Saturday, February 27, 2021

नदी माय

नदी माय
( भोयरी बोली ) 

नदी बाई माय म्हरी पहाड म घर
लेकरुना क माया पोटं आयी भूई पर ।१।

नदी बाई माय म्हरी निरो निरो पानी
हरु लह्यर म गाये ममता की बानी ।२।

नदी माय पानी देये सारा यी तिसा ला
कोनी रव्हो , कसो रव्हो नहाय भेदभाव वोला ।३।

खेती बाडी माय कन् असी गा बह्यरस
म्हरं थाटी म भाजी भाकर को घास ।४।

सरावन , आस्याढ म आवस गा पूर
आघं वाला क भला साठी जास दूर दूर ।५।

माय सांगे नी थांबनो , आघं आघं चालो
थांबे वोकी हार , यस चालता को भलो ।६।

_ कवी कुसुमाग्रज
भास्यांतर : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

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