अजब गजब - ५५ : कटासराज
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
ॐ नमः शिवाय
पाकिस्तान म इस्लामाबाद परिन ९० कि.मी. प चकवाल जिला म ' पुरातन सिव मंदिर कटासराज ' स . चकवाल परिन ४० कि.मी. दूर येनऽ तीरथ की मोठी महिमा स . सिंधू - झेलम नदी क खोरा म नमक कोह ( Sault range ) म को इ तीरथ स्थान महाभारत कार को स . येनऽ जागा ला ' किला कटास ' बी कोस . यहान क पहाडी को नाव कटस स .
१. इतिहास अन् मान्यता : * भगवान सिव जी को सति संग बिह्या होतो . बिह्या म सति क पिताजी न भगवान भोलेनाथ को अपमान करे . येनऽ बात प सति न अगनी कुंड म कुदकन् आपरो जीव देयो . सति क वियोग क दुखकन् भगवान भोलेनाथ क डोरा मिन दुय आसू गऱ्या . येक पड्यो राजस्थान म , जे को ' पुष्कर तीरथ ' बने . अन् दुसरो आसू पड्ये कटासराज म . कटासराज कुंड क पानी ला अमरित मानस . कटास स्यबद संस्कृत क ' कटाक्ष ' स्यबद को रूप होय .
* त्रेतायुग म जब महाभारत कार म पांडवना ला १२ बरस बनवास अन् येक बरस को अग्यातबास भये तब पांडव कटासराज तीरथ म आयाता . सबन ला तिस लागीती . तब येनऽ कुंड की रखवाली येक यक्स्य करत होतो . युधिस्ठिर सोडकन् सबन येकेक गया . पर पानी लेन क पह्यले यक्स्य वून ला कई सवाल का जबाब मांगता . गलत जबाब देया पर वूई बेहोस होत होता . आखरी म युधिस्ठिर गयो . वोन यक्स्य क हर सवाल को जबाब देये , तब सबन ला पेन साठी पानी भेटे .
* पोथोहर पठार प कटासराज तीरथ संग च कयी देऊरना की साखरी स . कटासराज मंदिर संकुल ६ व सदी म बनेस , असी मान्यता स .
* हिंदू स्याही क राज म कटासराज तीरथ संग च ग्यान , कला , संगीत को बी मुख्य केंद्र होतो . तक्षशिला , कटासराज अन् शारदापीठ असऽ तीन केंद्र म विद्यापीठ होता . वोनऽ बेरा कटासराज म १०,००० विद्वान होता . दुनिया भर म फयले ' रोमां ' संगीत कटासराज की देन स .
* ११ व सदी म महमूद गझनी न कटासराज प हमलो करकन् लुटेत्यो .
* यहान सेंधा लोन क खदान को लोन पह्यले पुरऽ हिंदुस्थान म आवत होतो .
* कटासराज रेसिम मारग सिन बी जुड्यो होतो , अन् इ बेपार को भी मोठो बजार होतो .
* इंडो पाक प्रोटोकाल १९७२ क तहत हर साल २०० हिंदू कटासराज तीरथ की यात्रा कर सकस .
* भगवान भोलेनाथ को इ तीरथ मोठो पावन अन् चमत्कारी स .
* कारतिक अन् महासिवरातरी ला यहान यात्रा भरस .
* इ.स. १९४७ क बटवारा क बास्त यहान का हिंदू हिंदुस्थान आया .
# जिंदगी म येक डाव तरी कटासराज तीरथ, भगवान भोलेनाथ को दरस्यन कऱ्या पायजेन ...
लेखक : इंजि. सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
खूप साजरी जाणकारी
ReplyDeleteधन्यवाद जी 🙏
Delete👌👌
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