सोयरिक ( भोयरी कविता )
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
भूई अगास की जुडी
चिरंतन सोयरिक
सूर्व्य चंदर चान्नीना
भायी दिखाडे हरीक ।१।
बेल झाडजुड सारा
कोनी ठोकर बारीक
खेत उगाये फसल
असी फले सोयरिक ।२।
संबा पाराबती म्हरा
परन्यास मन चित
साथ जलम जलम
नही बेगरा कुचित ।३।
नवो धरम करम
डायी असी नवी रीत
गाठ बांधी सरग म
जिंदगी ला अमरीत ।४।
नारायन लक्षुमी को
ध्यान करो जी घडीक
खेंडो स्येलो गाडजोडो
बरकस तवरीक ।५।
सारा सोयरा धायरा
करे कप्पी सोयरिक
दुय जीव ला मिराये
काढ्ये बिह्या की तारीख ।६।
देव देवांगन आघऽ
डोकसा प अकसिद
मन दाठ्ठा की तुरसी
सावितरी की स जिद ।७।
दुय कुर दुय जोत
जोड गुना को गनित
न्हाय भागा वजाबाकी
येक दिव् नाल पुनित ।८।
रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
शानदार रचना
ReplyDeleteधन्यवाद
Deleteखूब साजरी कविता।
ReplyDeleteधन्यवाद
Deleteधन्यवाद
Deleteखूब साजरी कविता
ReplyDeleteधन्यवाद
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