भोयरी बोली ग्यान
भाग - ६
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
१. साथरी =
भोयरी बोली - बिछावन, बिस्तर, वो कपड़ों / गादी ज्या खाट पर बसन ला , लेटन ला हाथरस।
मराठी भाषा - बिछाना, गादी / दरी जी खाटेवर बसण्यासाठी/ झोपण्यासाठी अंथरतात.
हिंदी भाषा - कुश की बनी छोटी चटाई।
संस्कृत भाषा - संस्तरण
सो भूमि भई साथरी
कहिए कारण कूण।
२. कथरी/ कथडी
भोयरी बोली - जुनअ - पुरानअ धोतर, लुगड़ा ला सिय कन् बनावस ती - वाकर
मराठी भाषा - जुन्या धोतर - लुगड्यांना शिवून बनविलेले अंथरूण/ पांघरूण - वाकळ , गोधडी
हिंदी भाषा - पुराने कपड़ों को जोड़ कर बनाया गया बिछौना - गुदड़ी।
करी बिछावन तहॅं बड़ भारी
गादी तकिया बहुत अपारी।
३. पीढ़ा / पीढ़ो
भोयरी बोली - काठ / लकड़ी को पाय वालों नान्हो आसन / चवकी।
पीढ़ा पर बस कन जेवन करस।
पीढ़ा की लंबाई देढ़ - दुइ हाथ , चवडाई पाऊन - येक हाथ आनअ उचाई चार - सा उंगल रवस।
मराठी भाषा - लाकडापासून बनविलेले बसावयाचे आसन - पाट.
हिंदी भाषा - लकड़ी का पायेदार छोटा आसन , छोटी चौकी। लंबाई देढ़ - दो हाथ , चौड़ाई पौन या एक हाथ और उंचाई ज्यादा से ज्यादा चार - छह उंगली
संस्कृत भाषा - पीठ , पीठक
शोधार्थी : सुरेश महादेवराव देशमुख
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