Friday, July 24, 2020

भोयरी संस्कृति - १७ , भाग १ : दिवारी

भोयरी संस्कृति - १७ , भाग - १ : दिवारी

तमसो मा ज्योतिर्गमय ।
भोयरी संस्कृति मऽ आसिन अवस ( महाराष्ट्र ) आन् कारतिक अवस ( मध्यप्रदेश , उत्तर भारत ) ला दिवारी की लक्षुमी पूंजा करस . बारस पासिन दूज पावतर साहा दिन अखन्ड दिवारी को तिवार / पर्व रव्हस . कठान कऽ घात मऽ आवन वाली दिवारी , सारो तिवार को राजो सोभेन असो !
दिवारी दिवा को , रोसनी को , तेज को , गाय बासरु कऽ पूंजा को , धन पूंजा को , साफसफाई को , लक्षुमी पूंजा को , गोवरधन पूंजा को , बलि राजा कऽ पूंजा को , भाई बहिन कऽ माया को , बिकरम संवत् चालू होन को , नाना पकवान आन् नाना रितीरिवाज को , फटाका फोडन को मोठ्ठो तिवार.... सुख - उन्नती को मंगल महा पर्व ! अन्धारा मिन उजारा कितऽ लेन जानी वालो दिवारी तिवार....!  
दीपावली को मतलब दिवा की वर .( रांग , कतार ) .
दिवारी ला उडिया मऽ दीपावली , बंगाली मऽ दीपाबॉली , महाराष्ट्र - कोकन - गोवा मऽ दिवाळी , पंजाबी - सिंधी मऽ दियारी , मारवाडी मऽ दियाळी , हिंदी मऽ दीपावली - दिवाली कोस .

१ . इतिहास आन् मान्यता : 
* पद्मपुरान आन् स्कंद पुरान मऽ दिवारी को उल्लेख भेटस . स्कंद पुरान मऽ दिवा ला सूर्व्यदेव को प्रतिक मानेस . जीव ला उजारो आन् उरजा देनी वालो दातो सूर्व्यदेव ! 
* उपनिस्यद मऽ यमराज आन् नचिकेत की कथा दिवारी संग जुडी सऽ . 
* सातवी सदी मऽ ' राजा हर्ष ' नऽ दिवारी ला ' दीपप्रतिपादुत्सव ' कह्येस . वोन बखत दिवारी कऽ दिन नवऽ  लाडा - लाडी ला भेटवस्तू , उपहार देन को रिवाज होतो . 
* नव्वऽ सदी मऽ दिवारी ला ' दीपमालिका ' कव्हत होता . घर की लिपाई - पुताई करकन् रात मऽ दिवा लगावत होता .
*  ११ वी सदी मऽ फारसी यातरी अल् - बेरुनी नऽ आपलऽ पुस्तक मऽ दिवारी तिवार को जिकर करेस .
* त्रेता जुग मऽ भगवान सिरी राम लंका परिन रावन ला हरायकन् अजुध्या वापिस आया दिवारी कऽ दिन .... वून कऽ स्वागत आन् खुसी मऽ तूप कऽ दिवा की रांग कन् आकासगंगा सरखी झलारी अजुध्या , वा अवस की रात ! 
* दिवारी क दिन दुरगा माय नऽ दयीतना ला मारन साठी धरेतो महाकाली को रूप .
* दिवारी क दिन पांडव आपलो बनवास पुरो करकन् घर आयाता .
* दिवारी क दिन लक्षुमी माय समुंदर मिन परगट भयी आन् दिवारी कऽ दिन च वून को भगवान बिस्नूदेव संग ब्याह भयो , असी मान्यता सऽ .
* दिवारी मऽ भगवान सिरी किसन देव नऽ इंदरदेव की पूंजा बंद करकन् गोवरधन पूंजा चालू करी .
* जमुना को भाई यमराज जी ला , जमुना कऽ घर जान साठी बखत नही भेटतो . येक डाव दूज कऽ दिन यमराज गया , तब जमुना नऽ बचन लियो क् हर साल आज कऽ दिन आवनो पडेन . 
* राजा बलि को राज सत् को होतो . असऽ राज कऽ रखवाली साठी भगवान बिस्नूदेव ' द्वारपाल ' बन्या , आन् राजा बलि कऽ धरम निस्ठा की याद राखन साठी तीन ' दिन - रात ' दीपपर्व मनायो . इ पर्व ' दीपमालिका ' कऽ नाव कन् प्रसिद्ध भयो .
* राजा बलि की दुसरी बी मान्यता सऽ . भगवान बिस्नूदेव नऽ तीन पग मऽ तीनो लोक को नाप लियो . राजा बलि की दानसिलता देखकन् वून ला पाताल लोक को राज देये , आन् वरदान दे कऽ भूलोक पर दिवारी मऽ वून की पूंजा होयेन .
* भगवान सिरीकिस्न नऽ दिवारी कऽ पह्यलऽ दिन  , चतुरदसी ला नरकासुर को वध करे . गोकुळ कऽ लोगना नऽ दिवा ना बारकन् खुसी मनायी . 
* सिंधू संस्कृती क अवसेस म , मायदेवी की दुय बाजू ला दिवा की मूरती सापडीस . इ भी दिवारी को परमान सऽ .
* समराट ' विक्रमादित्य ' को राजतिलक दिवारी कऽ दिन भयेतो . तेकन दिवारी पासिन च बिकरम संवत् चालू होस . लोगना न दिवा लगायकन् खुसी मनायीती .
* ' कौटिल्य अर्थशास्त्र ' क अनुसार दिवारी ला मंदिर आन् नदी घाट पर दिवा लगावन की परथा होती .
* अवरंगजेब नऽ इ. स. १६६५ मऽ दिवारी ला दिवा लावन की आन् फटाका फोडन की परथा पर रोक लगायती .
*  ' व्रतप्रकाश  ' नाव क पोथी म दिवारी को नाव ' सुख सुप्तिका ' सऽ .

२ . दिवारी : देस विदेस मऽ :
* दिवारी भारत , सिरी लंका , पाकिस्तान , बरमा ( म्यान्मार ) , नेपाल , थायल्यांड , मलेसिया , सिंगापूर , इंडोनेसिया , आस्ट्रेलिया , न्यूझील्यांड , फिजी , मारीस्यस , केनिया , तंजानिया , दकसिन आफरिका , गुयाना , सूरीनाम , तिरीनिनाद आन् टोब्यागो , नेदरल्यांड , कनाडा , ब्रिटन , अमेरिका मऽ मनावस .
* चिन म दिवारी वून क रिवाज कन् मनावस . दिवारी क मह्यना मऽ साफसफाई करस .दरुजा पर चिनी भास्या म ' सुभ - लाभ ' लिखस . आन् पीतर ( पूर्वज ) की याद म दिवा लगावस .
* थायल्यांड मऽ दिवारी ला ' क्रायोग ' कव्हस . केरा क पान पर दिवो धरकन् वोला नदी नही त् समुंदर म बहावस .
* नेपाल म दिवारी ला " तिवार " कोस . मारिस्यस आन् नेपाल मऽ आपल सरखीच दिवारी मनावस , पर यहान नवी लाडी दिवा लगावस .
* जपान मऽ दिवारी ला घर झाडत ( बुहारत ) नही . तीन दिन घर ला धोवस . झाडू लगाया कन् धन की देवी नाराज होस , असी जपान मऽ मान्यता सऽ .
* बरमा म कलात्मक चिज - सामान ला खरीद कन् ल्यावस आन् दिवरा पर धरस . वोपर दिवो लगावस . 
* मलेसिया मुसलमान देस होयकन् बी दिवा लगायकन् दिवारी मनावस . आन् येक दुसरा की गराभेट लेयकन् बधाई देस .
* जरमनी म दिवारी ( लक्षुमी पूंजा ) क दुसरऽ दिन सूर्व्यदेव की पूंजा करन को रिवाज सऽ .
* डेन्मार्क म दिवारी कऽ दिन गायना की पूंजा करस , आन् कोठा म दिवा लगावस . ( क्रमशः ) 

लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

10 comments:

  1. खूब साजरी माहिती

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    1. धन्यवाद विनोद भाऊ

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  2. अपनी बोली में दिवाली की पूरी कहानी लिख दी आपने।
    बहुत ही साजरी

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  3. भोयरी संस्कृती की खुब साजरी माहिती ,
    बहुमुखी प्रतिभा के धनी श्री सुरेशजी देशमुख को नमन

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    1. धन्यवाद मनोज जी...
      आपका प्यार ही मेरी शक्ती है....

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  4. भोयरी संस्कृती की खुब साजरी माहिती ,
    बहुमुखी प्रतिभा के धनी श्री सुरेशजी देशमुख को नमन

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    1. इस कार्य में आप सभी का सहयोग है....

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  5. आपक कामला कोटी-कोटी नमन, इ काम साधो नाय, इ पीएचडी परीस मोठो काम सं । दादा नमन !

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    1. धन्यवाद भाऊ... तुमारी स्याबासकीच म्हरऽ साठी मोठो परमानपत्तर सऽ...
      असोच पाठ पर हात रव्हन देव , याच इच्छा...

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