भोयरी संस्कृति - १२ : रिसी पंचमी
रिसी पंचमीला च रुसी पंचमी , ऋषी पंचमी कोस . भोयरी संस्कृति मऽ भादवा कऽ पंचमीला , काजरतीज कऽ तिसरऽ दिन , गनेस चतुरथी कऽ दुसरऽ दिन " रिसी पंचमी " को व्रत करस . बाईलोगना रिसी ( ऋषी ) की पूंजा करस तेकन वोला रिसी पंचमी कोस .
१ . दिन विस्येस : कस्यप , भारद्वाज , विस्वमित्र , गवतम , जमदग्नी , वसिस्ठ आन् वसिस्ठ रिसी की लाडी अरुंधती कऽ नाव की आठ सुपारीना मांडकन् या पूंजा करस . रिसी पंचमीला बयील को कमाये ( वोकऽ कस्टऽ को ) कोनतो बी अनाज खात नही . साल मऽ येकडाव / येक दिन तरी आपलऽ कस्टकन् कमाये अन्न खानो , इ येकऽ मांग को नेम सऽ . रुसी - मुनी नऽ सांगे ती ग्यान आपलऽ जीवन कऽ उन्नती साठी बाचन , चिंतन , मनन आघऽ कऽ पिढी नऽ करत रह्या पायजेन , यकी याद देन साठी या रिसिपंचमी !
कोनतऽ बी व्रत , तिवार की बेरा आन् नेम बनन साठी भोयरी संस्कृति मऽ भौगोलिक वातावरन को बिचार करे रव्हस . चतुरमास मऽ आवनीवाली रिसीपंचमी कऽ व्रत मऽ रिसी पूंजा कऽ सिवा आघाडा कऽ काडी कन् दातमंजन , सवासिन ला हरद न्हान , माती न्हान , तिरथ न्हान असो नेम रव्हस . बाकी उपास आन् रिसीपंचमी कऽ उपास मऽ फरक रव्हस . येनऽ उपास ला कंदमुरच चालस . तसोच रिसीपंचमी को नहान आबऽ कऽ निसर्ग उपचार पध्दत सरखोच सऽ आन् वोको फायदो बी दिसस .
रिसी पंचमी ला आपलऽ देस आन् नेपाल मऽ मनावस .
२ . रिसीपंचमी को जेवन : रिसी पंचमीला खास भाजी करस वोला रिसी की भाजी कोस . कुम्बडो , मको , पोथी / धोपा का पानना , बाल की सेंगना , बटाना , भेंडी की मिसर भाजीला तूपकन् बघारस . तेल की बघारनी नही चलत . देवतांदुर / देवचऊर को भात अन् कढई करस . रांधन साठी कोनी बी येकच जात कऽ झाड की काडीना को इंधन बापरस . चाहा साठी गाय को दूध नही चलत , मयीस को चलस .
३ . बाईलोग आन् रिसीपंचमी : रिसी पंचमी की पूंजा भोयर बाईलोगना कमस कम सात बरस करस , कोनी नव बरस करस . जलम देन की स्यक्ती ला वलांडन साठी यी व्रत बाईलोगना सात बरस करस . वोकऽ बाद वोला उजवस . माहवारी कऽ दोस मिन् मुक्त होन साठी बाईलोगना यी व्रत करस .
रिसीपंचमी कऽ दिन बाईलोगना नदी पर , तिरथस्थान पर नहान साठी जास . नहान कऽ बाद मऽ पेहरन साठी लिया ती कपडाना पह्यले पानी मऽ भिजायकन् वारन ला डावस . हात मऽ अकसिदना लेकन पानी मऽ डुबकी मारस . नाहन कऽ बाद मऽ वोलऽ आंगकनच रेती की पिंड बनावस . उदबत्ती , कापुर , दिवो , सह्यद , मसी को दूध , वोकोच गोमतिर , तूप , दही , अकसिद , केला , नारेल , बेल फुल कन् पूंजा करस . नदी मऽ दिवो सोडस .
कमस कम सात बरस पूंजा होन कऽ बाद आन् माहवारी जान कऽ बाद मऽ येनऽ व्रत ला उजवस .
सबन बाईना मिरकन् कोनऽ रिसी कऽ तिरथ ला , तिरथस्थान ला जास . रिसीपंचमी व्रत उजवन साठी पूंजा को सामान , सिधा को सामान संगंच चांदी की बेलपतरी आन् चांदी की अकसिदना घडायकन् लेस . पुजारी - बामन साठी कपडा , दकसिना बी लिजास . घाट पर न्हावन कऽ बाद मऽ पूंजा मांडस . रेती की पिंड बनावस . सवासिन आन् बुढी - म्हथारी बाईना येक जागऽ पूंजा मांडस त् विधवा बाईना बेगरऽ जागऽ पूंजा मांडस . पूंजा करकन् पुजारी - बामन की बी पूंजा करस आन् वून ला अहिर ( कपडा ) न् दकसिना देस .
४ . मान्यता : महाभारत मऽ उत्तरा की कथा सऽ . अस्वथामा नऽ वोको गरभ नास करेतो . उत्तरा नऽ रिसीपंचमी को व्रत करे . व्रत कऱ्या बाद उत्तरा कऽ गरभ ला जीव फुट्यो , वू होय परिकसित राजो .... उत्तरा आन् अभिमन्यू को पोरग्यो ! गरभ मच दुय बेरा जलम लेन कऽ कारन परिकसित ला गरभ मच ' द्विज ' कह्यतो . रिसी पंचमी कऽ पूंजा कन् उत्तरा गरभपात कऽ दोस मिन् मुक्त भयी .
दोस मुक्ती कऽ संगच पोटुबाटुना को सुख - उन्नती , सुख सुविधा को लाभ आन् सौभाग साठी भोयर बाईना रिसी पंचमी की पूंजा करस .
रिसी पंचमी पर्व रिसी - मुनी साठी की स्रध्दा , समरपन , सन्मान आन् उपकार मानन की भावना दिखाडस .
( स्रोत : पार्वतीबाई महादेवराव देशमुख )
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर . मो . 7066911969
खूप चांगली बाता सांगि, आप लो त्योहार को बारा म
ReplyDeleteधन्यवाद सर
Deleteखुब साजरी माहिती
ReplyDeleteधन्यवाद मनोज जी
Deleteजय मायबोली भोयरी
ReplyDeleteजय मायबोली भोयरी...
Deleteधन्यवाद मनोज दा
मायबोली भोयरी साहित्य मंच को संस्थापक सुरेशभाऊ को लिखान कमल को सं !
ReplyDeleteधन्यवाद मनोज जी.. यी तुमारो प्रेम होय ...
Deleteसाजरो लेख
ReplyDeleteधन्यवाद जी 🙏
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