भोयरी संस्कृति - १० : किस्न जल्मास्टमी
महाराष्ट्र मऽ सरावन मह्यनाकऽ अंधारी अस्टमी आन् मध्यप्रदेश मऽ भादवा कऽ अंधारी अस्टमी ला जल्मास्टमी को तिवार आवस . दिन येकच सऽ पन् बेगरऽ बेगरऽ पंचाग मऽ मह्यनो बेगरो रव्हस .
भोयरी संस्कृति मऽ जल्मास्टमी मनावन को जुनो रिवाज सऽ .
द्वापर जुग मऽ भगवान किस्न बिस्नु को आठवो अवतार . भगवान किस्नदेव मायबाप देवकी आन् वासुदेव पर उनला पाले पोसे यसोदा आन् नंदबाबानऽ . भारतीय उपखंड आन् आसिया कऽ लोककथा नायक किस्नदेव कऽ बिना यहान को साहित्यच नही लिखता आवत .
भगवान किस्न की ' भागवत गीता ' को उपदेस अनादी बखत पासून जनमानस ला जीवन ग्यान दे रह्येस .
मथुरा मऽ जल्म्या कान्हा की महिमा दुनिया भर मऽ सऽ . जल्मास्टमी को तिवार आपलऽ देस , नेपाल , पाकिस्तान , बंगलादेस , फिजी , मारिसस , सुरीनाम , सिंगापूर , कनाडा , मलेसिया , न्युझिल्यांड ,आस्ट्रेलिया , गुयाना , त्रिनिदाद आन् टोबागो , जमैका , अमेरिका , युरोप , दक्षिण आफ्रिका मऽ धुमधाम कन् मनावस . नेपाल आन् बंगला देस जल्मास्टमी ला सरकारी सुट्टी रव्हस .
किस्न जल्मास्टमी ला गोकुलास्टमी , कानोबा , सिरी जयंती , यदुकुलास्टमी , सिरी किस्न जयंती बी कोस . जल्मास्टमी कऽ रात ला मोह रातरी बी कव्हस .
भोयरी संस्कृति मऽ जल्मास्टमी ला चवरी जवर तूप कन् भगवान किस्न , गोप - गोपी , गवळनना , गाय - बासरुना असो गोकुळ को चितरंग काहाडस . येला चवखुटी बॉर्डर बी बनावस .
येनऽ दिन उपास धरस . कोनी घर कऽ किस्नदेव की पूंजा करस त् कोनी क्यान कानोबा की मूरती बसाडस . किस्नदेव ला पारना मऽ डावस . रातभर भजन - किरतन चालस .
किस्नदेव ला दूध - दही की खूब आवड . उनकऽ भेवकन् बाईलोगना उच्ची सिका पर दूध - दही धरता . पर किस्नदेव आपलऽ सोबतीना कऽ संग येको बी तोड काढता . वूई मिरकन् येक कऽ वरतऽ येक चेंगकन् , दूध - दही काढकन् खाता . येनऽ किस्न लिला को आबऽ रिवाज भयो .गोपालकाला कऽ दिन मंदिर मऽ भजन - किरतन कऽ बाद दही हांडी फुटत होती . आबऽ उच्ची उच्ची दही हांडी बांधस . आन् वोला फोडनसाठी पोटुना की टिम आवस . ज्या टिम दही हांडी फोडस उनला इनाम भेटस .
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
भोयरी भास्या क संवर्धन,जतन,प्रचार,प्रसार,कं काम मायबोली भोयरी साहित्य मंच क संस्थापक सुरेशभाऊ कर रहेस,सुरेशभाऊ ला नमन सं
ReplyDeleteभोयरी बोलीक उद्धार होनू आब दूर नाही खुब साजरी माहिती
ReplyDeleteकृष्ण जन्माष्टमी कशी म नावस ये की खूब साजरी माहिती दीस धन्यवाद
ReplyDeleteजय श्री कृष्णा राधे राधे आपका लेख आशा और उम्मीद अंधेरे से उजाले की ओर नए रास्तों पर प्रगति पथ पर अग्रसर होने की आशाएं को जगाने वाले जगतपति को अपनी बोली भाषा में लिखा अभिनंदन जय श्री कृष्णा भगवान श्री कृष्ण का आशीर्वाद आप पर बना रहे shri krishna
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