Friday, July 17, 2020

भोयरी संस्कृति - १४ : दसरो

भोयरी संस्कृति - १४ : दसरो 

भोयरी संस्कृति मऽ खूब महत्त्व वालो इ साडेतीन मोह्यतूर मऽ को येक तिवार आसिन मह्यना कऽ चांदनी दसमी ला मनावस . क्षत्रिय भोयर समाज साठी येनऽ तिवार को खास महत्त्व ! 
दसरो तिवार मोठो...
खुसी ला नहाय टोटो....
दसरा लाच दसहरो , विजयादसमी , आयुध - पूजा , बिजोया बी कोस . दसरो आपलऽ देस कऽ संगच नेपाल , मारिस्यस , इंडोनेसिया , मलेसिया , सिरीलंका , चिन ,फिजी , सुरीनाम , गुयाना , थायल्यांड मऽ बी मनावस .
१ . इतिहास :  * सिरीरामजी दसरा कऽ दिन रावन सिन लढाई साठी निकऱ्या . 
* पांडव जब अग्यातवास मऽ रव्हन साठी गया त् वून नऽ आपला अवजार ( अस्त्र , शस्त्र ) भोसा ( शमी ) कऽ झाड पर लुकाया . अग्यातवास खतम भया पर वूई वापिस आया न् आपला अस्तर - स्यस्तर झाड परिन काढ्या . वोनऽ बेरा वून नऽ भोसा कऽ झाड की पूंजा करी , वू दिन आसिन मह्यना कऽ चांदनी की दसमी होतो .
* दुरगा देवी नऽ नव रात आन् दस दिन लढाई करकन् महिस्यासुर ला दसमी ला मारे . 
* वरतंतू गुरू को कौत्स नाव को चेलो होतो . चवदा बरस की पढाई होन कऽ बाद कौत्स नऽ गुरू ला गुरूदकसिना देन की इच्छा सांगी . गुरू नऽ पह्यलऽ नही कह्ये , बाद मऽ वोकी परिकस्या लेन साठी ; येक साल का येक कोटी सोना का सिक्का कऽ हिसाबकन् चवदा कोटी सिक्का मांग्या . कौत्स दानी राजो रघु कितऽ गयो . रघु राज्यानऽ आबच विस्वजीत यज्ञ करकन् सारो धन बाटेतो . राजानऽ तीन दिन की मोहलत मांगी , आन् इंदर भगवान पर चढाई करन की सोची . इंदर देव ला जब या बात मालूम पडी त् वोनऽ कुबेर ला भोसा कऽ झाड पर सोना का सिक्काना डावन ला सांगे . वूइ सिक्काना लेकन कौत्स गुरूजी कऽ जवर गयो . गुरूजी नऽ सिरफ चवदा कोटी सिक्काना लेया आन् बाकी का वापिस कऱ्या . वूई सिक्काना लोगना ला बाट देया . तब पासून भोसा का पत्ताना  ' सोनो ' मनून देन को रिवाज पड्ये . 
* पुरानऽ जमाना मऽ राजा लोगना दसरा पासून लढाई साठी निकरत होता . 

२ . नवरातरी : नवरातरी ला बहुड्डो बोवस . भोयर समाज मऽ नवरातरी का उपास करस . आसिन मह्यना कऽ चांदनी प्रतिपदा ला घटस्थापना करस . तब पासून नवरातरी चालू होस . नवरातरी मऽ महालक्षुमी , सरोसती आन् दुरगा कऽ नव रूप की पूंजा होस . पह्यलऽ तीन दिन दुरगा देवी , चवथऽ दिन पासून साव्वऽ दिन पावतर लक्षुमी देवी , सातवऽ - आठवऽ दिन सरोसती देवी आन् नववऽ दिन महानवमी ला कन्या पूंजा होस . 
गुजरात को गरबा - डांडिया आब सारऽ देस मऽ फयल गयो . बंगाल की दुरगा पूंजा को बी उसोच भयो .  गाव गाव रामलीला को आयोजन होस आन् दसमी ला रावन दहन होस .
* नवदुरगा का नव रूप : शैलपुत्री , ब्रम्हचारिणी , चंद्रघंटा , कूष्माण्डा , स्कंदमाता , कात्यायनी , कालरातरि , महागौरी , सिध्दिदात्री .

३ . दसरा का अनोखा रूप : 
* हिमाचल प्रदेस कऽ कुल्लू को दसरो खूब प्रसिद्ध सऽ . 
* छत्तिसगढ मऽ दसरो दंतेस्वरी माता कऽ पूंजा को पर्व मानस . इ पर्व पुरो अढाई मह्यना चलस . येको समापन आसिन मह्यना कऽ चांदनी त्रयोदसी ला होस.... ओहाडी पर्व पर !
* बंगाल , ओडिसा ,आसाम मऽ इ पर्व दुरगापूंजा कऽ रूप मऽ मनावस .
* तमिलनाडू , तेलंगना , आंध्रप्रदेस , करनाटक म बी शक्तीपूंजा कऽ रूप इ पर्व मनावस . मयसुर को दसरो देस विदेस मऽ प्रसिद्ध सऽ .
* गुजरात मऽ रंगीत घडा ला देवी को प्रतिक मानस . गरबा , डांडिया यहान की स्यान - पह्यच्यान सऽ .
महाराष्ट्र , मध्यप्रदेश मऽ नवरातरी दुरगा देवी ला समर्पित रव्हस . सीमोलंघन आन सोनो बाटनो इ खास रिवाज .
* कस्मिर मऽ बी नवरातरी की पुरानी परम्परा सऽ .
४ . दसमी : दसरो शक्तिपूंजा को पर्व आन् शस्त्रपूंजा की तिथी सऽ . आनंद , उल्लास , विजय को पर्व सऽ . 
पुरानऽ जमाना मऽ दसरा कऽ पह्यलऽ दिन ला  " पडन " कव्हत होता . नवमी कऽ दिन सारऽ मंदिर का झ्यंडाना ला खलतऽ पाडत होता . येन दिन सातरनी ( बघारनी ) आन् दरनो वरजिक होतो . हरिजन समाज येक हल्या ला पटिल कऽ बाडा पर लिजात होता . पटिल तलवार कन् वोकऽ नाक पर वार करतो . अगर वोको वार हुके त् वोला येक चांदी को रुपो हरिजन ला देन लागतो . जेतरा बार हुकेन वोतरा रुप्या ! बाद मऽ वूई हल्या ला लेकन घर - घर जात होता आन् अनाज का दान लेत होता . ( आबऽ या परथा मुडीस .) 
दसरा कऽ दिन झ्यंडाना रंगायकन , नवो झ्यंडो लगायकन् वोला सोनो - चांदी बांधकन् उभाइ करत होता . 
दसरा कऽ दिन घर ला आंबा का पानना आन् झंडू कऽ फुलना को तोरन बांधस . खेती कऽ काम का लोहा का अवजार , स्यस्त्र ( शस्त्र ) , गाडी - मोटार ला धोवस . आपलो सिवार सोडकन् दुसरऽ सिव मऽ जास . वहान कऽ भोसा कऽ झाड की उदबत्ती - कपूर - अकसिद कन् पूंजा करस आन् वोकी डंगालना  " सोनो " मनून ल्यावस . जवारी का धांडाना " चांदी " मनून ल्यावस . 
चवरी ( दिवरा ) जवर हरदकन् पाच येढा को कुंडल पूरस . वोपर भोसा कऽ पान कोई सोनो आन् जवारी कऽ धांडा की चांदी धरस . पिडा पर धोया ती अवजारना मांडस . येक दोडक्याला काडी का तीन पाय लगायकन् वोला चवरी कितऽ देठ को मुंडो करकन् उभो करस . ( बली को जनावर मनून ) .पिडा पर सोना का भांडाना बी धरस . वून कऽ भवताल चऊक पूरस . अवजार , गाडी - मोटर ला सेंदूर का बोटना लगावस आन सस्तिक काढस . बेल फुल , उदबत्ती , हरद कुकू , अकसिद , सोना - चांदी कन् पूंजा करस . मोठऽ सुरीकन् दोडक्या को देठवालो मुंडको कापस . परसाद , पुरनपोळी को निवद आन् खोबरा की स्येरनी रखकन् पानी फिरावस . घर कऽ बुजरुक ला सोनो देस न् पाय पडस . मंदिर मऽ , दुरगा देवी ला सोनो देस . बाद मऽ येक दुसरा कऽ घर जायकन् सोनो बाटस . 
भोयरी संस्कृति मऽ नवरातरी , पडन , दसरो यी क्षत्रिय धरम आन् खेती धरम सिन जुड्यो सऽ .

( सहयोग : पार्वतीबाई महादेवराव देशमुख ) 
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर .  7066911969


18 comments:

  1. राजाभोज क वंशज पर माय सरोसती की किरपा सं

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    1. धन्यवाद मनोज जी..
      माय सरोसती करी
      दान भोयराऊ बोली....

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  2. राजाभोज क वंशज पर माय सरोसती की किरपा सं

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    1. धन्यवाद मनोज भाऊ...
      चक्रवर्ती सम्राट राजा भोज की जय...

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  3. अतिशय सुंदर भोयरी भाषेतील अमूल्य ठेवा.
    भाऊ 🙏🙏

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  4. चांगली माहिती 👏👏

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  5. समाजला आपली संस्कृती आपलो भाषाम मालूम होस वोकोसाठी आपलो खूप खूप आभार.

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    1. धन्यवाद जी...
      आपली बोली , रीतीरिवाज, सनतिवार इ आमाला आमारं पीतर ( पूर्वज ) पासिन भेट्यास...उनको जतन भया पायजेन , वोकंसाठी लिखूस..तुमारी टिप्पणी कन् लिखन ला प्रेरणा भेटस...

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  6. सुरेश भाऊ
    पयले त मला माफ करो कs म येता दिन व्हाट्सअप पासून दूर रहे आनं तेकन मला आज पर्यंत तूमारो लिखाण वाचनको योग नही आये .
    आन एवढ सुंदर रचना पासून म वंचित रहे.
    एकदम सुंदर लिखाण सं.
    असोच लिखत रहो अन समाज ला आग लिजावत रहो .
    आज समाजला तूमारी गरज सं.
    समाज मं एक नवोदित पण भारदस्त लेखक तूमारं रूपमं भेटेस .
    समाजला तूमार पर गर्व स .
    धन्यवाद ! .

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    1. धन्यवाद पराडकर सर.., तुमीनं मला , म्हरं लिखान ला वानाये.. या म्हरं साठी खुसी आन् भाग्य की बात सं... मनपासिन आभार...

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  7. सुरेश भाऊ
    पयले त मला माफ करो कs म येता दिन व्हाट्सअप पासून दूर रहे आनं तेकन मला आज पर्यंत तूमारो लिखाण वाचनको योग नही आये .
    आन एवढ सुंदर रचना पासून म वंचित रहे.
    एकदम सुंदर लिखाण सं.
    असोच लिखत रहो अन समाज ला आग लिजावत रहो .
    आज समाजला तूमारी गरज सं.
    समाज मं एक नवोदित पण भारदस्त लेखक तूमारं रूपमं भेटेस .
    समाजला तूमार पर गर्व स .
    धन्यवाद ! .

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  8. खूप सुंदर माहिती , आज वाचली खूपच छान

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    1. धन्यवाद निलेश दा...

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  9. एकदम सुपर माहिती

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