Thursday, February 4, 2021

झलके भोयरी पानी ( भोयरी अभंग ). bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

झलके भोयरी पानी 
( भोयरी अभंग )
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

भुले माय बाप बोली ।
करम की खाली ढोली ।।

बोली अमरीत धार ।
दुय धारी तलवार ।।

दुध पाजे मायबोली ।
ग्यान भंडार ला खोली ।।

सेव भोयरी को बाई ।
खानदानी नवलाई ।।

नाना गह्यना को वान । 
करी सरोसती दान ।।

केती लेयी बोली साज ।
निभे वोकन च काज ।।

सूर्व्य चंदर क वानी ।
बोली भोयराऊ बानी ।।

झलके भोयरी पानी ।
मह्यके चंदन वानी ।।

रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

9 comments:

  1. खूब साजरी रचना

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  2. दूध सी निर्मल और चंदन की महक से सरोबार हैं हमारी बोली भाषा

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  3. खुप सहजता पुर्ण बोली भाषा को महत्व विषद करेस...👌👌

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  4. वाह वाह ।।अप्रतिम रचना ..

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