Saturday, February 20, 2021

अजब गजब - ४९ : बसंतगढ़ bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

अजब गजब - ४९ : बसंतगढ़
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

राजस्थान क सिरोही जिला म पिन्डवाडा उपखंड पासिन ८ कि.मी. पर सरोसती नदी काठ बसंतगढ़ स . आपलऽ जमाना मऽ बसंतगढ धारमिक अन् सांस्कृतिक ठिकानो होतो . तांबा पीतर की मूरतीना घडवन को बसंतगढ़ म मोठो कारोबार होतो . पुरानऽ जमाना मऽ घडायी यहान की मूरतीना आब बी कई देऊर म स . आब बी बसंतगढ़ म आन् वोकऽ आसपास कई कारागीर स . बसंतगढ़ पह्यले पासिन रुसी मुनी को ठिकानो होतो . यहान देऊरना की भरमार स . बसंतगढ़ क दरुजा पर परसिध्द गनपतीजी की मूरती होती . वा आब जवर च भटेस्वर महादेव मंदिर म स . 
बसंतगढ म रिसी वसिस्ठ जी को आसरम होतो , तेकन नाव पड्ये ' वसिस्ठपुर ' ! 
बसंतगढ म बड का घाडा झाडना , तेकन नाव पड्यो ' वटपुर ' , ' वटनगर ' !

इतिहास : * बसंतगढ की स्थापना रिसी वसिस्ठ जी न करी , असी मान्यता स . वूनी न अरक आन् भरग देऊर बांधे .
* राजस्थान को सबसिन पुरानो सिलालेख बसंतगढ म च सापडेस . ( वि.स. ६२८ )
* इ.स. ६८० पावतर यहान चावड वंस को राजो ' वरमालत ' को राज होतो . 
* इ.स. ७२१ म वरमालत राज्या क सामंत राजिल्ला को पोरग्यो ' नागभट्ट ' को यहान राज होतो .
* इ.स. १०३१ म महिपाल को पोरग्यो ' राजा धुंधक ' न राज करे .  राजा धुंधक की विधवा पोटी न यहान सूर्व्यमंदिर ला साजरो बांध्ये .
* येकऽ बाद बसंतगढ़ पर परमार राज आये . इ.स. १०४२ म धनुका को पोरग्यो राजा पुरनपाल न राज करे . राजा पुरनपाल की नानी बहिन लाहिनी को बिह्या विग्रहराज संगऽ भयोतो . वोकऽ लाडा क सर्गवास क बाद राजा पुरनमल न बसंतगढ ला राजधानी बनायीती . वहान तब की बहिन लाहिनी की बावडी आज बी मवजूद स . 
* इ.स. १४३३ पासिन १४६८ पावतर यहान गुहिल राजो ' राना कुम्भा ' को राज रह्ये . 

# परमार वंस न राज करे वोनऽ बसंतगढ़ ला सबन भुल गयास . आबऽ खंडारा क खलऽ आपलो इतिहास दबे स . ना वकी ढंग की राखन स , ना जतन ! 
# खंडारा म तबदिल इ वयभवस्याली इतिहास आघऽ आये पाह्यजेन . आमारो करम , आमारऽ धरम क हिसाबकन रह्या पाह्यजेन....
जय राजा भोज....🙏

( स्रोत : इंजि . जालमसिंग जी सोढा , जोधपुर )
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

3 comments:

  1. खूप साजरी माहिती।

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  2. इतिहास की जानकारी अभिनंदन

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