भोयरी उखाना
भाग - १
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
डुल झुंबर को फुल उम्बर को
बिंदराबन पर उजिड
चांद सूर्व्या अम्बर को ।
स्थान चवरी को मान गवरी को
दिवो बरस रात दिन
माहेर म्हरो सावरी को ।
गोऱ्हो धरती को पोरो मुरती को
बोरी की झूल मठाठी
पिठोरो म्हरो किरती को ।
मनी सोना को पानी बाना को
चांदी को घंघार ल्यायो
जिद करे उखाना को ।
पीढो चंदन को कडो आंदन को
........ राव क संगअ
हर जलम स नांदन को ।
रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
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