Sunday, July 12, 2020

भोयरी संस्कृति - ११ : पोरो ( पोळा )

( bhoyari dialect )भोयरी संस्कृति - ११ : पोरो ( पोळा )

भोयरी संस्कृति मऽ पिठोरी अवस ला बयील पूंजा को ' पोरो ' तिवार मनावस . साल भर आपलऽ साठी राबनारा बयीलदेव को मान को तिवार . 
१ . इतिहास :  बयील ( बैल ) पूंजा बायबल आन् यहूदी लोगना मऽ बी सऽ . भगवान भोल्यानाथ को वाहन नंदी आन् रिसभ ( वृषभ ) रास को प्रतिक बी पवित्र बयील सऽ . बयील मेसोपोटेमिया आन् मिसर ( इजिप्त ) कऽ सरखो चंदर सम्बधी रहो नही त् भारत सरखो सूर्व्य सम्बधी रहो , कयी धार्मिक / सांस्कृतिक अवतार को आधार रव्हस . 
* पास्यान युग मऽ यूरोप म कऽ गुफा मऽ अवरोक्स ( औरोक्स ) का चितरंगना दिसस .
* ताम्र युग मऽ लोगना नऽ बयील ला ' वृषभ ' रास को प्रतिक कऽ रूप मऽ मान्यता देई.
* सिन्धु घाटी की सभ्यता मऽ सील ( मुद्रा ) पर बयील की आन् बयीलदेव की मुख्य आकरुती सऽ .
* बेबोलोनिया , माया , सुमेरियन , असीरिया सभ्यता मऽ बयील की पूंजा होत होती .
* वेद मऽ बयील ला धरम को अवतार मानेस .
* असी मान्यता सऽ कऽ कामस्यास्तर , धरमस्यास्तर , अर्थस्यास्तर आन् मोक्स्यस्यास्तर को रचनाकार नंदी च होतो .
मानुस नऽ जब खेती करनी चालू करीस तब पासून बयील की महिमा आन् पूंजा चालू भयी . पुरी दुनिया कऽ संस्कृती मऽ बयील पूंजा दिसस .
२ . खेतीबाडी आन् तिवार : इ तिवार खेती किसानी पर आधारित पर्व सऽ . येनऽ बखत ला बोवनी , निंदाई को काम खतम होय जास . हिवरऽ गवत कऽ चाराकन् बयीलना बी साजरा धस्टपुस्ट दिसस . 
इ तिवार महाराष्ट्र , मध्यप्रदेश , तेलंगन आन् छत्तिसगढ मऽ येकच तिथी पर मनावस . महाराष्ट्र , मध्यप्रदेश मऽ पूरनपोळी को निवद रव्हस त् छत्तिसगढ मऽ ठेठरी , खुरमी , चौसेला , खीर - पुडी को निवद करस . 
कर्नाटक आन् कोल्हापूर जिला मऽ पोरा ला बेंदूर कव्हस . आन् बेंदूर बडसावितरी कऽ दुसरऽ दिन मनावस .
३ . खांदसेकनी / खांदमरदन : पोरा कऽ पह्यलऽ दिनपासून बयीलना ला आराम देस . पोरा कऽ पह्यलऽ दिन गडी नदी परीन बयीलजोडी ला धोयकन् लावस .मालक आन् मालकिन पूंजा को सामान लावस . बयीलजोडी का पायना पानीकन् धोस . हरद कुकू अकसिद , बेलपतरी वाहस . परसा कऽ पाच देठना की जुडी कन् तूप आन् हरद लेस . वोला आरती कऽ दिवा पर रखकन् मंग बयील कऽ मान पासून खोंड पावतर लगावस . वोलाच चढवती खांदसेकनी कोवस . साल भर उनकऽ खांदा पर जू को बोझो रव्हस , वोला हरद - तूप कन् सेकस . 
तुत्या कन् ढोसे , कासरा कन् आवरे 
वोको राग नको मानजे
आज आतवन देऊस 
सकारकन् जेवन ला आवजे .....
येक नमन गवरा पारबती हर बोलो हर हर महादेव....
नवऽ टोपला मऽ बिडा कऽ पाच पान पर पूरन को निवद धरस . कुम्बडो , काकडी , दोडक्या , मुंग - बरबटी की सेंग की मिसरा भाजी वोपर धरस . धोपा की / पोथी की पानबडी आन् मोहा का फुलना बी वरतीन डावस . निवद मऽ फुलना डावन को खास कारन सऽ . सारो अनाज त् बयीलना  पिकवस . .... वा वोकीच कमाई ! मोहा का फुलना आपन जमा करजे वाच आपली कमाई ! वोकी कमाई आपन खायजे तेकन  आपली कमाई ( मोहा का फुलना ) बी आपन निवद पर धरजे . 
दरुजा जवर गवरी पर गुगुर डावस . निवद बयीलना ला चारस . 
बयीलक्या कऽ घोंगडा की खोर मऽ मालक गहू / जवारी दान करस .
मालक कोस ,  " खोर भरो "
बयीलक्यो कोस , " कोठा भरो " 
मंग वोला सिरपाव ( नवा कपडा , दकसिना ) बी देस .
४ . बयील पोरो : सकारीच दरुजा कऽ दुय बाजू परसा का मेढाना धरस . मेढा कऽ बुडसिन् मुरूम डावस . मेढा ला हरद कुकू का बोटना लगायकन् बेलपतरी बांधस . धूप दिखाडकन् निवद धरस . पह्यलऽ कोतवाल दरुजा ला आंबा कऽ पत्ता की तोरन बांधत होतो . देऊर म नंदी देव साठी बेगड , नानीसी मठाठी , बेल फुल लेकन जास . जू ला गेरु कन् रंगायकन् बेगड लगावस . वोला बाख को दोर बांधस आन् दाठ्ठा मऽ धरस . बयीलना नदी परीन धोयकन् घर मऽ आया पर वून पर रंग का ठप्पाना मारस . सिंग ला बेगड चिपकावस . बयीलना कऽ आंग पर साजरी रंगीत झूल डावस . नवऽ येसन ला हरद कन् रंगायकन् वून ला बांधस . बासिंग , चवर , मठाठी , घोल्लर , पितर को तोडो , कवडी की म्होरकी , बाघनख - कवडी को गजरो , कंठी - गठलम , चमडा की कपारपट्टी , बाख का नवा खांडोरना कन वूनला सजावस . नानऽ पोटुना साठी गोंडा की कुची बनावस . 
कुटी जवारी , दूध , इलायची , गुड - साखर को जी निवद बनावस वोला " ठोंबरो " कोस . बयील सज्या पर वूनकी पाय धोयकन् पूंजा करस आन् ठोंबरा को निवद देस . वोकऽ बाद बयीलना तोरन मऽ जास . 
तोरन मऽ ब्यांड बाज्या की धूम रव्हस . वहान बयीलक्यो मठाठी ला बांधी बेलपतरी काढकन् तोरन परीनि फेक देस . पटिल , मानवाईक लोगना बयीलजोडीना की पूंजा करस . मयदान मऽ लाठी - काठी , दांडपट्टा को खेल होस . येक कऽ पासऽ येक झडतीना की बानी लागस . 
बाटी रे बाटी ... खोबरा की बाटी 
महादेव रोवस दुय पयसा साठी 
पारबती ला फाटे लुगडो पेहरन साठी 
नंदी कऽ कपार की हालस मठाठी ....
येक नमन गवरा पारबती हर बोलो हर हर महादेव ऽऽ.....

आभार गडगडस 
सिंग फडफडस
सिग मऽ पड्या खडा 
तोरी माय रांधस 
सवारी बडा....
येक नमन गवरा पारबती हर बोलो हर हर महादेव ऽऽ....

सपरी रे सपरी
नानी मोठी सपरी
पह्यली ला नहाय पोटुबाटू
तेकन करीस गा दुसरी....
येक नमन गवरा पारबती हर बोलो हर हर महादेव ऽऽ...
तोरन टुट्या पर पोरो फुटस . महादेव को अंस हनुमान जी . बयीलजोडीना हनुमान कऽ मंदिर मऽ जास आन् वाहासिन मालक कऽ घर मऽ आवस . मालकीन बयीलक्यो आन् बयीलजोडी की पाय धोयकन् पूंजा करस आन् बोजारो देस . वोकऽ बाद बयील जोडी गाव मऽ फिरकन् घर मऽ आवस . 
घर मऽ आडा खलतऽ मालकीन चऊक पुरस . वोपर नवो बेरु को टोपलो धरस . टोपला मऽ कुडव का पानना हाथरस . वोपर सवारी - बडो , अनरसो , लाडू , मिसर भाजी , वरन भात , गोड , पोथी का पान आन् वरतीन मोहा का फुलना डायकन् निवद बनावस . बयीलना घर पर वापिस आया पर वोकी आरती करकन् पूंजा करस . आबऽ वोला खोंड पासून गरदन पावतर हरद - तूप लगावस , या उतरती खांदसेकनी ! घर मऽ टोपला मऽ बनाये ती निवद चारस आन् पाय लागस . 
येक नमन गवरा पारबती हर बोलो हर हर महादेव ऽऽ....
५ . पिठोरो :  घर की लक्षुमी पिठोरा को उपास धरस . पोरा कऽ दिन चवरी ( दिवरो ) जवर कऽ दिवाल पर , जेतरा भाईना होयेन वोतरा को हरद कन् चितरंग काहाडस , आन् वून की पूंजा करस . 
जब बयीलना तोरन मऽ जास तब वा लक्षुमी टोगरा पर काकडी फोडस . कुडव कऽ पत्ता पर पूरन , साखर- तूप को निवद धरस .

६. तानो पोरो ,बाड पोरो , मारबत , कर , पाडवो : पोरा कऽ दुसरऽ दिन झुंझुरकाच सातरी मिनच लोगना मारबत हाकलस . 
मच्छर.. चिलटाना लेय जागे ऽ ऽ मारबत...
राईरोग... खेसखोकलो लेय जागे ऽ ऽ मारबत....
सकारी मेढा ला बांधी बेलपतरी ( मारबत ) सोडकन् मेढाना काहाड लेस . पह्यलऽ कऽ जमाना मऽ मारबत लेन ला कोतवाल आवत होतो . 
मोठऽ पारग ला नानऽ पोटुबाटुना की नंदी ला सजावन की गडबड - धांधल चालू रव्हस . ताना पोरा मऽ पोटुबाटुना सजधज कन् नंदी लेकन जास . सबन ला कयी न् कयी इनाम भेटस . मंग पोटु - पोटीना आपलो नंदी लेकन गाव मऽ फिरस . कोनी पयसा त् कोनी चाकलेट को बोजारो देस. 
मोठा मानुसना जुवो खेलस . पोटुबाटुना संगच कयी मोठा मानुसना बी झंडी मुडी खेलस .... कोनी हारस...कोनी जितस ! 
सरावन मह्यना मऽ कोनी मास मच्छी खात नही . तेकन कयी लोगना पाडवा ( कर ) ला मास मच्छी खास . पर आरबाडी लोगना रुसी पंचमी पावतर मास मच्छी नही खात . 
बयील आन् बयीलक्या ला येनऽ तीन दिन सुट्टी रव्हस . ... खानो.. पेनो... खेलनो... ! तीन दिन हासी खुसी मऽ निकर जास . 

पोरा की येक कविता पार्वतीबाई महादेवराव देशमुख कऽ  " उजळणी " कविता संग्रह मिन :
पोळा
माझ्या वावरात
काकडी वेला गेली
बंधुराजाची बहिण
पिठोरा कबुलली

पोळ्याच्या दिवशी
काकडीला मान
साळा वधला भाटव्यानं
केला सजीव बहिणाईनं

पोळ्याच्या दिवशी
काकडी नको खाऊ
काय सांगू माझे मैना
तोरणात गेले भाऊ

पोळ्याच्या दिवशी
आहे घरोघरी मेढे
केवढं दुख झालं
परसरामा तुले

( सहयोग : पार्वतीबाई महादेवराव देशमुख , रामेश्वर गोरे )
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर . मो : 7066911969

32 comments:

  1. Nice information about out cultural festival in our Bhoyari language............

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    1. धन्यवाद निलेश जी...

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  2. पवारी भाषा मे आपके द्वारा दी गई जानकारी बहुत ही अच्छी लगी । जी

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    1. धन्यवाद महोदय....आपका नंबर सेव नही होने anknown लिखके आया है....

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  3. सुरेश भाऊ, तुमाला खूप खूप धन्यवाद,आपलो पोरा की माहिती चांगली दी तुमनं. असोच लिखत जा आनं आपली पवांरी बोली ला आघं बढावत जाओ.

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    1. धन्यवाद सर.. तुमारं उत्साहवर्धन कन् लिखन ला प्रेरणा भेटीस...

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  4. नव्या पीढिसाठी नक्कीच लाभदायक

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    1. धन्यवाद निलेश दा....

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  5. नव्या पीढिसाठी नक्कीच लाभदायक

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  6. नव्या पीढिसाठी नक्कीच लाभदायक

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    1. हो..सर नक्कीच यानिमित्त पोळ्याची माहिती कळली...पवारी वा भोयरी भाषेविषयी माहिती मिळाली... आणि कळाली सुद्धा..

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    2. धन्यवाद निलेश दा

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  7. 👌👍💐
    भोयरी संस्कृती ,परंपरा की खूब साजरी माहिती

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    1. धन्यवाद मनोज भाऊ...जय मायबोली भोयरी

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    2. धन्यवाद मनोज जी....
      जय मायबोली भोयरी

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    3. धन्यवाद मनोज दा..
      जय मायबोली भोयरी

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    4. धन्यवाद मनोज जी..
      जय मायबोली भोयरी

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    5. धन्यवाद मनोज जी..

      जय मायबोली भोयरी

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  8. मायबोली भोयरी को जागर
    जय मायबोली भोयरी

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  9. मायबोली भोयरी को जागर
    जय मायबोली भोयरी

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    1. धन्यवाद मनोज जी..
      जय मायबोली जय भोयरी

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  10. सराहनिय...आपल संस्कृतीला जिवंत राखणको काम...वाह!!
    खुप खुप शुभेच्छा ।।


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    1. धन्यवाद घागरे सर....

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  11. बहुत बढ़िया लेख, पोला की शुभकामनाएं

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  12. बहोत बढीया जानकारी, पोला त्योहार की हार्दिक शुभकामना।

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    1. धन्यवाद भोयर सर 🙏🙏

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