झलके भोयरी पानी
( भोयरी अभंग )
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
भुले माय बाप बोली ।
करम की खाली ढोली ।।
बोली अमरीत धार ।
दुय धारी तलवार ।।
दुध पाजे मायबोली ।
ग्यान भंडार ला खोली ।।
सेव भोयरी को बाई ।
खानदानी नवलाई ।।
नाना गह्यना को वान ।
करी सरोसती दान ।।
केती लेयी बोली साज ।
निभे वोकन च काज ।।
सूर्व्य चंदर क वानी ।
बोली भोयराऊ बानी ।।
झलके भोयरी पानी ।
मह्यके चंदन वानी ।।
रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
खूब साजरी रचना
ReplyDeleteधन्यवाद जी
Deleteदूध सी निर्मल और चंदन की महक से सरोबार हैं हमारी बोली भाषा
ReplyDeleteधन्यवाद जी
DeleteGhadi sajri rachna.
ReplyDeleteखुप सहजता पुर्ण बोली भाषा को महत्व विषद करेस...👌👌
ReplyDeleteधन्यवाद सर
Deleteवाह वाह ।।अप्रतिम रचना ..
ReplyDeleteधन्यवाद सर
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