अजब गजब - ६१ : यजीदी
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
मेसापोटोमिया अन् भारत क संस्कृती को संबंध पुरानो स . वा संस्कृती खतम भयी पर वकी निस्यानीना आब बी कोनतऽ न कोनतऽ रूप म देखन ला भेटस . १५०० बरस पह्यले इस्लाम धरम पयदा भयो अन् देखता देखता पसचिम आसिया , मध्य आसिया , उत्तर आफरिका म फयल्यो . पुरानऽ वयदिक धरम का , इरान का पारसी हिंदुस्थान म आया अन् बाच्या . पर कयी पुराना वयदिक धरम पंथ वाला मंझार म च फस गया , वोम को च येक ' यजिदी धरम '! यजिदी धरम ला पसचिम आसिया म को हारपे ती हिंदू धरम को पंथ मानस .
इराक को उत्तर भाग , तुरकीस्तान को दकसिन भाग अन् सीरिया क पूरब भाग रवस यजिदी . वून ला कुरदी को उपसमुदाय मानस . आबऽ यजिदी लोग इराक , सीरिया , जरमनी , आरमेनिया , रूस म बी रवस .
हिंदू धरम को पंथ यजिदी म दीपक , हवनकुंड , आरती , अभिसेक को चलन स . यजिदी हिंदू सरखाच समई , दिवो बारनो , कपार पर पवितर बिंदी ( कपार पर तेल सरखी चिज को टिक्को ) , पुनरजलम , मोकस्य , सकार सांज सूर्व्यदेव की पूंजा , हात जोडकन् नमस्कार , हवन , पूंजा पाठ , मुंडन , निराहार व्रत करस / मानस . जमीन , पानी , आग म थुकनो यजिदी धरम म वरजिक स .
यजिदी लोग बांसुरी , सनई , डफ बजावस .
यजिदी लोग ' कुरमांजी ' माह्या बोलस ज्या इंडो - इरानियन स्याखा की भास्या स . यजिदी लोग पिताजी ला दादा अन् माय ला अम्मी कोस .
यजिदी लोग कब बी निरा रंग का कपडा नी पेहेरत .
निसर्ग पूजक यजिदी लोगना का देऊर ठेठ हिंदू देऊर सरखा रवस .
१ . यजिदी धरम की मान्यता : * यजिदी धरम मान्यता क अनुसार येनऽ धरम की परंपरा ६००० बरस पुरानी स . पसचिम अखंड भारत मिन यजिदी लोगना को इसापूर्व २/३ हजार बरस पह्यले स्थानांतरन भयो , असी मान्यता स .
* भगवान न ( याज्दान = रचियता ) दुनिया बनाई अन् वोक देखभाल साठी वोला ७ इजिद ( फारसी शब्द - फरिस्ता देवता ) क हवालऽ करे . येम को परमुख इजिद ' मेलेक ताऊस ' ( मोर फरिस्ता देवता ) ! मोर इ अमरत्व को प्रतीक स .
असल बात असी क इराक , सीरिया म मोर च नी . मोर सिरफ दकसिन आसिया म च सापडस . हिंदू धरम क कारतिक ( महादेव पाराबती को पोरग्यो ) , मुरुगन , सुब्रमन्यम को रूप इ ' मेलेक ताऊस ' ! मोर फरिस्ता देवता की दिन म ५ बेरा पूंजा करस .
* ५/६ हजार बरस पासिन बिछड्या यजिदी लोगना पर इस्लाम , इसाई , पारसी धरम को भी असर दिसस . येतरऽ बरस पासिन बिछड्या बाद आजूबाजूको असर पडनो स्वाभाविक स . पर येतरा बरस भया , वून न मरन क भेव कन् बी आपरो धरम नी सोड्ये .
* १२ वी सदी म यजिदी को धरमगुरू ' सेख अदी इब्न मुसाफिर ' न यजिदी धरम ला नवा नेम नियम बनायकन् अनखिन कप्पो बांध्ये . उत्तर इराक क मोसुल क उत्तर म अराफत पहाडी प ' लालीश ' यहान येनऽ महान धरमगुरू की समाधी स . यजिदी लोगना साठी लालीश को देऊर अन् इ स्थान हिंदू धरम क ' कासी ' सरखो स . समाधी को मुंडो सूर्व्यामुखी स .
* यजिदी धरम म मुरीद , सेख अन् पीर या ३ जात स . वूई जात म च बिह्या करस पर येक गोत्र म बिह्या नी करत . बिह्या म लाडी हिंदू सरखो लाल स्यालू पेहेरस . बिह्या म वून को पंडित येक भाकर का दुय टुकडा करस अन् लाडा लाडी ला देस .
* डिसेंबर मह्यना म दिवा बार कन् दिवारी सरखो तिवार मनावस . ३ दिन का उपास धरस आन् वोन उपास ला दारु पेकन सोडस .
* सप्टेंबर मह्यना क १५ पासिन २० तारीख पावतर वून की कासी ( लालीश ) म मोठी यातरा भरस . दुनिया भर का यजिदी लोग यहान आवस . वहान क नदी म न्हावस आन् दिवा बार कन् , आरती कर कन् पूंजा पाठ करस .
* नवो साल यजिदी बेगर च तरीका कन् मनावस . येनऽ दिन वूई मोर भगवान ला घुमावस . सकार सांज पूंजा पाठ , आरती करस अन् तमाम लोगना संगऽ जेवस .
* यजिदी धरम की सारी परंपरा ' मौखिक ' स .
* लालीश क पवितर देऊर क दरुजा क जेवनऽ आंग प नाग देवता की मूरती स . देऊर क अंदर दिवाल प समई संग साडी पेहेरी हिंदू बाई को मोठो चितरंग स .
२ . यजिदी लोगना का हाल : * पुरी दुनिया म ५/७ लाख यजिदी धरम का लोग स . अगल बगल म कट्टर मुसलमान , अरब स . दुनिया म सबसिन जास्त बेरा यजिदी लोगना को नरसंहार भयो . ७३ बेरा वून को जातिसंहार भयेस . आतंकवादी लोगना न वून का ६८ देऊरना तोड्या . वून ला मुसलमान बनन साठी येतरो जुलूम कऱ्यो क वकी हद नी . आयसिस इ आतंकवादी संगठन जवान यजिदी बू बेटीना ला जबरदस्तीकन् लिजास अन् तुमी बिचार बी नी कऱ्यो होयेन , येतरी नरक यातना देस .. वून को नास करस .
महान संस्कृती का धारक यजिदी लोगना न आपलो देस खोये ... नरक सरखा जुलूम झेल रह्यास ... किडा मुंगी सरखो वून को नरसंहार होय रह्येस ... पोटीबाटीना की इज्जत निलाम भय रह्यीस .
धरम क नाव पर असो नंगोनाच चाल रह्येस . आपलऽ ६००० बरस पुरानऽ येनऽ भाईबंदना की कोनी ला च दया नी आय रह्यीस .
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर .
अच्छी रचना अभिनंदन भैय्या जी
ReplyDeleteधन्यवाद जी 🙏
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