Saturday, December 18, 2021

अजब गजब - ८३ : इगास पर्व. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

अजब गजब - ८३ : इगास पर्व
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

बारह ए गैनी बग्वाली मेरो माधो नि आई
सोलह ऐनी श्राद्ध मेरो माधो नि आई ।

उत्तराखंड गढवाल म दिवारी ला बग्वाल कोस . बग्वाल ( दिवारी ) क बाद ११ व  दिन ' इगास पर्व ' मनावस . इ दिन येकादसी को रव्हस , तेकन येन दिवारी ला ' इगास बग्वाल ' इ नाव पड्यो . 
इगास क दिन गोड कारला आन् लाल बासमती चऊर को भात बनावस . 
भैलू : भैलू को मतलब स उजारो करनी वालो . भैलू ला च अंध्या बी कोस . अंध्या को मतलब अंधारो दूर करनी वालो . इगास पर्व प भैलू खेलनो इ मुख्य रिवाज स . चीड क झाड की लकडी को भैलू बनायकन् , वोला बार कन् भैलू खेलस . उत्तराखंड को इगास तिवार असो अनोखो स . 
इतिहास अन् मान्यता : * ४०० बरस पह्यलऽ , १७ वी सदी म गढवाल इलाखा क टिहरी पर पवार राजो महीपति स्याह को राज होतो . आन् येन राज को सेनापति होतो वीर भड़ माधो सिंह भंडारी . ( गढवाल की काला - भंडारी जाति परमार की च स्याखा स . सबन भंडारी सरनेम परमार नि हय . ) राजा न सेनापति वीर भड माधो सिंह ला तिब्बत प लढाई साठी पठायो . तिब्बत क द्वापाघाट क राजा संग वीर माधो सिंह की भयंकर लढाई भयी . येन युद्ध म द्वापाघाट को राजो हारे . वीर माधो सिंह न तिब्बत क जीत्या इलाखा क हद पर मुनारा गाड्या . येम का कयी मुनारा आब बी स . मैकमोहन हद की लाइन ठह्यरावन क बेरा येन च मुनाराना ला हद मानी . 
जंग त जीती पर वापसी आवन को वांधो भयो . वहान बरफ पडन ला लागी . रस्ता बंद भय गया . मोठऽ मुसकिल कन् वीर माधो सिंह अन् वून का सैनिक , रस्तो खोजत खोजत गढवाल क दुसांत इलाखा म पहुंच्या . 
येन बखत च दिवारी को तिवार बी आय कन् गयो . राजा आन् लोगना ला वाटे क माधो सिंह अन् वून का सैनिक जंग म काम आया होयेन . तमाम लोग दुखी होता . पूरऽ राज म कोनी न च दिवारी नी मनाई . दिवारी क बाद ११ व दिन माधो सिंह अन् सैनिक गढवाल म आया . आपलो सेनापति जीत कन् आयो , यकी राज्या ला अन् लोगना ला घाडी खूसी भयी . लोगना न दिवा बार कन् दिवारी को तिवार मनायो . आन् येन दिन ला च इगास बग्वाल कोस !
* भगवान सिरी राम लंका परीन अजुध्या आया . पर यकी खबर ११ दिन बास्त गढवाल म आई , तेकन लोगना न येन दिन दिवारी मनाई , असी बी येक मान्यता स . 
* भीम की येक राकस संग लय दिन वरी लढाई भयी . भीम न या लढाई दिवारी क ११ दिन बाद जीती , तेकन पांडव न दिवारी मनाई , असी बी इगास की येक मान्यता स . 

लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

2 comments:

  1. बहुत ही अच्छी है इतिहासिकजानकारी

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