मांडवस साजवनी ( भोयरी कविता )
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
मांडवस साजवनी
साल बदल्यो पुरानो
रात अवस की सपी
गावो चईत को गानो ।१।
पाच तास मोह्यतूर
वान उगावून दानो
घर सिवार तोरन
मन चांदी आस सोनो ।२।
रुत घात को चक्कर
आज उजरो चांदन्यो
साजी घर पर गुढी
म्हरो च्यारी धाम बन्यो ।३।
नवो साल नवो ताल
पुरो बदल्यो गा बानो
नवी फुट झाड पेड
बन्यो सपना को ठानो ।४।
देखी चईत पालवी
केतो वोला वान्हवनो
भाग कपार प लिख्यो
सत् वोको पान्हवनो ।५।
रचना : इंजि. सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
मांडवस साजवनी,सुंदर भोयरी कविता 👌🌹
ReplyDeleteधन्यवाद जी 🙏
Deleteनूतन वर्ष मंगलमय हो। खूब साजरी रचना
ReplyDeleteधन्यवाद जी
Deleteखुप साजरी रचना।
ReplyDeleteधन्यवाद जी 🙏
Deleteखूब साजरी रचना अभिनंदन नूतन वर्ष
ReplyDeleteधन्यवाद जी
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