नदी माय
( भोयरी बोली )
नदी बाई माय म्हरी पहाड म घर
लेकरुना क माया पोटं आयी भूई पर ।१।
नदी बाई माय म्हरी निरो निरो पानी
हरु लह्यर म गाये ममता की बानी ।२।
नदी माय पानी देये सारा यी तिसा ला
कोनी रव्हो , कसो रव्हो नहाय भेदभाव वोला ।३।
खेती बाडी माय कन् असी गा बह्यरस
म्हरं थाटी म भाजी भाकर को घास ।४।
सरावन , आस्याढ म आवस गा पूर
आघं वाला क भला साठी जास दूर दूर ।५।
माय सांगे नी थांबनो , आघं आघं चालो
थांबे वोकी हार , यस चालता को भलो ।६।
_ कवी कुसुमाग्रज
भास्यांतर : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
खूब साजरी रचना
ReplyDeleteधन्यवाद जी
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