Wednesday, April 21, 2021

अजब गजब - ५८ : परीस्तान bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

अजब गजब - ५८ : परीस्तान
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

नानपन आजी - बय न सोवन क बेरा परी , राजकुमार की घाडी कथा सांगीती . वून की कथा खतम होन क पह्यले च कब डोरा लागत होता , इ ठाव बी नी पडत होतो . पर येक खरो अन् मोठो साजरो देस होतो , जे को नाव ' परीस्तान होतो . आब क पाकिस्तान अन् अफगानिस्तान क महादेव मुखऽ हिंदू कुस नाव को हिमालय सरखो परबत स . वो क वरतऽ क आंग बाल्ख ( बाल्हिक ) देस आन् खलतऽ क आंग परीस्तान देस होतो . 
आब क हिसाब कन् पाकिस्तान क खयबर पख्तुनख्वा इलाखा को चितराल जिला अन् अफगानिस्तान को नूरिस्तान इलाखो येम च परीस्तान होतो . इ.स. १८९३ म डुरंड लाइन कन् अफगानिस्तान भारतसीन बेगरो भयो उसो च परीस्तान बी दुय फाड भयो . 
आब तुमाला सवाल पड्यो होयेन क , येनऽ परीस्तान म कोन लोग रव्हत होता , को को राज होतो आन् आब वहान की हालत का स ?!.... सांगूस .... येकेक करकन् ..
१ . परीस्तान का लोग : भुरा , पिवरा बाल , निरा - हिवरा डोरा आन् गोराचिट्टा रंग का ' कलाश / कलश ' जनजाति को इ इलाखा .  परी सरखी सुंदर यहान की बाईलोग ! इ वंस इंडो - ग्रीक होयेन , असी मान्यता स . पाकिस्तान क चितराल जिला म ४००० आन् अफगानिस्तान क नूरीस्तान म १३०००० ' कलश ' लोग बाच्यास . ' कलश ' जनजाति म मातृसत्ताक कुटुंबपद्धती स . बाई घर की मालकीन रवस . यहान की बाईलोग खुद आपरो लाडो निवडस . खेत को काम , भेडबकरी चरावन को काम , लेनदेन बाईलोगना च करस . परीस्तान को धरम रुगवेद कार को पुरानो हिंदू धरम स . इ ' कलश ' भास्या बोलस . बाई ,  मानुस , पोटुबाटुना हात क कढाई वाला रंगीत कपडा पेहरस . बाईलोग क डोकसा पर अनोखी रंगीत ताज सरखी टोपी रवस . कोनी क मरन प ' कलश ' लोगना रोवत नी . बाई , मानुस संग च दारु पेस . संगीत , नाचगानो - बजावनो इ इन की परंपरा स . डरम आन् बासरी इ संगीत को मुख्य साधन स . ' कलश ' संस्कृती म मूरती पूंजा अन् बली परथा स . पोटुबाटू का नाव घर म काम आवन वालऽ अवजार , सामान पर धरस . जसो बालटी , कुकर , काम्पुटर....
२. इतिहास अन् मान्यता : * पसचिम अखंड भारत पर मुसलमान , तुरक ,  मंगोल का कयी हमला भया . जोर जबरदस्तीकन् लोगनाला मुसलमान बनावनो चालू भयो . पर इ.स. १८५९ पावतर इ देस गुलाम नी भयो . बेगरो चेहरो , बेगरो धरम होन क कारन हमलावर लोगना परीस्तान ला ' काफिरिस्तान ' कवनला लाग्या . 
* ' कलश ' लोगना सिकंदर क फऊज का बंसज होय , असी मान्यता स . अन् ' कलश ' आर्य वंस का स , असी बी मान्यता स.
*  परीस्तान न १५ वी सदी म तयमुरलंग ला हारायतो . वून क भेवकन् बाबर अन् चंगेजखान वूत गया च नी . 
* महमूद गझनी न मातर यहान मोठा हमला कऱ्या , मारकाट - तोडफोड करी . यहान का सबन मोठा देऊरना तोड्या अन् ' कलश ' को सबसिन पवितर मंतर लिख्यो दगुड संग लेकन गये . 
* इ.स. १८९३ म डुरंड लाइन कन् अफगानिस्तान बन्या बाद इ.स. १८९५ /९६ आमिर अबदुर रहमान खान न परीस्तान ( काफिरिस्तान ) प खूब मोठो हमलो कऱ्यो . वहान तमाम ' कलश ' लोगना ला मुसलमान बनाये . 
* आब क पाकिस्तान म सिरफ चितराल जिला म च परीस्तान बाचे . पर आब वू बी गुलामी म आये . पाकिस्तान बन्या बाद त 'कलश' प खूब जुलुम भयो . इ.स. १९७० - १९८० येन कार म ' कलश ' लोगना को घाडोच इस्लामीकरन भये . पहाडी पुहाडी म लुक्या ती च बाच्या . ' कलश ' लोग परंपरा का कट्टर स . कोनी बी येक डाव बाट्या प वोला धरम म वापिस नी लेस . 
* ' कनिष्क अन कुषाण ' राज क बास्त यहान ( परीस्तान ) म ' कलश ' राज आये जी इ.स. १८५९ पावतर होतो . 
* अफगाणिस्तान क तमाम ' कलश ' ला त मुसलमान बनाया च पर पाकिस्तान म बी वून की धूरधानी भयी . इ.स. २०१८  म पाकिस्तान न बाच्याता वोनऽ ' कलश ' लोगना की पह्यली  सिरगिनती करी . तब चितराल जिला क पहाडी तीन गाव म वूई ३८०० बाच्याता . ' आंतरराष्ट्रीय ' दबाव क कारन वून क धरम , परंपरा ला बाचाडनो या पाकिस्तान की जिम्मेवारी स . 
२. ' कलश ' लोगना की देव देवता : * ' कलश ' लोग इंदर ( इंद्र ) , यम , मार देवता की पूंजा करस . 
* हिंदू कुस परबत प सबसिन उच्ची चोटी पर ' कलश ' की ढोर डंगर , खेतीबाडी , फसलपानी की रखवाली करनी वाली 'कुशमाई ' देवता स . 
* संतान उतपत्ती की देवी " निर्माली " की ' कलश ' लोग पूंजा करस . 
* कब बी अन् कोनी की बी पूंजा कन् परसन्न होय कन् वकी राखन करनी वालऽ देवता को नाव स " महानदेवु "! ( महादेव ).
* इन क लोककथा को आदिपुरुस ' सलाकश ' स . ( सेल्युकस ) 
* लोककथा क आदिपुरुस को स्थान ' श्याम ' स . 
* ' कलश ' लोग देवता ला कबऽ दूध चढावस अन् कबऽ बली देस . 
३. ' कलश ' संस्कृती का तिवार : * ' कलश ' संस्कृती म मुख्य  तीन तिवार स . 
अ) चेमॉस / चौमास ( चतुर्मास ) - इ सबसिन मोठो तिवार डिसेंबर मह्यना म १४ दिन को रवस , आपलऽ दिवारी सरखो ! इ तिवार देऊर ( जेस्तेकन ) , खुली जागा , घर अन् आवार म मनावस . येनऽ तिवार म पोटीना आपरो लाडो निवडस . 
आ ) चिलम जोशी - इ ४ दिन को तिवार बसंत रितू ( मई मह्यना म ) म मनावस . 
इ ) उचावू - इ तिवार उनारा अन् हिवारा क मंझार सप्टेंबर मह्यना म मनावस . 
४. ' कलश ' भास्या : ' कलश ' भास्या इंडो - आर्यन भास्या कुल क दार्दी स्याखा की स . 
 # '  कलश शब्द '  - अथी , अठी =  अस्थि ( संस्कृत ) , हड्डी ( हिंदी ) 
# ' कलश शब्द ' - मुत्र , मूत्र = मूत्र ( संस्कृत ) , मूत्र , मूत ( हिंदी ) 
# ' कलश शब्द ' - ग्रोम = ग्राम ( संस्कृत ) , ग्राम , गॉंव ( हिंदी ) 
# ' कलश शब्द ' - रजूक , रझूक  = रज्जू ( संस्कृत ) , रस्सी , लेजुर ( हिंदी ) 
# ' कलश शब्द ' - धुम = धूम ( संस्कृत ) , धुअॉ , धुवॉं ( हिंदी )
# ' कलश शब्द ' - मोस = मांस ( संस्कृत ) , मांस , मास ( हिंदी ) 
# ' कलश शब्द ' - शुआं , शोआ = श्वान ( संस्कृत ) , कुत्ता , सुवान ( हिंदी ) 
# ' कलश शब्द ' - पिलिलक = पिपिल , पिप्पीलिक ( संस्कृत ) , चींटी , पिपरा , पिपडा ( हिंदी ) 
# ' कलश शब्द ' - पुत , पुत्र = पुत्र ( संस्कृत ) , पुत्र , पूत ( हिंदी ) 
# ' कलश शब्द ' - द्रिग = दीर्घ ( संस्कृत ) , दीर्घ , दीह ( हिंदी ) 
# ' कलश शब्द ' - अष्ट , अश्त = अष्ट ( संस्कृत ) , आठ ( हिंदी ) 
# ' कलश शब्द ' - छिना = छिन्न ( संस्कृत ) , छिन्न भिन्न , टूटा ( हिंदी ) 
# ' कलश शब्द ' - नाश = नाश , नाशयति ( संस्कृत ) , नाश होना , जान से मारना ( हिंदी ) 

इतिहास क कालचक्कर म केती संस्कृती पयदा भयी अन् नास बी भयी . केतरी बी मरन लाईक भयंकर इपदा , परिस्थिती आई तब बी आपलऽ संस्कृती ला बाचाडन को , वको जतन करन को काम आपलो च स . 

लेखक : इजि . सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर



3 comments:

  1. बहुत ही शानदार इतिहास की जानकारी

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  2. बहुत सुंदर जाणकारी

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