भोयरी संस्कृति - ४० : मानिनी अन् सेंदऱ्या देव पूंजा
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
ॐ पितृ दैवतायै नमः
भोयर समाज पितर पूजक स . भोयर संस्कृति म पितर का प्रतीक सेंदऱ्या देव अन् मानिनी स . सुभ काम , सन तिवार ला इन की पूंजा होस . आपलऽ कुर म जेता बी पितर भयास , वून की मानिनी घडावस . येक पेवली म सेंदऱ्या देव आन् दुसरऽ पेवली म मानिनी ला खारी म गुंडारकन धरस . पेवलीना बी खारी कन च बांधकन रव्हस .
पाचपावली की पूंजा सोडकन बाकी की पूंजा चवरी जवर मांडस आन् वून की पूंजा रात कन करस . चवरी क आघऽ चऊक पुरकन वोपर खारी ( लाल सुती कपडो ) डावस . वोपर सवा सेर ( नी त पाच मुठ ) चऊर की रास मांडस . पानी कन धोयकन पह्यले सेंदऱ्या देव मांडस . वून क आघऽ मानिनी मांडस . वून क भवताल पाच सुवारी ( पाती ) , बडा पर कनिक का पाच दिवा बारस . बरी गवरी प रार डावस . रार नी होयेन त् तूप डावस . उदबत्ती लगावस . सेदऱ्या देवना ला सेंदूर लगावस आन् मानिनी ला हरद कुकू वाहस . लिंबू , बेल , फुल , अकसिद कन पूंजा करस . नारेल वाहस . बडा , भात , पापड , सुवारी को कुसकर कन निवद बनावस . कापुर बारस . नारेल फोडकन् वको गुर नी त् साकर संग परसाद धरस . देवना धोस वोनऽ पानी को तीरथ लेस आन् बाचे पानी बिंदराबन म डावस .
साल भर म का कयी खास तिवार आन् परसंग असा स जेनऽ दिन भोयर सेंदऱ्या देवना की पूंजा करस .
१. आखाडी : आस्याढ मह्यना क पुनव ला आखाडी , अखाडी , गुरूपौर्णिमा कोस . आखाडी तिवार ला सेंदऱ्या देव की पूंजा करस .
२. गायगोंधन ( दिवारी ) : कारतिक अवस ला लक्षुमी पूंजा ( दिवारी ) रव्हस . दिवारी क दुसरऽ दिन ( पडवा ला ) गायगोंधन कोस . गायगोंधन ( बलीप्रतिपदा ) क तिवार ला सेंदऱ्या देव की पूंजा करस .
३. देवमाई : पुस मह्यना क अवस ला देवमाई तिवार रव्हस . देवमाई ला पूंजा कऱ्या कन पितरना क आत्मा ला स्यांती भेटस , असी मान्यता स . देवमाई क पूंजा कन पितर संग च बरमा देव , इंदर देव , सूर्व्य देव , अगनी देव , वायु देव , रिसी मुनी , पाखरू जनावर असा तमाम परसन्न होस . देवमाई तिवार ला सेंदऱ्या देव की पूंजा करस .
४. पाचपावली ( महासिवरातरी ) : महासीवरातरी ला उपास रव्हस . महासिवरातरी क दुसरऽ दिन ला पाचपावली कोस . येनऽ दिन दुफारकन् आंगना म दुय खाटना उभी करकन् वोपर गोनो / चादर डायकन् मांडो ( सावली ) करस . वोमऽ सेंदऱ्या देव की पूंजा करस . वोकऽ बाद महासिवरातरी का उपास सोडस .
५ . सिमगो ( होरी ) : फालगुन ( फाग ) मह्यना क पुनव ला सिमगो ( होरी ) तिवार रव्हस . सिमगा ला सेंदऱ्या देव की पूंजा करस .
६ . घर म पोटु / पोटी क जलम क बाद सवा मह्यना म सेंदऱ्या देव की पूंजा करस .
७ . देवादेवी : घर म बिह्या स्यादी होयेन त् मांडो पडन क पह्यलऽ दिन रात म सेंदऱ्या देव की पूंजा करस . या पूंजा रात भर उसीच राखस . दुसरऽ दिन ( मांडो पडन क दिन ) पूंजा म की पाच मानिनीना नवऽ पाड्डा म लेस . वून ला लेकन भीर पर पूंजा साठी जास . भीर जवर जागा सरावस . सरायी जागा प तुराटी क डेरी को नानोसो मांडो बनावस . मांडो ला सुत गुंडारस . वोनऽ मांडो म मानिनीना मांडस . पाच पाती , पाच बडा , पाच दिवा धरकन पूंजा करस . गुर स्येरनी को परसाद बाटस . पूंजा भया बाद मानिनीना धोयकन पाड्डा म धरस . मांडो , पूंजा को सामान भीर म सिरावस . पूजा वाली जागा ला अऊर सरावस . भीर परीन वापिस आवन क बेरा पाच घर म जास . घरवाली पाड्डा म की मानिनीना जेकऽ जवर स वका पायना धोस . अकसिद लगावस आन् पाड्डा म दकसिना डावस . भीर प पूंजा साठी जान वालऽ पाच झन क खांदा पर नवा कपडा रव्हस . पाच घर की पूंजा भया बाद आपलऽ घर आवस . मानिनी वापिस पूंजा म धरस . सेंदऱ्या देव की अनखिन पूंजापाती करस आन् बाद म पूंजा उचलस .
८ . आपलऽ कुर को कोनी कुटुंब दुसरऽ गाव ला होयेन आन् वून क घर बिह्या होयेन त् वूई देवना लिजान साठी आवस . वून ला पाहुनचार करस . देव की पेवलीना खोलत नी . पेवली ला च धूप , निवद दिखाडकन पाव्हना जवर देस . रेंगी , खासर , मोटारगाडी म देव ( पेवलीना ) लिजान क बेरा आघऽ धरस .
# भोयर संस्कृति म पूंजा की रास ( सवा सेर चऊर ) की पूंजा भया बाद खीर बनायकन वको परसाद लेन को रिवाज स . स्येरनी , तीरथ , खीर , परसाद सिरफ कुर का च लोगना ला चालस .
( स्रोत : सौ. पार्वतीबाई महादेवराव देशमुख )
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
हमारी परंपरा को आप अपनी भाषा में बहुत ही शानदार लिख रहे हैं। अभिनंदन।
ReplyDeleteलय साजरो
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