाडी ला इनकी पूंजा होस .
५. ब्याह कऽ बाद की पह्यली आखाडी : आखाड मऽ बोवनी होय जास . निंदन - डवरन को बी येक - दुय फेर होय जास . थोडी सी निचनताई भेटस तऽ तिवार की लाईन लागस . आखाडी कऽ तिवार ला येनच साल ब्याही पोटी ला लेन ला जास . आखाडी वोको माह्यरऽ को पह्यलो तिवार . नवी जिनगानी की आपाधापी मऽ दुय चार दिन माह्येर को आराम आनऽ माय बाप कऽ लाड प्यार की सुख की बरसाद मऽ बह्य जास वोकी तकलिफ... असो साजरो रिवाज .
( स्रोत : सौ. पार्वतीबाई महादेवराव देशमुख )
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
मो . 7066911969
आखाडी सन की खूब साजरी माहिती दि.
ReplyDeleteधन्यवाद...
Deleteखूब साजरी
ReplyDeleteधन्यवाद..
Deleteआखाडी....पोर्णिमा.... सर्वसमावेशक माहिती 👌👌👌
ReplyDeleteखूब साजरो लेख
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